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कब्ज की वजह से होती है पाइल्स, फिशर और फिस्टुला की समस्या

पहली स्टेज में पाइल्स का पता नहीं चलता है। इसमें मस्से व जोर लगाने पर खून आ जाता है ।

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कब्ज की वजह से होती है पाइल्स, फिशर और फिस्टुला की समस्या

कब्ज की वजह से होती है पाइल्स, फिशर और फिस्टुला की समस्या

आज के अव्यवस्थित खानपान और आधुनिक जीवनशैली के कारण कब्ज एक आम समस्या बन गई है। कब्ज में मल बहुत कड़ा हो जाता है तथा मलत्याग में मुश्किल होती है। पेट साफ नहीं हो पाता है। ज्यादा जोर लगाने से भी स्टूल पास नहीं होता है। यह पाचन से जुड़ी एक समस्या है। यदि कब्ज ज्यादा दिन तक रहे और इसका समय पर इलाज न कराया जाए तो बवासीर, फिशर, फिस्टुला की समस्या भी हो सकती है। आईये जानते हैं इनके बारे में।

बवासीर -
बवासीर या पाइल्स में गुदा मार्ग के अंदर व बाहरी हिस्से में सूजन आ जाती है। इस वजह से उसके अंदर व बाहरी हिस्से में मस्से निकलने लगते हैं। इस कारण से मल विसर्जन करने के दौरान दर्द व खून निकलता है। मस्से बाहर की ओर आ जाते हैं।

फिशर -
फिशर भी एक तरह का गुदा रोग है। इसमें गुदा में व आसपास के हिस्से में दरारें व कट हो जाते हैं।

फिस्टुला-
फिस्टुला में गुदा के आसपास छेद होने से उसमें तेज दर्द, सूजन, लाल त्वचा, कब्ज और मल-त्याग के समय खून आने लगता है। अगर सही समय पर इलाज न कराया जाए तो यह कैंसर और आंतों की टी.बी. का कारण बन सकती है।

पाइल्स के लक्ष्ण-
शुरुआत में तो पाइल्स के लक्षण दिखाई नहीं देते। पहले हल्की खारिश महसूस होती है, गुदा के अंदर मस्से व जोर लगाने पर हल्का खून आता है, फिर दूसरी स्टेज में मल त्याग के वक्त मस्से बाहर आने लगते हैं। इसमें दर्द व खून निकलता है। तीसरी स्टेज में मस्से बाहर निकल आते हैं इसमें मरीज को तेज दर्द व मल के साथ खून ज्यादा आता है। आखिरी स्टेज में मस्से बाहर की ओर लटक जाते हैं। संक्रमण का भी खतरा रहता है।

इसके कारण क्या हैं-
असमय खानपान, मिर्च-मसालेदार चीजें खाने, तनाव, खराब जीवनशैली की वजह से दिक्कत होती है।

उपचार-
भोजन में फाइबर व प्रोटीन युक्त चीजों को शामिल करें । मौसमी, हरी सब्जियां, सोयाबीन, दालें, दानामेथी, अलसी के बीज आदि का सेवन करें। डिब्बाबंद चीजों से परहेज करें। शाकाहारी भोजन लें। मैडिटेशन, योग, आयुर्वेद और दवाओं से भी उपचार किया जा सकता है। तीसरी और चौथी स्टेज में सर्जरी की जाती है। इसमें एंडोस्कोपी से इलाज आसान है।

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