
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में वैक्सीनोलॉजी विभाग की प्रोफेसर सारा गिल्बर्ट ने कहा कि सीएचएडीओएक्स1 तकनीक के साथ इसके 12 परीक्षण किए जा चुके हैं। एक डोज से ही इम्युनिटी को मजबूत करने में सकारात्मक परिणाम मिले हैं। वहीं आरएनए और डीएनए तकनीक में इसके दो या दो से ज्यादा डोज की जरूरत होती है। ऑक्सफोर्ड की टीम को इस टीके पर इतना विश्वास है कि उसने क्लिनिकल ट्रायल से पहले ही इसका उत्पादन शुरू कर दिया है। इस बारे में प्रोफेसर एड्रियन हिल का कहना है कि टीम आत्मविश्वास से भरी हुई है। वे सितंबर तक क्लिनिकल ट्रायल का इंतजार नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा कि हमने जोखिम के साथ बड़ी तादाद में वैक्सीन का उत्पादन शुरू कर दिया है। दुनिया के विभिन्न हिस्सों में कुल सात निर्माताओं के साथ इसका उत्पादन किया जा रहा है।
10 लाख डोज उपलब्ध होगी
प्रोफेसर हिल का कहना है कि सात निर्माताओं में से तीन ब्रिटेन, दो यूरोप, एक चीन और एक भारत से हैं। इस साल सितंबर या साल के अंत तक इस टीके के 10 लाख डोज उपलब्ध होगी। इसका ट्रायल 510 वॉलंटियर्स के साथ तीन चरणों के ट्रायल की शुरुआत हो गई है। तीसरे चरण में करीब 5000 वॉलंटियर्स पर होगा।
Published on:
21 Apr 2020 10:13 am

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