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कोरोना टीके से हार्ट अटैक और ब्लड क्लॉटिंग से बचाव

राहत की खबर : ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं का दावा, वैक्सीन वालों में संक्रमण पर अस्पताल में भर्ती होने या जान का खतरा कम

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कोरोना टीके से हार्ट अटैक और ब्लड क्लॉटिंग से बचाव

कोरोना टीके से हार्ट अटैक और ब्लड क्लॉटिंग से बचाव

लंदन. कोविड-19 वैक्सीन के प्रभावों पर नए अध्ययन में दावा किया गया कि वैक्सीन से हृदय के स्वास्थ्य पर कोई नकारात्मक असर नहीं होता, बल्कि यह वैक्सीन हार्ट अटैक के खतरे से सुरक्षा देने वाली पाई गई है। ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने बताया जिन लोगों को कोविड-19 के टीके लगे हैं, उनमें हार्ट अटैक का खतरा उन लोगों के मुकाबले कम देखा जा रहा है, जिन्होंने टीका नहीं लगवाया है।

हार्ट जर्नल में प्रकाशित अध्ययन की रिपोर्ट के मुताबिक टीके लगवाने के एक साल तक ये हार्ट को सुरक्षा देते हैं। वैक्सीनेशन के करीब 10-12 महीने तक वैक्सीन रक्त के थक्के कम करने में भी मददगार पाई गई। शोधकर्ताओं का कहना है कि वैक्सीन ले चुके लोग अगर संक्रमण के शिकार होते भी हैं तो उनमें अस्पताल में भर्ती होने या मृत्यु का खतरा कम रहता है। रिपोर्ट के मुताबिक महामारी की शुरुआत से ही चर्चा होती रही है कि कोरोना वायरस से संक्रमितों में ब्लड क्लॉटिंग की समस्या हो सकती है। शोध में दावा किया गया कि टीकों की मदद से कोरोना के इस गंभीर दुष्प्रभावों से बचाव किया जा सकता है।

दो करोड़ लोगों के डेटा का विश्लेषण

शोधकर्ताओं ने ब्रिटेन, स्पेन और एस्टोनिया में रहने वाले दो करोड़ से ज्यादा लोगों के स्वास्थ्य डेटा का विश्लेषण किया। करीब आधे लोगों को बायोएनटेक/फाइजर, मॉडर्ना, एस्ट्राजेनेका या जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन लगाई गई थी। शोधकर्ताओं के मुताबिक ज्यादातर लोगों में इन टीकों के दुष्प्रभाव नहीं पाए गए। टीकों को लेकर किसी तरह की चिंता की जरूरत नहीं है। ये पूरी तरह सुरक्षित पाई गईं।

गंभीर जोखिम घटाने में मददगार

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और अध्ययन के लेखक नूरिया मर्केड बेसोरा कहते हैं, हमारे निष्कर्ष इस तथ्य की पुष्टि करते हैं कि कोरोना के टीके संक्रमण को कम करने में प्रभावी हैं और गंभीर जोखिमों को भी कम करते हैं। इससे पहले के अध्ययनों में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने आशंका जताई थी कि कोरोना वैक्सीन से ब्लड क्लॉटिंग का खतरा हो सकता है।