
Deepika Priyanka Saif Salman suffer Obsessive Compulsive Disorder
किसी भी काम की आदत जब जूनन या हद से ज्यादा बढ़ने लगती है तो ये एक सिंड्रोम में बदल जाती है। ये सिंड्रोम ही आब्सेसिस कंपल्सिव डिसॉर्डर कहलाता है। दीपिका पादुकोण से प्रियंका चोपड़ा और सलमान से लेकर सैफ अली खान और विद्या बालन तक आब्सेसिस कंपल्सिव डिसॉर्डर से ग्रस्त हैं।
अभिनेत्री विद्या को घर में बार-बार साफ-सफाई करने की आदत है। ऐसे ही अजय देवगन को बदबू करने वाली उंगलियां नहीं पसंद है। इसीलिए वह हाथ के बजाए चम्मच से खाना खाते हैं। वहीं प्रीति जिंटा के बारे में बताया जाता है कि वह बॉथरूम की सफाई को लेकर काफी ऑब्सेस्ड हैं।
दीपिका पादुकोण सामान को अरेंज करने को लेकर जूननी हैं। जबकि सैफ अली खान को बॉथरूम में घंटों बैठे रहना अच्छा लगता है। सनी लियोनी को बार-बार हाथ- पैर धोने की धुन रहती है तो सलमान खान को साबुन इकट्ठे करने का जूनन है। प्रियंका चोपड़ा कटलरीज और नैपकिंस इकट्ठे करने की अजीब सी आदत है। तो चलिए जानें कि ये आब्सेसिस कंपल्सिव डिसॉर्डर है क्या और इसका इलाज क्या है।
आब्सेसिस कंपल्सिव डिसॉर्डर क्या है
आब्सेसिव कंपल्सिव डिसॉर्डर नामक गंभीर मनोवैज्ञानिक समस्या का लक्षण है। इससे ग्रस्त व्यक्ति एक ही क्रिया को लगातार दोहराने लगता है।
क्यों होता है ऐसा
मनोविज्ञान में इस बीमारी को साइको न्यूरॉटिक डिसॉर्डर मानते हैं। इससे ग्रस्त लोग बिलकुल सामान्य दिखते हैं और दूसरों के साथ अपनी परेशानी के बारे में बताने से भी नहीं हिचकते। इसके लिए केवल कोई एक कारण नहीं होता। घर के माहौल से लेकर बच्चों की सख्त परवरिश, निराशा, असुरक्षा, भय और असंतुष्टि जैसी कई नकारात्मक भावनाएं इसके लिए जिम्मेदार होती हैं। चिंता और तनाव एक बड़ा कारण होता है। टीनएजर्स और पेरेंट्स में कम्युनिकेशन गैप इसकी बड़ी वजह हो सकती है।
ओसीडी के लक्षण
इसके लक्षण लोगों पर अलग-अलग होते हैं। किसी को ज्य़ादा सफाई पसंद होना, बार-बार हाथ धोने या फर्श पर पोंछा लगाने या किसी एक काम में परफेकशन को लेकर पागलपन होना। ऐसे लोगों को अगर कोई समझाने की कोशिश करता है तो वे बुरी तरह नाराज़ हो जाते हैं। इसी तरह अगर कोई स्वयं को असुरक्षित महसूस करता है तो वह अपनी रखी चीज़ों को बार-बार संभालता रहता है।
क्या है नुकसान
ये आदत जब सनक में बदलती है तो इससे कई परेशानियां हो सकती हैं। इससे पीडि़त व्यक्ति के लिए अपनी ऑब्सेसिव सोच या क्रियाओं को नियंत्रित करना असंभव होता है। अगर मरीज़ को ऐसा करने से रोका जाता है तो उसे बहुत बेचैनी महसूस होती है और कई बार उसका व्यवहार हिंसक हो जाता है। नतीजतन इस समस्या से ग्रस्त लोगों के निजी और प्रोफेशनल संबंध तनावपूर्ण हो जाते हैं। उनकी पूरी दिनचर्या अस्त-व्यस्त हो जाती है, उसे जिस किसी कार्य का ऑब्सेशन हो जाता है, वह उसके सिवा कोई दूसरी बात सोच भी नहीं पाता। इससे अनिद्रा, भोजन में अरुचि, चिड़चिड़ापन, सिरदर्द और थकान जैसी समस्याएं भी उसे परेशान करने लगती हैं।
क्या है उपचार
साइको थेरेपी के साथ मेडिकेशन से ये समस्या काबू में की जा सकती है।
डिस्क्लेमर- आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए दिए गए हैं और इसे आजमाने से पहले किसी पेशेवर चिकित्सक सलाह जरूर लें। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने, एक्सरसाइज करने या डाइट में बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
Published on:
07 May 2022 02:21 pm
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