
डायबिटीज यानी शरीर में शुगर का असंतुलन केवल एक बीमारी नहीं है, इसे कई रोगों की जड़ भी कहा जा सकता है। अगर इसे नियंत्रित कर लिया जाए तो कई गंभीर रोगों से बचा जा सकता है। शरीर में शुगर का अनियंत्रित रहना करीब एक दर्जन बीमारियों का सीधे तौर पर कारण बन सकता है।
डायबिटीज के प्रकार
इसके दो मुख्य प्रकार होते हैं। टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज। तीसरा प्रकार है गर्भावस्था में भी डायबिटीज जिसे जस्टेशनल डायबिटीज के नाम से जानते हैं। अधिकतर महिलाओं में डिलीवरी के बाद ये यह स्वत: ही ठीक हो जाता है।
टाइप 1 : यह बच्चों में पाया जाता है जो 20 साल से कम उम्र के बच्चों में देखा जाता है। इसमें इंसुलिन की सेंसिटिविटी खत्म हो जाती है और शरीर का मेटाबॉलिक सिस्टम खराब हो जाता है तो शुगर का लेवल बढऩे लगता है। जब बीटा सेल्स नहीं बने होते हैं या खराब हो जाते हैं तब बच्चों को टाइप 1 डायबिटीज होती है।
टाइप २ : इससे ग्रसित मरीजों की संख्या 90 फीसदी से अधिक है। इसमें इंसुलिन की सेंसिटिविटी कम हो जाती है। हमारे शरीर के लिए जितनी इंसुलिन की आवश्यकता होती है, उतने इंसुलिन की मात्रा हमारे शरीर को नहीं मिल पाती है। यह डायबिटीज 20 साल से अधिक की उम्र वालों में होती है।
संभावित लक्षण
बार-बार प्यास लगना, भूख का बढऩा, अचानक वजन का बढऩा या घट जाना, थकान और कमजोरी महसूस होना, घाव का जल्दी न भरना, फोड़े-फुंसी निकलना, आंखों की दृष्टि धुंधली होना, दांतों में परेशानी, हाथ पैर में झुनझुनी या सुन्नपन या पैरों में दर्द आदि।
तीन तरह के नुकसान
जिनको लंबे समय तक डायबिटीज रहता है उनको दो तरह की परेशानी होती है। छोटी नसों में दिक्कत यानी माइक्रोवेस्कुलर समस्या और दूसरी, बड़ी नसों में परेशानी। छोटी धमनियों में जो समस्याएं हैं उससे न्यूरोपैथी, नेफ्रोपैथी यानी किडनी से जुड़ी समस्या और रेटिनोपैथी यानी आंखों से जुड़ी दिक्कत होती है। डायबिटीज के मरीजों में सबसे ज्यादा परेशानियां न्यूरोपैथी से जुड़ी होती हैं। यह पैरों में घाव की आशंका बढ़ाती है। इसमें सुन्नपन व जलन की समस्या होती है। नेफ्रोपैथी में किडनी रोगों की आशंका बढ़ जाती है। रेटिनोपैथी में आंखों से धुंधला दिखाई देता है।
हैल्दी डाइट
शुगर की बीमारी में डाइट का अहम रोल है। संतुलित भोजन के साथ यह भी जरूरी है कि आप समय पर अपना हर मील लें।
नियमित व्यायाम
एक्सरसाइज को अपने रुटीन का हिस्सा अवश्य बनाएं। नियमित 30 मिनट व्यायाम करें। रात्रि भोजन के बाद कम से कम 10 मिनट तक जरूर टहलें।
वजन नियंत्रित रखें
मोटापा और डायबिटीज समानान्तर चलने वाले रोग हैं। इसलिए अपने वजन को नियंत्रित अवश्य रखें। समय-समय पर अपना वजन चेक करते रहें।
स्ट्रेस फ्री लाइफ
लाइफस्टाइल को ऐसा रखें कि आप तनाव से मुक्त रहें। काम के दबाव या घर में किसी बात को लेकर तनाव न लें। खुश रहें। परिवार के सदस्य भी स्ट्रेस फ्री रखने का प्रयास करें।
शुगर कंट्रोल के फायदे
किडनी की समस्या कई गुना घट जाती है
हार्ट डिजीज होने की आशंका 2-4 गुना तक घट जाती है
दो गुना तक कम हो जाती है लकवे की आशंका
पैरों में घाव के मरीजों की संख्या आधी रह जाती है
देश में ब्लाइनेंस (नॉन ट्रॉमैटिक-मोतियाबिंद) का सबसे बड़ा कारण ही डायबिटीज हैै
अचानक शुगर डाउन होने लगे तो...
यदि डायबिटीज के मरीज का शुगर लेवल डाउन हो जाए तो यह खतरनाक स्थिति है जिसे हाइपोग्लाइसीमिया कहा जाता है। यह स्थिति शुगर का स्तर 70 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से नीचे होने पर होती है। अगर ये स्तर 40 से कम हो जाए तो रोगी कोमा में जा सकता है। इसे हाइपोक्सिया एन्सेफ्लोपैथी कहते हैं।
लक्षण: जब मरीज का शुगर लेवल कम होने लगे तो उसे कमजोरी, घबराहट, पसीना आना और सिंकिंग सेंसेशन होने लगते हैं।
कारण: अक्सर शुगर का स्तर गिरने के पीछे कारण है कि मरीज ने शुगर की दवा ली लेकिन खाना नहीं खाया। उसके अलावा यदि बीमार हैं तो इंसुलिन ले लिया, दवा ले ली, लेकिन ठीक से भोजन नहीं किया। ऐसे में जितनी जरूरत होती है, उस हिसाब से भोजन शरीर को नहीं मिला तो शुगर कंट्रोल में समस्या हो सकती है।
क्या करें: इस स्थिति में मरीज को तुरंत शुगर यानी चीनी से बनी चीज जैसे कैंडी या मिठाई खानी चाहिए। जो भी मरीज डायबिटीज से ग्रसित है, उसे अपनी जेब में शुगर कैंडी जरूर रखनी चाहिए। उसके अलावा शुगर कार्ड (डिजीज आइडेंटिटी) भी अवश्य रखना चाहिए।
अचानक शुगर बढऩे लगे तो...
वैसे देखा जाए तो शुगर लेवल अचानक नहीं बढ़ता, इसके पीछे दो-तीन कारण हो सकते हैं। डायबिटीज के रोगी को नियमित अपने शुगर के स्तर की जांच जरूर करनी चाहिए। यदि सुबह के समय आपका ग्लूकोज स्तर लगातार बढ़ा रहता है तो डॉक्टर से आहार और लाइफस्टाइल से संबंधित सलाह अवश्य लेनी चाहिए।
लक्षण: शुगर बढऩे पर बार-बार यूरीन और डिहाइड्रेशन होता है। शुगर 500-600 हो जाए तो हाइपर ऑस्मोलर कोमा की स्थिति आ जाती है।
कारण: यह दो-तीन कारण से बढ़ सकता है जैसे कोई संक्रमण होना, कॉर्टिकोस्टिरॉइड की गोली खाना या फिर शुगर की दवा बंद करना। उस स्थिति में शुगर का स्तर बढ़ जाता है। जब मरीज ने खाना नहीं खाया, दवा नहीं ली तो शुगर का स्तर और कीटोन बॉडी बढऩे की स्थिति को कीटो एसिडोटिक कोमा कहा जाता है।
क्या करें: डॉक्टर और आहार विशेषज्ञ की ओर से सुझाए मील-प्लान का पालन करें। छोटे-छोटे पोर्शन में भोजन करें। अपने ब्लड शुगर का एक उचित रिकॉर्ड रखें। आपात स्थिति के लिए टूल किट तैयार रखने की सलाह डॉक्टर से लें। अगर कीटोन का स्तर अधिक होता है तो उल्टी आती है।
Published on:
07 Oct 2023 05:52 pm
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