
Super Fungus Alert (photo- chatgtp)
Super Fungus Alert: दुनिया भर के डॉक्टर और वैज्ञानिक अब एक नए खतरे को लेकर अलर्ट कर रहे हैं, दवाइयों से न मानने वाले फंगल इंफेक्शन। अब तक हम ज्यादातर बैक्टीरिया और वायरस की बात करते थे, लेकिन अब फंगस (fungi) भी बड़ा खतरा बनता जा रहा है।
हाल ही में करीब 50 वैज्ञानिकों ने, जिनमें University of Manchester के प्रोफेसर Mike Bromley भी शामिल हैं, जर्नल Nature Medicine में एक रिपोर्ट जारी की है। इसमें साफ कहा गया है कि अगर अभी कदम नहीं उठाए गए, तो ये फंगल इंफेक्शन आगे चलकर जानलेवा और लाइलाज हो सकते हैं।
डॉक्टरों के मुताबिक, हर साल दुनिया में 1 अरब से ज्यादा लोग फंगल इंफेक्शन से प्रभावित होते हैं। इनमें से लाखों केस गंभीर होते हैं और कई लोगों की जान भी चली जाती है। सबसे चिंता की बात ये है कि कुछ खतरनाक फंगस जैसे Candida auris, Aspergillus fumigatus और Cryptococcosis अब दवाइयों के असर से बचने लगे हैं।
फंगल इंफेक्शन की सबसे बड़ी समस्या ये है कि इसे पहचानना आसान नहीं होता। इसके लक्षण अक्सर दूसरी बीमारियों जैसे लगते हैं, इसलिए इलाज में देरी हो जाती है। खासकर कैंसर मरीज, ट्रांसप्लांट वाले मरीज या डायबिटीज से जूझ रहे लोगों में ये जल्दी जानलेवा बन सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे कई वजहें हैं। जैसे दवाइयों और खेती में फंगीसाइड का ज्यादा इस्तेमाल होना। बढ़ता तापमान (क्लाइमेट चेंज), नए एंटीफंगल दवाओं की कमी और पर्यावरण में केमिकल्स का लंबे समय तक बने रहना शामिल है। प्रोफेसर Mike Bromley के अनुसार, किसान फसलों को बचाने के लिए जो फंगीसाइड इस्तेमाल करते हैं, वही केमिकल्स फंगस को मजबूत बना रहे हैं, जिससे वो इंसानों में भी दवाइयों से नहीं मरते।
पहले ज्यादातर फंगस इंसान के शरीर के तापमान में जिंदा नहीं रह पाते थे, लेकिन अब बढ़ती गर्मी के कारण ये खुद को एडजस्ट कर रहे हैं। इससे नए-नए खतरनाक फंगस इंसानों को संक्रमित कर सकते हैं।
अभी एंटीफंगल दवाओं के बहुत कम विकल्प हैं। अगर फंगस एक दवा से भी रेसिस्टेंट हो जाए, तो इलाज मुश्किल हो जाता है। कुछ केस में तो Candida auris सभी दवाओं से बच निकलता है, जिसे “सुपर फंगस” कहा जा रहा है।
डॉक्टरों और रिसर्चर्स का कहना है कि अब तुरंत कदम उठाने की जरूरत है:
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Published on:
17 Apr 2026 11:12 am
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