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HEALTH TIPS : बच्चों का मानसिक विकास सही हो रहा या नहीं, ऐसे पहचानें

दैनिक कार्यों के करने में दिक्कत आने व मानसिक क्षमता (आइक्यू लेवल) में कमी को इंटलैक्चुअल डिसेबिलिटी कहा जाता है। इस तरह स्पेशल चाइल्ड को दो श्रेणी में रखते हैं।

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HEALTH TIPS

बुद्धिमत्ता की कमी से 85% बच्चों को दिक्कत होती है। आनुवांशिक, किसी बीमारी या चोट के कारण भी हो सकती है।
समझने में लेते समय
मानसिक क्षमता : जन्म के समय शिशु का वजन कम होने से मानसिक विकास पर भी असर पड़ता है। प्रसव के दौरान ऑक्सीजन की कमी भी बच्चे में मानसिक मंदता का कारण बनती है। ऐसे बच्चे जिनका आइक्यू लेवल यानी इंटेलिजेंस कोसेंट कम होता है, उनके सीखने, तर्क करने, निर्णय लेने की क्षमता सामान्य बच्चों की अपेक्षा काफी कम होती है। वे किसी चीज को समझने में सामान्य से काफी ज्यादा समय लेते हैं। बातचीत करने, अपनी बात को समझाने में सक्षम नहीं होते हैं।
ऐसे करेें पहचान
मंदबुद्धि बच्चों में मानसिक विकास सामान्य की तुलना में धीरे होता है। हमउम्र बच्चों की तुलना में बच्चा बिस्तर पर ज्यादा बार करवट बदलते हैं, देर से पांव चलाता व चलना शुरू करता है। बोलना देर से शुरू करे, बोलने में समस्या, सीखने में देरी या कठिनाई जैसे कपड़े या जूते पहनने, खाना खाते समय चम्मच पकडऩे में दिक्कत। कोई गतिविधि व उसके नतीजे तक नहीं पहुंच पाते हैं। अत्यधिक गुस्सा, चिड़चिड़ाहट होती है। बड़े होने पर ऐसे बच्चे खेल के नियम नहीं समझ पाते हैं। गर्भावस्था में हाई ब्लड पे्रशर, तनाव, पोषण की कमी, समय से पहले प्रसव, सामान्य प्रसव के दौरान शिशु को ऑक्सीजन न मिलने से मानसिक समझ की दिक्कत हो सकती है।
धीरे-धीरे सुधार
सबसे पहले ऐसे बच्चे के माता-पिता से उनकी फैमिली हिस्ट्री के बारे में जानते हैं। बच्चे का आइक्यू टेस्ट करवाकर इसकी पहचान करते हैं। इसके बाद मनोचिकित्सक बीमारी की गंभीरता के आधार पर बच्चे की विशेष कमजोरी व ताकत की पहचानकर थैरेपी देते हैं जिससे धीरे-धीरे सुधार आता है। माता-पिता का भी सहयोग जरूरी होता है।
एक्सपर्ट : डॉ. सुनील शर्मा, मनोचिकित्सक, सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज, जयपुर