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Homeopathy: रोग को दबाती नहीं, करती है जड़ से खत्म

एलोपैथी रोगों को दबाकर तुरंत राहत देती है लेकिन होम्योपैथी मर्ज को समझ कर उसकी जड़ को खत्म करती है...

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Sangeeta Chaturvedi

Apr 09, 2016

Homeopathic Medicine

Homeopathic Medicine


एलोपैथी रोगों को दबाकर तुरंत राहत देती है लेकिन होम्योपैथी मर्ज को समझ कर उसकी जड़ को खत्म करती है...

Period Pain से हो सकता है Heart Attack!

होम्योपैथी में किसी भी रोग के उपचार के बाद भी यदि मरीज ठीक नहीं होता है तो इसकी वजह रोग का मुख्य कारण सामने न आना भी हो सकता है। इसके अलावा मरीज द्वारा रोग के बारे में सही जानकारी न देना उचित दवा के चयन में बाधा पैदा करती है जिससे समस्या का समाधान पूर्ण रूप से नहीं हो पाता। ऐसे में मरीज को उस दवा से कुछ समय तक के लिए तो राहत मिल जाती है लेकिन बाद में यह दवा शरीर पर दुष्प्रभाव छोडऩे लगती है। इस लापरवाही से आमतौर पर होने वाले रोगों का इलाज शुरुआती अवस्था में नहीं हो पाता और वे क्रॉनिक रूप ले लेते हैं व असाध्य रोग बन जाते हैं। मरीज को चाहिए कि वह डॉक्टर को रोग की हिस्ट्री, अपना स्वभाव और आदतों के बारे में पूर्ण रूप से बताए ताकि एक्यूट (अचानक होने वाले रोग जैसे खांसी, बुखार) रोग क्रॉनिक (लंबे समय तक चलने वाले रोग जैसे अस्थमा, टीबी) न बने। चिकित्सकों के अनुसार, अधिकतर मामलों में एलोपैथी रोगों को दबाकर तुरंत राहत देती है लेकिन होम्योपैथी मर्ज को समझ कर उसकी जड़ को खत्म करती है। आमतौर पर होने वाली परेशानियों को छोटी बीमारी समझकर नजरअंदाज न करें क्योंकि एक रोग दूसरी बीमारी का कारण बन सकता है। जानते हैं इनके बारे में।

बुखार
यह शरीर का नेचुरल प्यूरिफायर है जिससे शरीर में मौजूद विषैले तत्त्व बाहर निकलते हैं। 102 डिग्री तक के बुखार को ठंडी पट्टी रखकर, आराम करके या खाने में परहेज कर ठीक कर सकते हैं लेकिन उचित दवा न लेने से परेशानी बढ़कर असाध्य रोगों को जन्म देती हैं। जैसे बच्चों में इसके लिए सही दवा न दी जाए तो निमोनिया, सांस संबंधी परेशानियों हो सकती हैं। इसके अलावा कई बार दिमाग में बुखार के पहुंचने से बच्चे को दौरे भी आ सकते हैं।

इलाज
डॉक्टर को सभी लक्षण पूर्ण रूप से बताएं ताकि वे उसी आधार पर सही दवा का चयन कर रोग को शुरुआती स्टेज में ही दूर कर सके। आर्सेनिक (हल्के बुखार के साथ पानी की प्यास ज्यादा व पसीना आने पर), एकोनाइट (तेज बुखार के साथ पानी की प्यास, शरीर में सूखापन), बेलाडोना (तेज बुखार के कारण चेहरा लाल व सिरदर्द), चाइना (गैस बनने व पेट खराब होकर बुखार) आदि दवा से इलाज करते हैं।

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एसिडिटी
समस्या के लंबे समय तक बने रहने से शरीर में एसिड इकट्ठा होता जाता है जो पेट या किडनी में पथरी, हृदयाघात, हृदय की धमनियों में ब्लॉकेज, कोलेस्ट्रॉल, कमरदर्द, पाइल्स व फिशर जैसी परेशानियों को जन्म देता है। जोड़ों के गैप में एसिड के जाने से अर्थराइटिस भी हो सकता है। दिमाग में एसिड के जाने से बढऩे वाला बीपी पैरालिसिस की वजह बनता है।

इलाज : शुरुआती स्टेज में मरीज को कार्बोवेज (खट्टी डकारें आना), कालीकार्ब, फॉस्फोरस (कुछ भी खाते ही उल्टी), अर्सेनिक (पेट में जलन के बाद बार-बार पानी पीने की इच्छा) आदि दवाएं देते हैं।

सिरदर्द
यह आम रोग है जिसमें मरीज कई बार मनमर्जी से दवा ले लेता है। ऐसे में दवा लंबे समय तक राहत नहीं देती और पेट की परेशानी व माइग्रेन की आशंका को बढ़ाती है। यदि इसका इलाज उचित दवा से न हो तो दिमाग की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है जिससे हार्मोन्स के स्त्रावण में गड़बड़ी आती है जिससे थायरॉइड, महिला संबंधी समस्याएं जन्म लेती हैं।
इलाज : बेलाडोना, सेंग्युनेरिया (माइग्रेन), नेट्रम म्यूर (विशेषकर महिलाओं में सिरदर्द), ग्लोनाइन (धूप के कारण सिरदर्द) आदि इस बीमारी को ठीक करते हैं।

जुकाम
अस्थमा, एलर्जी राइनाइटिस, एलोपेसिया (बाल झडऩा), कम उम्र में बाल सफेद होना, आंखें कमजोर होना, मानसिक विकार जैसे तनाव, डिप्रेशन, स्वभाव में बदलाव, गुस्सा आना, क्रोनिक ब्रॉन्काइटिस के अलावा कार्डियक अस्थमा की मूल वजह जुकाम हो सकता है। सर्वाइकल स्पोंडिलाइसिस भी जुकाम से होता है क्योंकि इस दौरान बलगम दिमाग की नसों में जमता रहता है जिससे गर्दन व दिमाग के आसपास के भाग पर दबाव बढ़ता जाता है।

इलाज
जुकाम शरीर से गंदगी बाहर निकालता है और यह कुछ समय में खुद ही सही हो जाता है। लेकिन आराम न हो या समस्या कुछ समय के अंतराल में बार-बार प्रभावित करे तो आर्सेनिक (पानी की प्यास के साथ जुकाम), एकोनाइट, बेलाडोना, यूफे्रशिया (जुकाम के साथ आंखें लाल रहना), एलियम सेपा (जुकाम में जलन के साथ नाक बहना), ट्यूबरकुलिनम (जुकाम के साथ गर्मी लगना या भूख ज्यादा) दवाएं देते हैं।

कब्ज : आमतौर पर इस समस्या में हम घरेलू उपाय अपनाते हैं जो लिवर व पेन्क्रियाज की कार्यप्रणाली को प्रभावित करते हैं। यह डायबिटीज और आंतों, लिवर व पेट के कैंसर का कारण बनता है। लंबे समय तक कब्ज से पेन्क्रियाज व लिवर पर दबाव बढऩे से इंसुलिन बनने की क्षमता कमजोर हो जाती है।
इलाज : फॉस्फोरस (कुछ भी खाते ही उल्टी), चिलिडोनियम (लिवर के पीछे के भाग में दर्द) देते हैं।

महिला रोगोंं का इलाज
पुरुषों की तुलना में महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं ज्यादा होती हैं। जिसके चलते उन्हें कई परेशानियों का सामना बार-बार करना पड़ता है। इनमें होम्योपैथी इलाज मददगार है। जानते हैं ऐसी ही कुछ समस्याओं व इलाज के बारे में-

मेनोरेजिया : इम्युनिटी कमजोर होने से यदि किसी तरह का संक्रमण सेहत को प्रभावित करे तो माहवारी के दौरान अत्यधिक रक्तस्त्राव होना महिलाओं में आम है। इसकी वजह पेल्विक इंफ्लामेट्री डिसऑर्डर (पीआईडी) भी हो सकता है। फेरीनोसा, बोरैक्स, कॉलोफाइलम आदि दवा लेने की सलाह देते हैं।

स्केंटी मेन्स्ट्रूएशन : क्रॉनिक रोग जैसे टाइफॉयड, टीबी की वजह से खून की कमी से कुछ महिलाओं में माहवारी के दौरान सामान्य से कम व ज्यादा रक्तस्त्राव होता है जो आगे चलकर विभिन्न रोगों को जन्म देता है। यह स्केंटी मेन्स्ट्रूएशन स्थिति होती है। इसके लिए फैरममैट, सीपिया, नैट्रम म्यूर दवाओं से इलाज होता है।

डिसमेनोरिया : कुछेक महिलाओं को माहवारी के दौरान विशेषकर पेट के निचले हिस्से में ज्यादा दर्द रहता है। यह तनाव लेने, मानसिक व शारीरिक कमजोरी व खानपान में असंतुलित भोजन की वजह से भी हो सकता है। ऐसे में एकोनाइट, बेलाडोना, अब्रोमा, एपिस, पल्सेटिल दवा देते हैं।

अनियमितता : जिन्हें माहवारी के दौरान रक्तस्त्राव कम या ज्यादा और अनियमित हो तो कैल्केरिया फॉस, कैल्केरिया कार्ब, फैरम फॉस, एलुमिना दवाएं दी जाती हैं।

इन्फैन्टाइल ल्यूकेरिया : विशेषकर 6 से 12 वर्ष की लड़कियों में पेट में कीड़ों की वजह से वाइट डिस्चार्ज की समस्या होती है जो शरीर में कमजोरी का भी कारण बनती है। ऐसे में कैल्केरिया कार्ब, आयोडम, सिपिया दवा से इलाज होता है।

ल्यूकेरिया : शरीर में पोषक तत्त्वों की कमी, पीआईडी आदि से वाइट डिस्चार्ज की समस्या में आर्सेनिक, कैल्केरिया कार्ब, एलेट्रिस जैसी दवाएं कारगर हैं।

मेनोपॉज : 40-45 वर्ष की उम्र के बाद महिलाओं में माहवारी बंद होने की अवस्था मेनोपॉज होती है। इस दौरान महिलाओं में मानसिक व शारीरिक बदलाव होने पर ग्लोनाइल, कैक्टस, सल्फर, नैट्रम म्यूर आदि दी जाती हैं।

- डॉ. राजीव नागर डायरेक्टर ऑफ होम्योपैथी रिसर्च एसोसिएशन, जयपुर
- डॉ. मुकेश गुप्ता अध्यक्ष, होम्योपैथिक प्रैक्टिशनर्स सोसायटी, जयपुर