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उम्र के हिसाब से हार्ट को ऐसे रखें हैल्दी

भागदौड़ भरी जिंदगी में हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, गड़बड़ लिपिड प्रोफाइल, बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल, अधिक वजन की समस्या से जूझ रहे हैं, तो अभी से अलर्ट होने की जरूरत है। ये सभी परेशानियां हार्ट की बीमारियों के खतरे को बढ़ाती हैं। आज के समय में 30-40 साल की उम्र में हार्ट अटैक के मामले देखने को मिल रहे हैं, इनका मुख्य कारण हमारी खराब लाइफस्टाइल है। अगर समय रहते स्थिति को नहीं संभालते हैं तो कम उम्र में हार्ट से जुड़ी बीमारियों की आशंका बढ़ जाती हैं। जानते है कि किस उम्र में किन बातों पर ध्यान देने की जरूरत है।

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जयपुर

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Jaya Sharma

Jan 07, 2024

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भागदौड़ भरी जिंदगी में हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, गड़बड़ लिपिड प्रोफाइल, बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल, अधिक वजन की समस्या से जूझ रहे हैं, तो अभी से अलर्ट होने की जरूरत है। ये सभी परेशानियां हार्ट की बीमारियों के खतरे को बढ़ाती हैं। आज के समय में 30-40 साल की उम्र में हार्ट अटैक के मामले देखने को मिल रहे हैं, इनका मुख्य कारण हमारी खराब लाइफस्टाइल है। अगर समय रहते स्थिति को नहीं संभालते हैं तो कम उम्र में हार्ट से जुड़ी बीमारियों की आशंका बढ़ जाती हैं। जानते है कि किस उम्र में किन बातों पर ध्यान देने की जरूरत है।

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लक्षणों का विशेष ध्यान रखें चक्कर आना, सीने में दर्द होना, सांस फूलना, बेहोशी छाना, अचानक तेज पसीने आना आदि गंभीर बीमारी के संकेत हो सकते हैं, इन्हें नजरअंदाज न करें। अक्सर देखा जाता है कि बुजुर्ग, महिलाओं या डायबिटिक मरीजों को चलते समय सांस फूलने की समस्या होती है, वो जल्दी थक जाते हैं। इन स्थितियों में भी डॉक्टरी सलाह लें। उनकी राय पर ध्यान दें। ये हार्ट से जुड़ी समस्याओं के संकेत भी हो सकते हैं।

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हर बार सीने में दर्द हमेशा गैस की वजह से नहीं होता अक्सर लोगों को जब सीने में दर्द होता है, तो वो मान लेते हैं कि ये गैस की वजह से है। लेकिन ये अनुमान कई बार खतरनाक हो जाता है। अगर बार-बार सीने में दर्द होता है तो गैस मानकर खुद इलाज न करें। पहले अपने डॉक्टर को दिखाएं क्योंकि जितने भी कम उम्र में हार्ट अटैक के मामले आते हैं उसमें पहले से कुछ न कुछ लक्षण जरूर दिखते हैं जिनकी अनदेखी मरीज करता रहता था।

30 की उम्र में ध्यान रखेंयही उम्र है जबसे आपको हैल्थ को लेकर ध्यान देना शुरू करना चाहिए। ऐसा कोई भी काम न करें जो लाइफ स्टाइल से जुड़ी बीमारियों को बढ़ाए। साथ ही अपनी फैमिली हिस्ट्री की जानकारी भी होनी चाहिए। अगर हार्ट से जुड़ी बीमरियों की हिस्ट्री है तो आपको इसी उम्र से स्क्रीनिंग भी शुरू करवानी चाहिए।