
उपवास से आपका स्वास्थ्य बेहतर से और बेहतर होता चला जायेगा। आइये समझें उपवास से होने वाले कुछ फायदों के बारे में...
उपवास यानि व्रत ये भारतीय संस्कृति में श्रद्धा, आस्था और धर्म पर आधारित एक अनूठी प्रक्रिया है। हिंदू धर्म के अनुसार साल में दो पर मां दुर्गा की उपासना का पर्व नवरात्रि आता है। हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले आस्था श्रद्धा के हिसाब से नवरात्रि को दिनों में उपवास करते हैं। धार्मिक दृष्टि के साथ-साथ स्वस्थ्य दृष्टि से भी उपवास का बड़ा महत्व है। लोग उपवास को अपने जीवन का हिस्सा बना कर अपने शरीर का कायाकल्प कर सकते हैं और कई तरह के स्वास्थ्य लाभ ले सकते हैं। उपवास से आपका स्वास्थ्य बेहतर से और बेहतर होता चला जायेगा। आइये समझें उपवास से होने वाले कुछ फायदों के बारे में...
आयुर्वेद के प्रसिद्ध ग्रंथ 'चरक संहिता से लेकर आज के विभिन्न चिकित्सीय शोधों ने भी उपवास के अनेक लाभ बताए गए हैं। उपवास से पाचनतंत्र दुरूस्त रहता है जिससे शरीर में उपस्थित विषाक्त पदार्थों का निष्कासन आसानी से हो जाता है। हर सप्ताह उपवास रखने से कोलेस्ट्राल की मात्रा घटने लगती है जो धमनियों के लिए लाभदायक है। नियमित रूप से उपवास करने से शारीर का वजन कम होता है। जब हम उपवास करते हैं तो हम कई घंटों तक कुछ नहीं खाते, इससे हमारे शरीर में वसायुक्त कोशिकाएं पिघलने लगती हैं और हमारा वजन नियंत्रण में रहता है।
उपवास रखने के दौरान हम काफी समय तक कुछ भी नहीं खाते तो हमारी पाचनक्रिया को विश्राम मिलता है। इसकी वजह से आपकी चयपचय की क्रिया अधिक कुशलता से काम करती है।यदि पाचनशक्ति कमजोर है तो शरीर में वसायुक्त पदार्थों को नष्ट करने की क्षमता कम हो जाती है। व्रत रखने से पाचनशक्ति की क्रिया का सही रूप से संचालन होता है और शारीरिक चयपचय क्रिया का विकास होता है।
उपवास करने से हमारे शरीर की रोगप्रतिरोध? शक्ति ?? का विकास होता है।शरीर के सभी अवयवों में ऊर्जा का संचार होने लगता है।मन की शांती तथा तेज दिमाग के लिए उपवास करना लाभदायक होता है। उपवास करने से शरीर हल्का महसूस होने लगता है। शरीर से टॉक्सिक केमिकल्स बाहर निकलने लगते हैं।
शारीरिक रूप कमजोर है और अपको कोई गंभीर बीमारी है तो आपको उपवास नहीं रखना चाहिए।गर्भवती महिलाओं को भी उपवास नहीं रखना चाहिए। क्योंकि गर्भवस्था के दौरान यदि उपवास रखा गया तो इसका असर होने वाले नवजात शिशु के स्वास्थ्य पर पड़ता है।स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भी उपवास नहीं रखना चाहिए। शारीरिक क्षमता से अधिक अवधि तक उपवास नहीं करना चाहिए। उपवास के दिन अधिक परिश्रम का कार्य नहीं करना चाहिए। यदि ग्लूकोज का लेवल नीचे जाने की वजह से चक्कर आएं तो एक गिलास तुरंत ग्लूकोज या फिर चीनी का पानी जरूर पीना चाहिए। उपवास खत्म होने के बाद अचानक से भारी आहार का सेवन न करें। कुछ भी हल्का खाना खाकर ही अपना उपवास खत्म करें।
पूर्ण उपवास में हर डेढ़ घंटे से सिर्फ एक गिलास पानी लें । उपवास में पानी खूब पीना चाहिए। क्योंकि शरीर पानी की मदद से ही हर प्रकार के विकारों को दूर करता है। व्रत उपवास में शरीर शुद्ध होने की प्रक्रिया में कुछ अस्वाभाविक अनुभव हो सकते है जैसे सिर दर्द , पेट दर्द , उल्टी , मितली , चक्कर आना आदि लेकिन इनसे घबराना नही चाहिए। व्रत उपवास तोड़ने का भी एक तरीका होता है। उपवास ठोस आहार से समाप्त नहीं करना चाहिए। पहले फ्रूट जूस लें। फिर उबली सब्जी और अंत में रोटी या दलिया लेना चाहिये। स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए सप्ताह में एक बार व्रत या उपवास जरुर करना चाहिए। ये बात अभी में शोध की जा चुकी है के जो लोग सप्ताह या पंद्रह दिन में एक बार उपवास करते हैं, उनकी रोग प्रतिरोधक शक्ति कहीं अधिक होती है।
Published on:
21 Sept 2017 02:54 pm
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