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Goosebumps Reason: शरीर का नेचुरल हीटर है रोंगटे खड़े होना! जानिए कैसे ये आपको बचाता है बीमार होने से

Goosebumps Reason: ठंड, डर या भावनाओं में रोंगटे क्यों खड़े होते हैं? जानिए goosebumps का वैज्ञानिक कारण और इसका त्वचा व सेहत से संबंध।

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भारत

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Dimple Yadav

Jan 12, 2026

Goosebumps Reason

Goosebumps Reason (photo- patrika)

Goosebumps Reason: रोंगटे खड़े होना यानी goosebumps हम सभी ने महसूस किए हैं। ठंडी हवा लगते ही, कोई भावुक गाना सुनते वक्त या फिर अचानक किसी चीज को देखकर हैरान हो जाने पर ये अपने-आप आ जाते हैं। आमतौर पर लोग इसे शरीर की एक बेकार सी प्रतिक्रिया मान लेते हैं, लेकिन असल में इसके पीछे सेहत और शरीर की सुरक्षा से जुड़ी दिलचस्प वजहें छुपी हैं।

हमारी त्वचा शरीर का सबसे बड़ा अंग है। इसका काम सिर्फ शरीर को ढकना नहीं, बल्कि तापमान कंट्रोल करना और हमें बाहरी खतरे से बचाना भी है। रोंगटे खड़े होना इसी सिस्टम का हिस्सा है, जो हमारे पूर्वजों के समय में बहुत जरूरी था।

रोंगटे खड़े क्यों होते हैं

वैज्ञानिक भाषा में इसे Cutis Anserina कहा जाता है। हमारी त्वचा में हर बाल की जड़ के पास बहुत छोटे-छोटे मसल्स होते हैं, जिन्हें Arrector Pili muscles कहा जाता है। जब ये मसल्स सिकुड़ते हैं, तो बाल सीधे खड़े हो जाते हैं और त्वचा पर छोटे-छोटे दाने जैसे दिखने लगते हैं। यह प्रक्रिया पूरी तरह अनकंट्रोल्ड होती है, यानी हम चाहें या न चाहें, ये अपने-आप होती है। ठंड लगने पर, डर लगने पर या तेज़ भावनाओं के समय यही मसल्स एक्टिव हो जाते हैं। इसका सीधा संबंध हमारे fight-or-flight सिस्टम से है।

पुराने जमाने में कैसे काम आते थे

आज इंसानों के शरीर पर कम बाल हैं, लेकिन पहले हमारे पूर्वज ज्यादा बालों वाले थे। जब ठंड लगती थी और बाल खड़े होते थे, तो उनके बीच हवा फंस जाती थी, जिससे शरीर गर्म रहता था। इसके अलावा, बाल खड़े होने से इंसान थोड़ा बड़ा और डरावना दिखता था, ठीक वैसे ही जैसे जानवर खतरे के समय अपने बाल फुला लेते हैं। इससे दुश्मन या शिकारी डर सकता था।

भावनाओं से रोंगटे क्यों आते हैं

कई बार कोई गाना, भाषण या भावुक पल हमें रुला देता है और रोंगटे खड़े हो जाते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जो नर्वस सिस्टम ठंड और डर पर रिएक्ट करता है, वही भावनाओं पर भी प्रतिक्रिया देता है। जब दिमाग बहुत ज्यादा एक्साइटमेंट, डर या खुशी महसूस करता है, तो वही सिस्टम एक्टिव हो जाता है और रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

त्वचा और बालों की सेहत से भी जुड़ा है

रोंगटे खड़े होने से सिर्फ एहसास नहीं बदलता, बल्कि इसका असर त्वचा की सेहत पर भी पड़ता है। ये मसल्स स्किन की ऑयल ग्रंथियों के पास होते हैं। इनके सिकुड़ने से हल्का सा ऑयल निकलता है, जो त्वचा को सूखने से बचाता है। इतना ही नहीं, रिसर्च बताती है कि यही सिस्टम बालों की ग्रोथ में भी मदद कर सकता है। यानी रोंगटे सिर्फ बेकार की चीज़ नहीं, बल्कि शरीर की एक स्मार्ट और काम की प्रतिक्रिया हैं। इसलिए अगली बार जब रोंगटे खड़े हों, तो समझ लीजिए कि आपका शरीर अब भी अपने पुराने, समझदार तरीकों से आपकी देखभाल कर रहा है।