
Leech Therapy in Bihar (photo- patrika)
Leech Therapy in Bihar: कभी पुराने जमाने की इलाज पद्धति मानी जाने वाली जोंक थेरेपी एक बार फिर बिहार में लोगों के बीच लोकप्रिय हो रही है। आयुर्वेद के 3000 साल पुराने ग्रंथ सुश्रुत संहिता में जिस इलाज का जिक्र मिलता है, वही आज फिर से लोगों को राहत दे रहा है। खास बात यह है कि अब सिर्फ गंभीर बीमारियों से परेशान लोग ही नहीं, बल्कि खूबसूरती को लेकर सजग महिलाएं भी इस थेरेपी को अपनाने लगी हैं।
आयुर्वेद में इसे जलौकावचरण कहा जाता है। इस पद्धति में औषधीय जोंक का इस्तेमाल करके शरीर के खास हिस्से से खराब या दूषित खून निकाला जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक प्राकृतिक, सुरक्षित और असरदार इलाज है। भारत ही नहीं, बल्कि मिस्र, ग्रीस, यूनानी चिकित्सा और अब पश्चिमी देशों में भी इसका उपयोग प्लास्टिक सर्जरी, नसों की बीमारी और घाव भरने में किया जा रहा है।
पटना और दरभंगा के सरकारी आयुर्वेदिक कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. दिनेश्वर प्रसाद बताते हैं कि यह थेरेपी बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों जैसे नाजुक मरीजों के लिए खास तौर पर फायदेमंद है। उनके अनुसार जोंक अपने लार के जरिये शरीर में ऐसे एंजाइम छोड़ती है जो खून को पतला करते हैं, सूजन कम करते हैं और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर बनाते हैं। यही वजह है कि वैरिकोज वेन्स, जोड़ों के दर्द और सूजन में इससे राहत मिलती है।
डॉ. दिनेश्वर प्रसाद का कहना है कि उन्होंने अपने 50 साल के अनुभव में देखा है कि जोंक थेरेपी पुराने दर्द, त्वचा रोग और नसों से जुड़ी समस्याओं में बहुत असरदार साबित होती है। जोंक की लार में मौजूद हिरुडिन, सूजन कम करने वाले तत्व और हल्का सुन्न करने वाले गुण दर्द घटाने और घाव जल्दी भरने में मदद करते हैं।
यूनानी चिकित्सा के डॉक्टर भी इसके अच्छे नतीजे बता रहे हैं। पटना के जाने-माने हकीम डॉ. शफात करीम के अनुसार एक या दो सत्र में ही एक्जिमा, सोरायसिस, गाउट, जोड़ों की सूजन और मांसपेशियों के दर्द में काफी राहत मिल जाती है। कई युवतियों के चेहरे के पिंपल्स तो एक ही सिटिंग में ठीक हो जाते हैं।
मरीजों के अनुभव भी इस थेरेपी की लोकप्रियता बढ़ा रहे हैं। दानापुर के 30 वर्षीय बाब्लू गुप्ता हाई यूरिक एसिड की वजह से टखने के तेज दर्द से परेशान थे, लेकिन दो सत्र के बाद उन्हें राहत मिली। वहीं 24 साल की हसीना खातून चार साल से मुंहासों से जूझ रही थीं, जो तीन सिटिंग में ठीक हो गए। 60 वर्षीय बैद्यनाथ यादव को सालों से गाउट था, लेकिन जोंक थेरेपी से उन्हें भी आराम मिला।
Updated on:
10 Jan 2026 01:45 pm
Published on:
10 Jan 2026 01:45 pm
