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700,000 से ज्यादा भारतीय महिलाओं को हुआ ये Cancer, WHO का खुलासा! जानिए क्यों बढ़ रहा है यह खतरा

Lung Cancer in Women: भारत में महिलाओं में नॉन-स्मोकिंग लंग कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। हवा में प्रदूषण और जेनेटिक कारण बन रहे हैं इस बढ़ते खतरे की बड़ी वजह।

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भारत

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Dimple Yadav

Nov 07, 2025

Lung Cancer in Women

Lung Cancer in Women (Photo- gemini ai)

Lung Cancer in Women: भारत में कैंसर के मामलों को लेकर हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट ने चौंकाने वाला सच उजागर किया है। वैज्ञानिक विश्लेषणों के अनुसार, भारतीय महिलाओं में कैंसर होने का आजीवन जोखिम पुरुषों से ज्यादा है, और महिलाएं कैंसर से कम उम्र में ही जान गंवा रही हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि अब लंग कैंसर (फेफड़ों का कैंसर) महिलाओं में तेज़ी से बढ़ रहा है। वो भी ऐसी महिलाओं में जो कभी स्मोकिंग नहीं करतीं।

प्रदूषण बन रहा है मुख्य कारण

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) की रिपोर्ट GLOBOCAN 2022 के अनुसार, भारत में महिलाओं में कैंसर की क्रूड इंसीडेंस दर 104.5 प्रति लाख है, जबकि पुरुषों में यह 91.5 प्रति लाख है। मौतों के मामले में भी महिलाएं आगे हैं। 64.2 प्रति लाख, जबकि पुरुषों में यह 62.2 प्रति लाख है। उस वर्ष भारत में दर्ज किए गए कुल 14,13,316 कैंसर के मामलों में से 7,12,138 महिलाएं और 6,91,178 पुरुष थे। अकेले फेफड़ों के कैंसर के 81,748 मामले सामने आए और 2022 में 75,031 मौतें हुईं।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस बढ़ते खतरे के पीछे सबसे बड़ा कारण है इनडोर और आउटडोर एयर पॉल्यूशन। महिलाएं खाना बनाते समय बायोफ्यूल के धुएं के संपर्क में आती हैं, और शहरों में लगातार खराब होती एयर क्वालिटी (AQI) से फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है।

स्मोकिंग नहीं, फिर भी बढ़ रहा है लंग कैंसर

लंबे समय तक माना गया कि लंग कैंसर सिर्फ स्मोकर्स की बीमारी है, लेकिन नई स्टडीज ने इसे गलत साबित कर दिया है। भारतीय मेडिकल रिसर्च काउंसिल (ICMR-NCDIR) के एक अध्ययन के अनुसार, महिलाओं में लंग कैंसर की दर अब पुरुषों के बराबर या उससे भी अधिक होती जा रही है। डॉ. रवि मेहरोत्रा, पूर्व निदेशक नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ कैंसर प्रिवेंशन एंड रिसर्च, के अनुसार, भारतीय महिलाओं में EGFR, ALK, और ROS1 जैसे जेनेटिक म्यूटेशन अधिक पाए जाते हैं, जो बिना स्मोकिंग के भी लंग कैंसर का कारण बन सकते हैं। इसके अलावा, एस्ट्रोजन हार्मोन भी महिलाओं में इन जेनेटिक बदलावों को प्रभावित कर सकता है, जिससे कैंसर का खतरा और बढ़ जाता है।

किस तरह का लंग कैंसर महिलाओं में आम है

महिलाओं में ज्यादातर मामलों में एडेनोकार्सिनोमा पाया जाता है। यह एक प्रकार का नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर (NSCLC) है जो फेफड़ों की अंदरूनी परत की कोशिकाओं में बनता है। यह कैंसर तेजी से बढ़ता है और इसके उपचार के परिणाम सीमित होते हैं।

बढ़ता खतरा, घटती उम्र

AIIMS के कैंसर विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत में आने वाले 10 सालों में नॉन-स्मोकिंग लंग कैंसर के मामलों में भारी बढ़ोतरी होगी, खासकर युवा महिलाओं में। प्रदूषण, जेनेटिक प्रवृत्ति और लाइफस्टाइल फैक्टर्स मिलकर एक साइलेंट एपिडेमिक का रूप ले रहे हैं।