
Breech Baby यानी गर्भ में बच्चे की पोजिशन बदलना
20 प्रतिशत बच्चे समयपूर्व प्रसव में उल्टा पैदा होते हैं। म्यूजिक मेडिटेशन की मदद से शिशु की हरकत बढ़ाते हैं।
4-5 प्रतिशत बच्चे सामान्यत: उल्टी पोजिशन में पैदा होते हैं।
06 हफ्ते आखिर के होते हैं प्रेग्नेंसी में जब शिशु अपनी पोजिशन तय कर लेता है।
समयपूर्व प्रसव के अलावा कई वजहों से बच्चे के उल्टी पॉजिशन में जन्म की आशंका बढ़ती है। ब्रीच बेबी के तीन प्रकार मानते हैं। प्रसव के दौरान नीचे की तरफ शिशु के हाथ पैर मुड़े हों (फ्लेक्स्ड ब्रीच), पैर एकदम सीधे हों (फ्रैंक ब्रीच) और पंजे बाहर निकल रहे हों (फुटलिंग ब्रीच)। इन स्थितियों में प्रसव के दौरान हड़बड़ी में शिशु को खींचने की बजाय पेट के ऊपर से हल्का प्रेशर देने के लिए कहते हैं। ब्रीच बेबी के ज्यादातर मामलों में शिशु के पैर और कूल्हे प्रसव के दौरान पहले बाहर आते हैं।
ये प्रमुख कारण हैं
* गर्भ में जुड़वां या तीन शिशु होना।
* आंवल नाल की छोटी लंबाई।
* सिर का आकार बड़ा होना।
* तीसरे या चौथे प्रसव के समय।
* यूट्रस में जन्मजात कोई विकृति।
संभलकर हो प्रसव
विशेषज्ञों का मानना है कि उल्टे बच्चे की डिलीवरी में जटिलताएं होती हैं। इसलिए प्रसव में ज्यादा एहतियात बरतनी होती है। वर्ना सिर फंस या हेमरेज, कॉलर बोन फ्रैक्चर हो सकते हैं। प्रसव में देरी होने पर शिशु का दम घुटने का खतरा भी रहता है।
बचाव के तरीके
* प्रेग्नेंसी के 37 हफ्ते बाद दवा से गर्भाशय को रिलेक्स कर शिशु की धड़कनों को ध्यान में रख हाथों से पेट पर धीरे-धीरे शिशु को घुमाते हैं।
* दूसरी तिमाही बाद पेट की पेल्विक रॉकिंग वर्कआउट में हाथ-पैरों को जमीन पर रख बाकी शरीर ऊपर उठाते हैं।
* मॉक्सिबशन तकनीक में चाइनीज हर्ब मॉक्सा की पत्तियों को जलाने से निकलने वाले कैमिकल की गंध गर्भस्थ शिशु तक पहुंचकर मूवमेंट में मददगार होती है। ये सब किसी स्त्री रोग विशेषज्ञ की देखरेख में ही किया जाना चाहिए।
एक्सपर्ट : डॉ. शिराली रुनवाल, गाइनेकोलॉजिस्ट, ग्वालियर
Published on:
04 Oct 2019 03:45 pm

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