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खर्राटे या स्लीप एपनिया? जानिए कब लेनी चाहिए डॉक्टर की सलाह

विशेषज्ञों ने सोमवार को कहा, खर्राटे एक नींद विकार है जो उच्च रक्तचाप, रक्त शर्करा, और यहां तक कि जानलेवा दिल का दौरा और स्ट्रोक जैसे कई गैर-संक्रामक रोगों के खतरे को बढ़ा सकता है ।
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नई दिल्ली

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Manoj Vashisth

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Updated: 10 Jun 2024, 2:46 PM IST

snoring dangers

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विशेषज्ञों ने कहा, खर्राटे एक नींद विकार है जो उच्च रक्तचाप, रक्त शर्करा, और यहां तक कि जानलेवा दिल का दौरा और स्ट्रोक जैसे कई गैर-संक्रामक रोगों के खतरे को बढ़ा सकता है ।

खर्राटे अक्सर ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA) के साथ जुड़े होते हैं। भारत में 12 करोड़ से अधिक लोग OSA से पीड़ित हैं।

डॉ. मनोज पवार, एसोसिएट कंसल्टेंट - पल्मोनोलॉजी, मणिपाल अस्पताल, खराड़ी, पुणे ने IANS को बताया, “खर्राटे को ऊपरी वायुमार्ग के बार-बार अवरोध के कारण होने वाले पूर्ण या आंशिक अवरोध से पहचानते हैं, जिससे नींद के दौरान सांस लेने में कमी या रुकावट होती है, और इन घटनाओं को एपनिया और हाइपोप्निया कहा जाता है।

दिन में अत्यधिक नींद आना चिंता का विषय

हालांकि सभी खर्राटे खतरनाक नहीं होते, लेकिन डॉ. मनोज ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को दिन में अत्यधिक नींद आती है, या नींद में बेचैनी होती है, तो यह चिंता का विषय हो सकता है।

डॉक्टर ने कहा, “प्रमुख लक्षण अत्यधिक दिन की नींद है, जिसमें रोगी बहुत आसानी से दिन के समय में सो जाते हैं, ज्यादातर टीवी देखते समय, परिवार के अन्य सदस्यों के साथ बैठते समय, समाचार पत्र पढ़ते समय, और यहां तक कि कार चलाते समय भी। यह बहुत खतरनाक हो सकता है।

इससे सुबह के समय सिरदर्द, अनिद्रा, चीजों पर ध्यान केंद्रित करने में परेशानी, मूड में बदलाव, सेक्स ड्राइव में कमी, और मूत्रत्याग की आवृत्ति में वृद्धि हो सकती है।

डॉ. संतोष बांगड़, सीनियर कंसल्टेंट साइकियाट्रिस्ट, ग्लोबल हॉस्पिटल, परेल, मुंबई ने बताया, जब अवरोध गंभीर होता है, तो विभिन्न शारीरिक अंगों को ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रभावित होती है, जिससे एपनिया (सांस लेने की रुकावट) होती है। ऑक्सीजन की कमी के कारण, वे विभिन्न न्यूरोसाइक्रेटिक लक्षणों से पीड़ित होते हैं जैसे थकान, दिन की नींद, चिड़चिड़ापन, और ध्यान की कमी।

उन्होंने कहा, यह तलाक और सड़क दुर्घटनाओं का एक प्रमुख कारण है, और इससे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं जैसे उच्च रक्तचाप, मधुमेह, अनियमित हृदय गति, दिल का दौरा, अचानक हृदय मृत्यु, स्ट्रोक (पक्षाघात), डिमेंशिया और अवसाद।

डॉ. संतोष ने कहा कि यह छोटे गर्दन वाले, बड़े जीभ और जबड़े की असामान्यता वाले पुरुषों में अधिक आम है। मोटे व्यक्तियों के अलावा, यह पतले लोगों में भी देखा जा सकता है और यह आनुवंशिक हो सकता है।

विशेषज्ञों ने स्वस्थ जीवनशैली, वजन घटाने, नियमित व्यायाम, हल्का रात का भोजन, नींद की गोलियों, धूम्रपान, और शराब से बचने की सलाह दी। मास्क (CPAP, लगातार सकारात्मक वायुमार्ग दबाव) या जबड़े के ब्रेसेस पहनने से भी मदद मिल सकती है।

(IANS)

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

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