
द फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने घोषणा की है कि वह एंटी बैक्टीरियल सोप और बॉडी वॉश में मौजूद कई आम सामग्रियों का उपयोग प्रतिबंधित कर रही है। यह भी कहा गया है कि ऐसे उत्पाद पारंपरिक साबुनों की तुलना में प्रभावी नहीं थे और स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकते थे।
साबुन और शैंपू के ज्यादा प्रयोग से कैंसर का खतरा एंटी बैक्टीरियल साबुनों में बैन इन आम रसायनों का प्रयोग वाशिंगटन 17 सितंबर द फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने घोषणा की है कि वह एंटी बैक्टीरियल सोप और बॉडी वॉश में मौजूद कई आम सामग्रियों का उपयोग प्रतिबंधित कर रही है।
यह भी कहा गया है कि ऐसे उत्पाद पारंपरिक साबुनों की तुलना में प्रभावी नहीं थे और स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकते थे। यह नियम 19 सक्रिय सामग्रियों पर लागू होता है। लिक्िवड सोप, बार सोप और अन्य आइटम्स में ट्राइक्लोसन और ट्राइक्लोकार्बन जैसे आम एंटी बैक्टीरियल एजेंट भी शामिल है।
निर्माताओं के पास उनके उत्पादों में से इन सामग्रियों को हटाने या इसे बाजार से हटाने के लिए एक साल दिया गया है। ट्राइक्लोसन आमतौर पर लिक्िवड एंटी बैक्टीरियल सोप्स में यूज होता है, वहीं ट्राइक्लोकार्बन बार सोप्स में।
एफडीए के सेंटर फॉर ड्रग्स इवेल्यूशन एंड रिसर्च के डायरेक्टर जेनट वुडकॉक ने कहा ग्राहक सोचते हैं कि एंटी बैक्टीरियल वॉशेज रोगाणु के प्रसार को रोकने में ज्यादा प्रभावी होती है, लेकिन हमारे पास कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि वे एक सादे साबुन या पानी की तुलना में बेहतर हैं।
उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा श्वास्तव में कुछ आंकड़ों से पता चलता है कि एंटी बैक्टीरियल इंग्रडियेंट्स लंबे समय तक उपयोग करने पर ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती है।
Published on:
17 Sept 2016 08:48 pm

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