
विशेषज्ञ क्रॉनिक पेन का इलाज पेन मैनेजमेंट थैरेपी से करते हैं। इसमें कई थैरेपी के अलावा दवाओं, इंजेक्शन, फिजिकल एक्सरसाइज आदि की मदद लेते हैं।
शरीर के कई हिस्सों में होने वाले दर्द का कई बार कारण पता नहीं चलता और समस्या बनी रहती है। बैठने-उठने या लेटने के दौरान बने शरीर के गलत पॉश्चर से भी दर्द की स्थिति बनती है। ऐसे में यह पॉश्चर लंबे समय तक बने रहने से दर्द कम नहीं हो पाता। विशेषज्ञ क्रॉनिक पेन का इलाज पेन मैनेजमेंट थैरेपी से करते हैं। इसमें कई थैरेपी के अलावा दवाओं, इंजेक्शन, फिजिकल एक्सरसाइज आदि की मदद लेते हैं।
दो तरह का होता दर्द
इन दिनों दर्द गंभीर रोगों की श्रेणी में गिना जाने लगा है। ज्यादातर लोगों को किसी न किसी तरह के दर्द की शिकायत रहती है। लंबे समय तक इस दर्द को नजरअंदाज करना दिक्कत पैदा करता है। परेशानी तब ज्यादा गंभीर हो जाती है जब व्यक्ति बिना डॉक्टरी सलाह के अपनी मर्जी से दर्दनिवारक दवाएं लेने लगता है।इससे कोशिकाओं को आराम मिलने से उसे कुछ समय के लिए तो राहत मिलती है लेकिन असर खत्म होने पर दर्द दोगुनी तीव्रता से असर दिखाता है। इसलिए विशेषज्ञ डॉक्टरी सलाह से दवा लेने के लिए कहते हैं।
दर्द दो तरह का होता है। पहला ताजा या एक्यूट जो किसी वजह से होकर २-४ दिन में स्वत: ठीक भी हो जाता है। दूसरा लंबे समय से चल रहा असाध्य या क्रॉनिक जो महीनों तक रहकर दिनचर्या गड़बड़ा देता है। मरीजों को इससे निजात दिलाने के लिए चिकित्सा जगत में पेन मैनेजमेंट तकनीक भी आजमाई जा रही है। इसमें दर्द को पूरी तरह खत्म करते हैं ताकि रोगी सामान्य जीवन जी सके। कैंसर जैसी पीड़ादायक बीमारियों में असहनीय दर्द होना आम है। करीब 80 फीसदी मरीजों का काम दर्द से प्रभावित होता है। शरीर के किसी हिस्से में दर्द है और बार-बार होता है या महीनों से है तो एक बार पेन मैनेजमेंट एक्सपर्ट से सलाह लेनी चाहिए।
लक्षण
उठने बैठने में तकलीफ, अधिक भारी चीज न उठा पाना, लंबे समय से नींद न आना, थकावट रहना, इम्युनिटी कमजोर होना, तनाव या अवसाद, घबराहट, जहां दर्द है वहां सूजन के साथ त्वचा लाल होना।
शरीर के सर्किट में गड़बड़ी से दर्द
शरीर का हर अंग सर्किट की तरह आपस में जुड़ा है। इसमें गड़बड़ी से ब्रेन दर्द का सिग्नल भेजता है। पेन मैनेजमेंट में इलाज दो तरह से होता है। डायग्नोस्टिक इंटरवेंशन में दर्द का कारण पता लगा दवा देते हैं। वहीं थैरेप्यूटिक इंटरवेंशन में दर्द कहां, कब से व क्यों हो रहा है, इसकी जांच कर उस भाग में सीटी व अल्ट्रासाउंड प्रक्रिया से विशेष दवा डालते हंै। इनका फायदा गर्दन, पैर, चेहरे या कमरदर्द में होता है। दर्द लगातार हो तो ३-५ बार इलाज लेना होता है।
एक्स-रे, सीटी स्कैन प्रमुख जांचें
एक्स-रे, सीटी स्कैन, एमआरआई, अल्ट्रासाउंड, ब्लड की बायोकैमेस्ट्री जांच प्रमुख रूप से कराते हैं। इनकी रिपोर्ट में कुछ न निकलने व दर्द रहने पर मिनिमल इनवेसिव प्रक्रिया से दर्द की वजह जानते है।
आयुर्वेद
दर्द किसी बीमारी का संकेत होता है जिसे कभी हल्के में न लें। इससे बचने के लिए संतुलित व साफ खानपान हो। शरीर में विषैले तत्त्व बढऩे से दर्द होता है। पंचकर्म, पोटली मसाज और शिरोधारा का प्रयोग करते हैं। काढ़े का भाप लेने से भी आराम मिलता है। नियमित व्यायाम के साथ योग ? व प्राणायाम करें। सौंठ, अदरक, लहसुन, अजवाइन,व हल्दी प्रयोग में लें।
Published on:
29 Sept 2017 11:54 pm
बड़ी खबरें
View Allस्वास्थ्य
ट्रेंडिंग
लाइफस्टाइल
