
इनका दुष्प्रभाव यह हुआ है कि हमारे स्वास्थ्य की कीमत पर प्रौद्योगिकी ने यह सब क्या किया है। हम अब शारीरिक रूप से कम सक्रिय हैं।
आंकड़ों के अनुसार, भारत में लगभग 61 प्रतिशत मौतें गैर-संचारी रोगों यानी एनसीडी के कारण हो रही हैं। इनमें हृदय रोग, कैंसर और मधुमेह शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, इनमें से लगभग 23 प्रतिशत लोग इन रोगों के साथ-साथ समय से पहले मृत्यु के खतरे में भी जी रहे हैं।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के अनुसार, देश में इन गंभीर परिस्थितियों के खिलाफ काम में खास प्रगति नहीं हुई है। तेजी से शहरीकरण के कारण, भारत में गैर-संचारी रोग पैटर्न बढ़ रहा है। एनसीडी के बोझ के लिए जिम्मेदार चार जोखिम वाले कारक तंबाकू, दूषित आहार, शारीरिक निष्क्रियता और शराब की अत्यधिक खपत है। कुछ अन्य प्रमुख कारकों में मोटापा, रक्तचाप, रक्त शर्करा और रक्त कोलेस्ट्रॉल के स्तर में वृद्धि शामिल हैं। ये सभी व्यवहार जोखिम कारक हैं और जीवनशैली में बदलाव से बदले जा सकते हैं। आधुनिक और उन्नत तकनीक निश्चित रूप से हमारे लिए जीवन आसान कर रही है। इनमें ऑनलाइन शॉपिंग, ऑनलाइन भुगतान, सूचना का उपयोग, ऐसे काम जो सभी हमारे घर से आराम से किए जा सकते हैं। इनका दुष्प्रभाव यह हुआ है कि हमारे स्वास्थ्य की कीमत पर प्रौद्योगिकी ने यह सब क्या किया है। हम अब शारीरिक रूप से कम सक्रिय हैं।
कंप्यूटर पर काम करते हुए लंबे समय तक एक डेस्क पर बैठे रहते हैं, स्मार्टफोन पर सोशल मीडिया का उपयोग कर टीवी देखते हैं। ये सभी गतिविधियां गतिहीन व्यवहार को बढ़ावा देती हैं। खुली जगह की कमी के कारण, सभी आयु समूहों में शारीरिक गतिविधि का स्तर कम हो गया है। उन्होंने कहा कि एनसीडी को नियंत्रित करने और शारीरिक गतिविधि को बढ़ावा देने के लिए आईएमए ने 'मूव मूव मूव नामक एक अभियान का प्रस्ताव रखा है। नियमित व्यायाम करने के अतिरिक्त लोगों को दिनभर में अधिक बार घूमना फिरना चाहिए। एचसीएफआई द्वारा आयोजित किए जाने वाले आगामी परफेक्ट हेल्थ मेला में चर्चा के मुख्य विषयों में यह विषय भी शामिल रहेगा। मेला चार से आठ अक्टूबर तक नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित किया जाएगा।
कुछ उपयोगी टिप्स :
* जितनी बार हो सके सीढिय़ों पर चढ़ें उतरें
* बस स्टॉप से बाहर निकल कर बाकी रास्ते पैदल चलें
Published on:
21 Sept 2017 06:00 pm
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