
यदि आपकी उम्र 60-65 से ज्यादा है तो आपने भी याद्दाश्त में कमी या सोचने समझने की क्षमता में कमजोरी पाई होगी। ऐसे में आप दवाओं के बजाय प्राकृतिक तरीकों को अपनाएंगे तो इन परेशानियों में आपको सुधार मिलेगा। हर वर्ष 21 सितम्बर को वर्ल्ड अल्जाइमर डे मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम लेट्स टॉक अबाउट डिमेंशिया रखी गई है। अल्जाइमर डिमेंशिया का एक रूप है जिसमें याद्दाश्त में कमी और सोचने-समझने की क्षमता पर गलत असर पड़ता है। समय रहते इसके प्रति सजग रहकर बीमारी से बचा जा सकता है।
जरूरी नहीं कि समस्या होने के बाद उसका इलाज लिया जाए। बुढ़ापे में अल्जाइमर न करे परेशान इसके लिए अपनाएं आसान तरीके-
सबसे जरूरी है कि तनाव न लें।
सोने से पहले गुनगुने पानी में पैरों को १०-१५ मिनट के लिए डुबोकर बैठें। इससे ऊर्जा बरकरार रहती है।
नाक में बादाम रोगन तेल, गाय का घी या षड्बिंदु तेल की १-२ बूंद डालकर लंबी गहरी सांस लें और छोड़ें। इससे दिमाग को ताकत मिलेगी।
उल्टा लेटकर रीढ़ की हड्डी पर ठंडे पानी की गीली पट्टी रखें। खाली पेट रहकर करें। तंत्रिका तंत्र दुरुस्त रहेगी।
उपयोगी तरीके
आहार चिकित्सा : शंखपुष्पी व ब्राह्मी की आधी-आधी चम्मच की मात्रा को मिश्री के साथ मिलाकर सुबह के समय खाली पेट लें। डायबिटीज हो तो मिश्री न लें। इसके अलावा रात को सोने से पहले एक गिलास दूध में आधा चम्मच अश्वगंधा ले सकते हैं। ज्यादा मिर्च-मसालेदार चीजें न खाएं।
योग : शवासन के अलावा ताड़ासन योग कर सकते हैं।
प्राणायाम : नाड़ीशोधन, अनुलोम - विलोम और भ्रामरी क्रिया से दिमाग ऊर्जावान
रहता है।
सिर की मालिश : याद्दाश्त और सोचने व समझने की क्षमता को मजबूत व बरकरार रखने के लिए सिर की मालिश करना फायदेमंद होता है। इसके लिए आप चाहें तो सिर की त्वचा (स्कैल्प) पर गाय के घी से नियमित मालिश करें। सोने से पहले ऐसा कर सकते हैं। साथ ही तलवों पर भी गाय के घी से मालिश की जा सकती है। इससे तंत्रिका तंत्र उत्तेजित होती है।
एक्सपर्ट : डॉ. रमाकांत शर्मा, नेचुरोपैथी एवं आयुर्वेद विशेषज्ञ, जयपुर
Published on:
21 Sept 2019 01:12 pm

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