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मरते दम तक जेल में रहेंगे रामपाल, अदालत ने सुनाई उम्रकैद की सजा

हत्या के मामले में दोषी करार बरवाला के सतलोक आश्रम संचालक रामपाल सहित 15 दोषियों को सजा सुना दी गई है।

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मरते दम तक जेल में रहेंगे रामपाल

मरते दम तक जेल में रहेंगे रामपाल,अदालत ने सुनाई उम्रकैद की सजा

हिसार। हत्या के मामले में दोषी करार बरवाला के सतलोक आश्रम संचालक रामपाल सहित 15 दोषियों को सजा सुना दी गई है। हिसार की विशेष अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। उन पर दो-दो लाख और पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। कोर्ट ने हत्या के दो मामले में रामपाल सहित 23 लोगों को 11 अक्टूबर को दोषी कऱार दिया था। सजा सुनाने के लिए अदालत में सुनवाई करीब 11 बजे शुरू हुई। सजा सुनाए जाने के समय अदालत में रामपाल और अन्य 14 दोषियों को भी लाया गया था। आज हत्या के दूसरे मामले में सजा 17 अक्टूबर को सुनाया जाएगा। दोषी करार लोगों में रामपाल का बेटा बिजेंद्र उर्फ वीरेंद्र व भानजा जोगेंद्र उर्फ बिल्लू भी शामिल है।

रामपाल के आश्रम की महिला विंग की प्रमुख रही बबीता, उसकी बहन पूनम,मौसी सावित्री भी इनमें शामिल हैं। सजा सुनाए जाने के मद्देनजर शहर और आसपास के क्षेत्र में कड़ी सुरक्षा है। पुलिस और अद्र्ध सैनिक बलों के जवान सेंट्रल जेल एक और शहर के चप्पे-चप्पे में तैनात हैं। अदालत ने रामपाल और दोषियों को भादसं की धारा 302 में उम्रकैद व एक-एक लाख रुपये का जुर्माना, धारा 120 बी के तहत उम्रकैद व एक लाख रुपये जुर्माना,भादसं की धारा 343 में दो साल कैद व पांच हजार रुपये का जुर्माने की सजा सुनाई गई है। कैद की सजाएं साथ-साथ चलेेगी।

रामपाल के वकील महेंद्र सिंह नैन ने कहा कि फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे। उन्होंने कहा कि अदालत ने इसे दुर्लभ मामला नहीं माना है। अदालत ने एक मामले में 15 आरोपितों और दूसरे मामले में 14 लोगों को दोषी करार दिया। छह आरोपित ऐेसे हैं जिनको दोनों मामलों में दोषी ठहराया गया है। दूसरे मामले में अदालत सजा का ऐलान 17 अक्टूबर को करेगी।अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डीआर चालिया की अदालत आज एफआइआर नंबर 429 में सजा सुनाई। एफआइआर नंबर 430 मामले में 17 अक्टूबर को सजा सुनाई जाएगी।

एफआइआर नंबर 429 और 430 में तीन आरोपितों को अभी पकड़ा नहीं जा सका है। इनमें रामपाल की बेटी नीलम, रिश्तेदार राजबाला और संजय फौजी शामिल हैं। हालाकि रामपाल के वकील एपी सिंह का कहना है कि अदालत के फैसले को हाइकोर्ट में चुनौती देंगे।

मामले में दोषी
रामपाल,उसका बेटा वीरेंद्र, भांजा जोगेंद्र, बहन पूनम और मौसी सावित्री के अलावा बबीता, राजकपूर उर्फ प्रीतम, राजेंद्र, सतबीर सिंह, सोनू दास, देवेंद्र, जगदीश, सुखवीर सिंह, खुशहाल सिंह, अनिल कुमार को कोर्ट ने दोषी ठहराया था। एक अन्य महिला की हत्या के केस में रामपाल समेत 14 दोषियों को 17 अक्टूबर को सजा सुनाई जा सकती है।

रामपाल समेत 6 लोग दोनों मामलों में दोषी ठहराए गए
रामपाल समेत 6 आरोपी दोनों केस में दोषी हैं। इनमें रामपाल, उसका बेटा वीरेंद्र, राजकपूर उर्फ प्रीतम, राजेंद्र, जोगेंद्र और बबीता शामिल हैं। रामपाल, वीरेंद्र, जोगेंद्र, राजेंद्र और राजकपूर उर्फ प्रीतम जेल में बंद थे, जबकि बबीता जमानत पर थी। अब सभी को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया है। संजय और राजबाला भी दोनों मामलों में आरोपी हैं, लेकिन दोनों फरार हैं। दोनों मामलों में कुल 23 लोग दोषी ठहराए गए हैं।

कोर्ट के फैसले पर वकील एपी ने जताई नाराजगी
कोर्ट के इस फैसले को लेकर रामपाल के वकील ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि वे इस फैसले के खिलाफ हाइकोर्ट जाएंगे।वकील एपी सिंह ने कहा कि रामपाल ने समाज की भलाई के लिए अनेक कार्य किए हैं। उन्होंने कन्या भूर्ण हत्या को रोकने के लिए कई कदम उठाए। इसके अलावा उन्होंने जाति रहित समाज का भी निर्माण किया है। उन्होंने कहा कि वे कोर्ट के इस फैसले से नाखुश है और वे मामले को लेकर अब हाइकोर्ट जाएंगे।

अनुयायियों को ढाल बना खड़ा कर लिया था, भीड़ में हुई थी 6 की मौत
नवंबर 2014 में हिसार के बरवाला में स्थित सतलोक आश्रम पर पुलिस ने छापेमारी की थी। पुलिस से बचने के लिए रामपाल ने अपने अनुयायियों को आश्रम के अंदर और बाहर ढाल के रूप में इस्तेमाल करते हुए खड़ा कर लिया था। भीड़ के इसी जमावड़े में आश्रम के अंदर 5 महिलाओं और एक बच्चे की मौत हो गई थी। आरोप है कि रामपाल के आदेश पर उसके सहयोगियों और प्राइवेट कमांडो ने सतलोक आश्रम में बंधक बना रखा। उन्हें आश्रम से बाहर नहीं जाने दिया गया। इस वजह से दम घुटने से ये मौतें हुईं।

इस मामले के कारण शुरू हुआ पूरा बवाल
2006 में करौंथा के सतलोक आश्रम के बाहर फायरिंग में एक युवक की मौत हो गई थी। प्रशासन ने रामपाल और उनके 37 अनुयायियों को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया। बाद में उन्हें जमानत मिल गई। इसी मामले में हिसार कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बाबा की पेशी थी, जहां रामपाल समर्थकों ने बवाल किया। इसके बाद पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने रामपाल व उसके अनुयायियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया। हाईकोर्ट ने 5 नवंबर 2014 को डीजीपी और गृह सचिव को आदेश दिया कि 10 नवंबर 2014 को रामपाल पेश करें। 10 नवंबर को रामपाल ने लोगों को आश्रम में ढाल बनाकर खड़ा कर दिया। कोर्ट के आदेश के बावजूद 10 और 17 नवंबर को भी रामपाल की पेशी नहीं हो पाई। इसके बाद कोर्ट ने पुलिस-प्रशासन को फटकार लगाते हुए 21 नवंबर तक रामपाल को पेश करने को कहा। 19 नवंबर 2014 को 60 घंटे तक की घेराबंदी और करीब 56 घंटे की कार्रवाई के बाद रामपाल ने रात में सरेंडर किया। इस पूरी घटना में 6 लोगों की मौत हो गई।

3 माह जांच,28 माह ट्रायल, 68 लोगों की गवाही,करीब चार साल में यह फैसला
हत्या के इन मामलों में 19 नवंबर 2014 को बरवाला थाने में केस दर्ज करने के बाद पुलिस ने 3 माह 11 दिन तक तफ्तीश की। 26 फरवरी 2015 को कोर्ट में चालान पेश होने के बाद 30 सितंबर 2016 को सभी आरोपियों पर चार्ज फ्रेम किए गए थे। करीब 28 माह तक कोर्ट में ट्रायल चला, जिसमें 68 गवाहियां हुईं। बीते सोमवार को दोनों मुकदमों में फाइनल बहस की गई।हिसार के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डीआर चालिया की अदालत ने इस मामले में करीब चार साल में यह फैसला सुनाया है।

एफआइआर नंबर 429
सोनीपत के धनाना निवासी रामपाल, रोहतक के शास्त्री नगर निवासी बेटा बिजेंद्र उर्फ वीरेंद्र, हिसार के उगालन निवासी भानजा जोगेंद्र उर्फ बिल्लू, हिसार की लक्ष्मी विहार कालोनी निवासी बबीता, भिवानी के नाथूवास निवासी बहन पूनम, जींद की इंपलाय कालोनी निवासी मौसी सावित्री, गुरुग्राम के सिकंदरपुर निवासी देवेंद्र, सूरत नगर निवासी अनिल,सिरसा के धिगतानिया निवासी जगदीश, पानीपत के मच्छरौली निवासी कुशल सिंह, भिवानी के इमलौटा निवासी प्रीतम उर्फ राज कपूर, सोनीपत के भडग़ांव निवासी राजेंद्र, जींद के कंडेला निवासी सतबीर, अमरहेड़ी निवासी सोनू दास और सिरसा के भेरवाल निवासी सुखबीर।

एफआइआर नंबर 430
इस मामले में रामपाल, उसके बेटे व भानजे के अलावा हिसार की लक्ष्मी विहार कालोनी निवासी बबीता, भिवानी के इमलौटा निवासी प्रीतम उर्फ राज कपूर, सोनीपत के भडग़ांव निवासी राजेंद्र, झज्जर के बिरहाना निवासी कृष्ण कुमार, हिमाचल प्रदेश के किन्नौर के रिब्बा निवासी बलवान, तकसाल निवासी पवन, सोलन के डिरग गांव निवासी राजीव शर्मा, राजस्थान के सुमेरपुर उपमंडल के गांव पूमावास निवासी राजेश उर्फ रमेश, ओगना के नरसिंहपुरा निवासी नटवरलाल उर्फ लक्ष्मण, सवाई माधोपुर के सूर्य नगर कालोनी निवासी राजेश और कुरुक्षेत्र के बोराना निवासी रामचंद्र को दोषी करार दिया गया है।

कौन है रामपाल-
रामपाल का असली नाम रामपाल सिंह जाटिन है और उसका जन्म सोनीपत जिले में गोहना तहसील के धनाना गांव में हुआ था। उसके पिता नंद लाल एक किसान थे और मां इंदिरा देवी एक गृहणी थी। रामपाल ने खुद निलोखेरी आईटीआई से डिप्लोमा लिया और सालों तक हरियाणा सरकार के सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के तौर पर काम भी किया। उन्हीं दिनों में रामपाल सत्संग करने में रूचि लेने लगे और संत रामपाल दास बन गए थे। साल 1996 रामपाल ने अपने अभियंता पद से स्तीफा दे दिया और बाद में करोंथा गांव में सतलोक आश्रम की स्थापना की थी। हालांकि इनके गिरफ्तार होने के बाद आश्रम सरकार के क़ब्ज़े में है। रामपाल ने 1999 में सतलोक आश्रम की स्थापना की। रामपाल के दो लड़के और दो लड़कियां भी हैं।

साल 1999 में हुई सतलोक आश्रम की स्थापना-
रोहतक के करौंथा गांव में बने सतलोक आश्रम की साल 1999 में हुई थी। संत रामपाल खुद को कबीर पंथ का अनुयायी कहता था। उसके भक्तों के अनुसार वह कबीर का ही अवतार है। रामपाल और कबीर पंथ के लोग मंदिर, मूर्ति पूजा, छुआछूत, व्यभिचार और अभद्र गीत व डांस को भी बुरा मानते हैं।

2014 में रामपाल पर हुए थे 7 केस दर्ज-
रामपाल पर पुलिस ने नवंबर 2014 में सात केस दर्ज किए थे। इसमें देशद्रोह, हत्या, अवैध रूप से सिलेंडर रखने आदि काफी मामले हैं। रामपाल इनमें से दो केसों में बरी हो चुका है। इन दोनों केसों में पुलिस कोई पुख्ता सबूत पेश नहीं कर सकी थी, जिस पर कोर्ट ने भी टिप्पणी की थी। एक मुकदमे से अदालत ने रामपाल का नाम हटा दिया था, वहीं अब रामपाल दो हत्याओं के माले में दोषी करार दिया गया है। इसके बाद भी रामपाल के खिलाफ चल रहे तीन केस लंबित पड़े हैं।

29 लोगों को दोषी करार दिया, जिसमें तीन महिलाएं शामिल-
अदालत ने रामपाल व अन्य आरोपितों को भादसं की धाराओं 302, 343 और 120बी के तहत दोषी ठहराया है। अदालत में एफआइआर नंबर 429 के मामले में रामपाल सहित 15 आरोपितों को दोषी करार दिया। वहीं कोर्ट ने एफआइआर नंबर 430 में 14 आरोपितों को दोषी करार दिया थ।

रामपाल पर दर्ज केस
1- रामपाल सहित अन्यों पर सरकारी डयूटी में बाधा पहुचाने का केस हिसार के बरवाला थाने में दर्ज है।
2 राम सहित चार अन्य पर रास्त अवरुद् कर संगत को बंधक बनाने का केस दर्ज
3 रामपाल सहित 14 पर पुस्तक बांटकर धार्मिक धार्मिक भावनाए भडकाने का केस दर्ज है
4 हिसार के बरवाला आश्रम में भगदड में पाच श्रदालुओं की मौत पर रामपाल और 13 पर हत्य का दूसरा केस दर्ज है।
5 आश्रम में चार सौ गैस सिलेंडर पाए जाने के मामले में आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत केस दर्ज है
6 रामपाल सहित 14 लोगों पर एमपी निवासी रजनकी की आश्रम में मौत के मामले में हत्या का केस दर्ज है।
7 हिसार के बरवाला थाने में रामपाल समेंत 942 लोगों पर देशद्रोह का केस दर्ज है।

रामपाल के समर्थक-
इनके अलावा इनके समर्थकों ने यह भी बतलाया था कि बाबा तो पशुओं से बातें करते हैं। इनके अलावा रामपाल कई चर्चाओं में भी घिरे रहे। 2006 में स्वामी दयानंद पर एक बयान दिया था इस कारण आर्य समाज के समर्थकों और रामपाल के समर्थकों के बीच आश्रम के बाहर हिंसक वार्ता झड़प हुई थी जिसमें एक महिला की मौत होनी की ख़बरें आई थी। इस मामले में हरियाणा पुलिस ने रामपाल को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया था जिसके कारण इन्हें तकरीबन 22 महीने तक कारागृह में रहना पड़ा था। 22 महीनों के पश्चात रामपाल को 30 अप्रैल 2008 को पुलिस ने इन्हें रिहा कर दिया था।

बाबा की दिलचस्प कहानी
संत रामपाल की बाबा बनने की कहानी जितनी दिलचस्प है। उतनी है उनकी गिरफ्तारी के बाद तहखानों से मिली सामग्री भी। जी हां, हत्या के आरोप में रामपाल की गिरफ्तारी के बाद जब सतलोक आश्रम में सर्च अभियान चलाया गया था तो वहां से करोड़ों रुपए की खाद सामग्री मिली थी। जैसे, 7000 किलो देसी घी, 99 कार्टून सरसों का तेल, 186 कार्टून पारले बिस्कुट, 45 कैन सोयाबीन रिफाइंड तेल, 154 कट्टे मिल्क पाउडर, 600 कट्टे आटा और 600 कट्टे चीनी आदि । तलाशी के दौरान पुलिस को कई चौंकाने वाली चीजों का पता चला था। रामपाल का आश्रम किसी फाइव स्टार होटल से कम नहीं था। इसके अंदर स्विमिंग पूल, एलईडी टीवी से लेकर अस्पताल तक थे।

कैमरे का मुंह भी टॉयलेट के अंदर की ओर था-
सर्च के दौरान देशद्रोह व हत्या के आरोपी कबीरपंथी बाबा रामपाल के बरवाला (हिसार, हरियाणा) स्थित सतलोक आश्रम में महिला टॉयलेट में सीसीटीवी कैमरा लगा था। इतना ही नहीं, कैमरे का मुंह भी टॉयलेट के अंदर की ओर था। रामपाल खुद सिंहासन पर बैठता था और लिफ्ट से मंच पर प्रकट होता था। 5 लाख रुपए का मसाजर भी उसके कमरे से मिला था। इसके अलावा, कंडोम और अश्लील साहित्य भी बरामद किया गया था।

नरबलि का भी लगा आरोप-
बरवाला के सतलोक आश्रम संचालक रामपाल की मुसीबतें तब और बढ़ गई थी जब हाईकोर्ट में उनके खिलाफ नरबलि का आरोप लगाया गया था। दरअसल, जींद निवासी हरिकेश ने याचिका दायर कर कहा था कि अगस्त 2014 में उनके बेटे का शव आश्रम में मिला था। आशंका है कि उसकी बलि दी गई है, लेकिन पुलिस ने आत्महत्या का केस दर्ज किया था। जिस पर पीडि़त ने सीबीआई जांच की मांग की थी।

गिरफ्तारी से बचने फेंके थे पेट्रोल बम-
गिरफ्तारी से बचने रामपाल और उसके कमांडोज ने तरह-तरह के हथकंडे अपनाए थे, लेकिन बच नहीं पाए। गिरफ्तारी से पहले आश्रम के बाहर हिंसा भड़क उठी थी और रामपाल को गिरफ्तार करने पहुंची पुलिस को समर्थकों व कमांडोज ने फायरिंग कर बाहर ही रोक दिया था। करीब 90 राउंड फायरिंग की गई थी और पेट्रोल बम भी फेंके गए थे। इस हिंसा में लगभग 75 पुलिस कर्मी और 200 से ज्यादा लोग जख्मी हो गए थे।


रामपाल प्रकरण -
हिसार। रामपाल की संपत्ति प्रदेश सरकार के कब्जे में है। बरवाला स्थित सतलोक आश्रम के संचालक रामपाल पर पुलिस ने 18 नवंबर 2014 को केस दर्ज कर गिरफ्तार किया था। रामपाल पर देश के खिलाफ युद्ध की साजिश सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज है। एफआईआर नंबर 428 के तहत पुलिस ने 1967 एक्ट के तहत रामपाल की चल-अचल संपत्ति को अटैच किया। इस एफआईआर में रामपाल पर गंभीर आरोप के तहत केस दर्ज किया गया था। देश के खिलाफ साजिश करने की धाराओं में दर्ज केस में पुलिस संपत्ति को अटैच किया।

यह संपत्ति अटैच हुई
12.75 एकड़ में बना सतलोक आश्रम, 93 कनाल 11 मरला में बरवाला में ही बना दूसरा आश्रम, दौलतपुर में 7 कनाल 19 मरला में आश्रम, ढाणी प्रेम नगर में 9 मरला जमीन, छह बैंक खातों में जमा 4 लाख 48 हजार 64 रुपये, सतलोक आश्रम में सामान की बोली से मिले 55 लाख 68 हजार 712 रुपये, आश्रम की पुलिस के पास जब्त करीब 43 लाख 31 हजार 911 रुपये की संपत्ति।

यह चल संपत्ति भी अटैच
बिजली के ट्रांसफार्मर, 70 से अधिक वाहन, फर्नीचर, पशु, लोहे का सामान, स्टील के बर्तन, पंखे, कूलर, क्रॉकरी का सामान, किचन का सामान, बेड सहित अन्य सैकड़ों तरह के सामान।

हाईकोर्ट ने कहा था रामपाल से वसूलो पूरा खर्च
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने रामपाल प्रकरण में आश्रम को खाली कर रामपाल की गिरफ्तारी के लिए प्रदेश सरकार की ओर से खर्च हुए करीब 19 करोड़ रुपये रामपाल से ही वसूलने के निर्देश दिए थे। उच्च न्यायालय इस प्रकरण पर हुए पूरे खर्च का ब्योरा भी मांगा था। जिसमें सीआरपीएफ की तैनाती, हरियाणा पुलिस के जवानों की तैनाती, हरियाणा रोडवेज की बसों, क्रेन, फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस सहित अन्य सभी खर्च का आंकलन हरियाणा पुलिस ने किया था।

किसी प्रकार का कोई तनाव नही
इस दौरान किसी भी प्रकार की कोई तनाव नजर नही आया। सुरक्षा के लिहाज से तीस डयूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किए है डीआईजी और आईटी के साथ 6 आईपीएस अधिकारियों की टीम को नियुक्त किए थे है और दस डीएसपी टीम को नियुक्त किए गए थे दूसरे जिलो से पुलिस बुलाई गई है जिसमें लगभग 1500 जवानों को तैनात किया था। हिसार जिले में सुरक्षा के लिहाज से नाके लगाए है चैकिंग अभियान जारी रहेगा। तीन बटालियों को सुरक्षा लिहाज से लगाया है।

रेलवे स्टेशन व बस अड्डों पर पुलि सुरक्षा के कडे इंतजाम किए गए है। सुरक्षा के लिहाज से धारा 144 भी लागू रही। रामपाल के मामले में 17 अक्तूबर को 430 नंबर मुकदमें परभी फैसला आना बाकी है। रामपाल के अधिवक्ता एके गखड ने बताया कि अदालत ने 302, 120 बी व 343 के धारा के तहत आजीवन कारावास व एक एक लाख रुपये जुर्मान की सजा सुनाई है इन धाराओं के तहत सभी सजाए साथ साथ चलेगी। उन्होंने कहा कि रामपाल संत व अच्छे चलन के व्यक्ति के है इसलिए उन्हे कम से कम सजा दी जानी चाहिए। रामपाल के सीनियर एडवोकेट एपी सिंह ने बताया कि अदालत ने अलग अलग धाराओं के तहत सभी 15 आरोपोरियों को आजीवन कारावास व एक एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। उन्होंने बताया कि इस मामले को लेकर वे हाई कोर्ट में अपील दायर करेगें।