
(चंडीगढ): हरियाणा के सिरसा जिले के दरबा कला निवासी किसान अनिल कसवान को जब आरटीआई सवाल का जवाब हजारों पेजों में होने की सूचना हरियाणा स्टेट कोऑपरेटिव सप्लाई एंड मार्केटिंग फेडरेशन-हैफेड के राज्य जनसूचना अधिकारी से मिली, तब उन्हें लगा कि उनके सवाल को शायद इस तरह टाला जा रहा है। लेकिन जब दरबा कला के डाकघर पर इस जवाब के 32017 पेज के 11 बडे बण्डल पहुंचे, तो वे हक्के-बक्के रह गए। अनिल कासवान के सुपुर्द करने के लिए डेढ़ क्विंटल वजन के 11 बण्डल रजिस्टर्ड पार्सल से भेजे गए थे।
यह था सवाल
किसान और समाजसेवी अनिल कासवान के मुताबिक मुझे इस साल सरसों की सरकारी खरीद में अनियमितता की बात पता चली थी। इस पर मैंने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत सवाल लगाया था कि इस वर्ष गेंहू और सरसों की खरीद का ब्यौरा,खरीद एवं भुगतान के सरकारी मानक क्या हैं? इस सवाल को जिला उपायुक्त कार्यालय ने हैफेड को भेज दिया था। हैफेड के राज्य जनसूचना अधिकारी ने पिछली 2 जुलाई को सूचित किया कि उनके सवाल का जवाब हजारों पेजों में बनता है। वे सिरसा कार्यालय आकर अवलोकन कर लें।
कासवान ने बताया कि उन्हें लगा कि जनसूचना अधिकारी जवाब नहीं देना चाहते हैं, इसलिए इस तरह का पत्र भेजा गया है। इसलिए उन्होंने हैफेड कार्यालय न जाने का फैसला किया। कासवान ने बताया कि 16 जुलाई को एक पत्र उन्हें मिला, जिसमें 32017 पेज की सूचना का प्रति पेज दो रूपए की दर से 68,834 रूपए और डाक खर्च के 800 रूपए जमा करवाने की बात कही गई थी। हालांकि कुल खर्च के 64,834 रूपए ही बनते थे लेकिन उन्होंने 68,834 रूपए ही जमा करवा दिए। इसके बाद गांव के डाकघर को कुल 11बण्डलों का पार्सल मिला।
उधर, सिरसा के एक अन्य आरटीआई कार्यकर्ता करतार सिंह ने मुख्य सचिव को हैफैड के खिलाफ शिकायत भेजी है। शिकायत में उन्होंने कहा है कि हैफेड का जिला कार्यालय सूचना मागने वालों को संक्षेप में जरूरी आंकडा देने के बजाय निराश कर रहा है। आरटीआई आवेदन देखने से पता चलता है कि सामान्य सूचना ही मांगी गई थी, लेकिन हैफेड जवाब को अनावश्यक भारी भरकम बनाकर टालने का प्रयास करता है।
Published on:
19 Aug 2018 05:35 pm

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