
इमरजेंसी के 44 साल: '25 जून 1975' जब जेल पड़ गई छोटी, और जनसंघ के तमाम दिग्गज नेता हुए एक जगह
(संजीव शर्मा/हिसार,रोहतक): 'आपातकाल' यानि इमरजेंसी ( Emergency ) भारत के इतिहास के पन्नों में लिखा एक ऐसा स्याह शब्द है जिसे ना तो मिटाया जा सकता है, ना ही इससे जुड़ी यादों को भुलाया जा सकता है। आपातकाल से जुड़े हुए कई किस्से हमे सुनने और पढ़ने को मिलते हैं। ऐसे ही एक किस्से को हम आपसे साझा कर रहे है। तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी ( Indira Gandhi ) की सिफारिश पर भारत में 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक आपातकाल ( emergency in india ) लागू हुआ। कल ( '25 जून' को ) इमरजेंसी के 44 वर्ष ( 44 Year Of Emergency ) पूरे होने वाले है। ऐसे में हम आपको इमरजेंसी और हरियाणा की रोहतक जेल का खास कनेक्शन बताने जा रहे हैं।
देश में जब इमरजेंसी ( Emergency In India ) लागू की गई तो सभी दलों के बड़े नेताओं को रोहतक की जेल ( Rohtak Jail ) में इक्कठा किया गया था। इसके बाद कई नेताओं को जहां पूरा समय रोहतक जेल में रखा गया वहीं कुछ नेताओं को हरियाणा की दूसरी जेलों में भेज दिया गया। इमरजेंसी ( The Emergency ) के दौरान देश के विभिन्न राजनीतिक दलों के तमाम बड़े-बड़े नेताओं को मीसा एक्ट—1971 ( Misa Act ) के तहत जेलों में ठूंस दिया गया।
जब जेल पड़ गई छोटी
इमरजेंसी के दौरान रोहतक की जेल में रहने वाले रोहतक निवासी मदनलाल ने अपने संस्मरण साझा करते हुए बताया कि देश में जैसे ही इमरजेंसी ( The Emergency ) लागू की गई वैसे ही नेताओं की गिरफ्तारियों का दौर शुरू हो गया और सभी नेताओं को गिरफ्तार करके रोहतक की जेल में लाया गया। 25 जून की आधी रात को इमरजेंसी लागू हुई और 26 जून की शाम तक सभी नेताओं को रोहतक जेल में भेज दिया गया। हालात यह थे कि रोहतक जेल ( Rohtak Jail ) की बैरक कम पड़ गई तो यहां जेल के भीतर ही खुले मैदान में सभी को इक्कठा कर लिया गया। मीसा के तहत जेल आने वालों में जनसंघ से जुड़े नेताओं की संख्या सबसे अधिक थी। मदनलाल के अनुसार आलम यह हो गया कि यहां रहने व खाने पीने तक की कोई व्यवस्था नहीं थी। जो व्यक्ति जनसंघ या अन्य गतिविधियों में शामिल था उसे जेल में ठूंसा जा रहा था।
इन कद्यावर नेताओं को जेल में ठूंसा
तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ( Indira Gandhi ) के निर्देश पर सबसे नजदीक होने के कारण रोहतक जेल को चुना गया। जहां पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ( Lal Krishna Advani ) , के.आर. मलकानी , पीलू मोदी, सिकंदर भट्ट के अलावा पूर्व उपराष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत ( Bhairon Singh Shekhawat ) , पूर्व उपप्रधानमंत्री ताऊ देवीलाल ( Tau Devi Lal ) , पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ( Chandrasekhar ) , जनता पार्टी नेता राज नारायण, पूर्व रक्षा मंत्री जार्ज फर्नांडिस ( George Fernandes ), बीजू पटनायक ( Biju Patnaik ) , भाजपा नेता विजय कुमार मल्होत्रा समेत सैकड़ों ऐसे नेता थे जिन्हें दिल्ली से उठाकर रोहतक की जेल में भेज दिया गया।
बाबू मदनलाल ने इमरजेंसी को याद करते हुए बताया कि दो दिन में ही रोहतक जेल के हालात बेकाबू हो गए। यह मुद्दा इंदिरा गांधी तक पहुंचा तब उन्होंने फरमान जारी किया कि हरियाणा से संबंधित हवालातियों तथा एक-एक दिल्ली से भेजे गए वरिष्ठ नेता को हरियाणा की दूसरी जेल में शिफ्ट कर दिया जाए। इसके बाद रोहतक जेल से उन्हें करनाल ( Karnal ) व अंबाला ( Ambala ) आदि जेलों में शिफ्ट किया गया।
उपप्रधानमंत्री बने आडवाणी देखने आए बैरक
भाजपा के मार्गदर्शक मंडल में शामिल हो चुके वरिष्ठ नेता एवं लाल कृष्ण आडवाणी जब वाजपेयी सरकार में उपप्रधानमंत्री थे तो उन्होंने रोहतक जेल देखने की इच्छा जताई। आडवाणी रोहतक की जेल में 18 जुलाई 1975 से 22 जुलाई 1975 तक रहे थे। आडवाणी जब उपप्रधानमंत्री बने तो वह 27 जून 2003 को रोहतक जेल में आए थे। यहां उन्हें जिस बैरक में रखा गया था वहां आडवाणी ने करीब आधा घंटा व्यतीत किया था।
आज जेल की जगह बन गया है पार्क
रोहतक की जेल को हरियाणा की सर्वाधिक चर्चित एवं पुरानी जेल माना जाता है। लेकिन इमरजेंसी के दौरान जिस जेल में देश के तमाम बड़े नेताओं को रखा गया था आज उस जेल का नामो-निशान खत्म हो चुका है। रोहतक में वर्ष 2013 के दौरान बस अड्डे के निकट स्थित पुरानी जेल को तोडक़र वहां पार्क का निर्माण कर दिया गया है। जिस जगह कभी उंची-उंची दीवारों के बीच देश के बड़े नेताओं को रखा गया था आज वहां संगीतमय फव्वारे चलते हैं और लोग सुबह-शाम सैर के लिए आते हैं।
Published on:
24 Jun 2019 07:09 pm
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