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मंत्रीमंडल की बैठक में गूंजा पद्मावती का मुद्दा, विज ने उठाई फिल्म पर रोक की मांग

हरियाणा सरकार की कैबिनेट बैठक में आज विवादित हिंदी फिल्म पद्मावती का मुद्दा छाया रहा
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हिसार

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Shankar Sharma

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Updated: 23 Nov 2017, 9:45 PM IST

padmavati

चंडीगढ़। हरियाणा सरकार की कैबिनेट बैठक में आज विवादित हिंदी फिल्म पद्मावती का मुद्दा छाया रहा। हरियाणा सरकार ने गेंद को सेंसर बोर्ड के पाले में डालते हुए मामले को लंबित कर दिया है।

मंत्रीमंडल की आज हुई बैठक में स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने यह मुद्दा उठाया। विज ने अन्य कई राज्यों का हवाला देते हुए फिल्म पर हरियाणा के प्रदर्शन पर रोक लगाने की बात कही। बैठक में मौजूद अन्य मंत्रियों ने विज खुलकर न तो समर्थन किया और न ही विरोध किया।

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि फिल्म पद्मावती पर सेंसर बोर्ड के फिल्म रिलीज करने के उपरान्त ही राज्य सरकार कोई निर्णय लेगी, अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को किसी भी समुदाय के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने की अनुमति नहीं है।


भाजपा नेता सूरजपाल अम्मू द्वारा दिए गए पद्मावती फिल्म पर दिए गए विवादित बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अम्मू का व्यक्तिगत बयान हो सकता है, पार्टी ने उनको नोटिस जारी किया है और मामले में कानून अपना काम करेगा।

निजी अस्पतालों की लूट से बचाने को प्रस्ताव लाए केंद्र:विज
हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा कि गुरूग्राम के फोर्टिस अस्पताल जैसी घटनाओं पर लगाम कसने के लिए केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डïा से प्रस्ताव लाने संबंधी बात करेंगे ताकि कोई भी निजी अस्पताल इस प्रकार से लूट न कर सके।


स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि मामले की जांच के लिए विभाग के अतिरिक्त स्वास्थ्य महानिदेशक की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है, जिन्हें शीघ्र ही अपनी रिपोर्ट देने के आदेश दिये गये हैं। यह टीम अस्पताल में जाकर वहां चिकित्सकों द्वारा किये गये उपचार, दवाइयों, बच्ची के मौत के कारणों एवं बिल संबंधी जानकरी लेंगे तथा यह भी पता लगाएंगे कि मृतक बच्ची को डेंगू हुआ भी था या नही। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में दोषी पाये जाने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।


विज ने बताया कि राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में डेंगू का इलाज नि:शुल्क किया जाता है। परन्तु निजी अस्पतालों में भी डेंगू के उपचार पर 16 लाख रुपये तक का खर्च तो संभव नही हो सकता है। उन्होंने कहा कि वे अपने प्रदेश की जनता को इस प्रकार से लुटने नही देंगे तथा जो भी आवश्यक कार्रवाई होगी करेंगे।