
breaking news
(चंडीगढ): हरियाणा के दलितो में बौद्ध धर्म ग्रहण करने का रूझान बढता जा रहा है। इसका कारण सामाजिक खाई का बने रहना है। इसके चलते छोटे विवाद भी बडा मुद्दा बन रहे हैं। ताजा मामला हिसार जिले की हांसी तहसील के भाटला गांव का है जहां सोमवार को 200 दलित परिवारों ने बौद्धधर्म ग्रहण कर लिया। बौद्धधर्म ग्रहण करते हुए इन परिवारों ने कहा कि वे आने वाले चुनावों में भाजपा के खिलाफ मतदान करेंगे।
इन परिवारों ने कहा कि सामाजिक बहिष्कार और अत्याचारों से बचने के लिए बौद्धधर्म ग्रहण करने के अलावा कोई और चारा ही नहीं था। दलित कार्यकर्ता रजत कलसन ने दावा किया कि कुल 500 दलित परिवारों में से 300 परिवारों ने बौद्धधर्म ग्रहण किया है। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार 160 परिवारों ने बौद्धधर्म ग्रहण किया। गांव में दलित और सवर्ण युवकों के बीच 15 जून 2017 को झगडा हो गया था। हैण्डपम्प पर पानी भरने की बारी के विवाद में दलित युवकों पर हमला कर दिया गया था। इस घटना के दूसरे दिन ही पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने दलित परिवारों से बातचीत के लिए अतिरिक्त महाधिवक्ता को गांव भेजा था। अतिरिक्त महाधिवक्ता ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि युवकों के दो गुटों के बीच हैण्डपम्प से पानी लेने के मामले में विवाद हो गया था। कुछ निहित स्वार्थी तत्वों के कारण इस विवाद ने जातीय रंग ले लिया था।
इससे पहले स्वतंत्रता दिवस पर जींद शहर में दलितों के एक समूह ने बौद्धधर्म ग्रहण किया था। हालांकि इस मामले में बौद्धधर्म ग्रहण करने वालों की संख्या नहीं बताई गई थी। धर्मपरिवर्तन की इस घटना के पीछे जो कारण बताए गए उसमें कोई सामाजिक व्यवहार की कमी शामिल नहीं थी बल्कि सरकार के सामने रखी गई मांगों का पूरा न होना बताया गया था। धर्मपरिवर्तन करने वाले समूह का कहना था कि वे अपनी मांगों को लेकर पिछले 188 दिन से आंदोलन कर रहे है लेकिन कोई सुनवाई नहीं की गई। मांगों में दलित व्यक्ति के आत्महत्या के एक मामले और दलित युवती के बलात्कार व हत्या के मामले में सीबीआई जांच की मांग के साथ कश्मीर के कठुआ में शहीद हुए सीआरपीएफ के जवान का कोई स्मारक बनाने व शहीद की पत्नी को स्थायी नौकरी देने की मांग शामिल थी।
जींद से पहले हरियाणा के सौ दलितों ने इन्हीं मांगों पर पिछले 31 मई को दिल्ली में बौद्धधर्म ग्रहण किया था। हालांकि कुरूक्षेत्र जिले के गांव झांसा की दलित युवती के बलात्कार और हत्या मामले में जांच के लिए हरियाणा सरकार ने एसआईटी का गठन किया था।
इससे पहले जून 2002 में आल इंडिया कन्फेडरेशन आॅफ शेड्यूल्ड कास्ट और शेड्यूल्ड ट्राइब्स की ओर से कुरूक्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम में करीब 20 हजार दलितों ने बौद्धधर्म ग्रहण किया था। उस समय कन्फेडरेशन के हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष ने मुद्दा सुप्रीम कोर्ट द्वारा पदोन्नति में आरक्षण रोक देने का बताया था। उन्होंने कहा था कि पदोन्नति में आरक्षण न मिलने से अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग सरकार की तीसरी श्रेणी की नौकरी तक सीमित रह गए है। दलितो के बौद्धधर्म ग्रहण करने के रूझान के पीछे मूलतः बौद्धधर्म में जातिप्रथा का ना होना है। हरियाणा में दलितों के बौद्धधर्म ग्रहण करने का रूझान वर्ष 2000 में पैदा हुआ जबकि दिल्ली में आयोजित बौद्धधर्म ग्रहण समारोह में हरियाणा के दलित शामिल हुए थे।
हरियाणा की ढाई करोड आबादी में दलित करीब 47 फीसदी है। दलित संगठन इस आबादी के लिए 20 फीसदी आरक्षण की मांग कर रहे है। हरियाणा के कुरूक्षेत्र व यमुनानगर जिलों में बौद्धविहार स्थापित किए गए है। दलितों को जातीय भेदभाव की शिकायत है और उन्हें विश्व हिन्दू परिषद एवं आरएसएस जैसे संगठनों के रूख पर आपत्ति है।
Published on:
22 Aug 2018 03:15 pm
बड़ी खबरें
View Allहिसार
हरियाणा
ट्रेंडिंग
