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सूर्य, शनि और गुरु इस तरह बदल देते हैं जिंदगी

जातक अगर प्रकृति के अनुसार आचरण करे तो खराब समय में भी अपनी लय पा सकता है तथा बेहतर परिणाम हासिल कर सकता है

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Sunil Sharma

Dec 12, 2015

astrology naugrah

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ज्योतिष के अनुसार जिस जातक का समय अच्छा चल रहा होता है वह प्रकृति की लय में होता है, वहीं समय खराब होने पर जातक की प्रकृति के साथ लय बिगड़ जाती है और वह दुख पाने लगता है। ज्योतिष से हम जान सकते हैं कि अमुक जातक की नैसर्गिक प्रवृति क्या है। अगर वह उसके अनुसार आचरण करे तो खराब समय में भी अपनी लय पा सकता है और बेहतर परिणाम हासिल कर सकता है।

जातक की प्रकृति जानने से पूर्व हमें ग्रहों और राशियों की मूल प्रकृति को समझना होगा। हर राशि जहां सवा दो नक्षत्रों से मिलकर बनती है वहीं ग्रह नक्षत्रों से मिल रही रश्मियों को जातक तक पहुंचाकर अपने प्रभाव देते हैं। आइए जानते हैं क्या होती है ग्रहों और राशियों की मूल प्रकृति।

ग्रहों की प्रकृति और व्यक्तित्व

सूर्य से प्रभावित जातक निर्भय, पवित्र और सच्चाई लिए होते हैं। चंद्रमा शीतल ग्रह है। इस ग्रह से प्रभावित जातक घर परिवार में मग्न रहने वाले, सदैव चिंतन करने वाले, भावुक हृदय, कविता करने वाले होते हैं। मंगल को जाति से क्षत्रिय माना गया है। यह तेज, उग्र, बलशाली, मेहनती और साहस से भरा होता है। मंगलवार प्रभावित जातक बहुत अधिक लॉजिकल और अनुशासनप्रिय होते हैं। सेना-पुलिस के उच्च अधिकारियों और प्रबंधन के शीर्ष स्थानों पर बैठे जातकों में मंगल का शुभ प्रभाव देखा जा सकता है।

गुरु भारी और धीमा ग्रह है। यह शुभ और पीत वर्ण है। गुरु प्रभावित जातक धीर गंभीर बने रहते हैं और समाज में अच्छी प्रतिष्ठा हासिल करते हैं। गंभीर सौम्यता इन जातकों का प्रमुख गुण है। बुध तेजी से चक्कर लगाने वाला और छोटा ग्रह है। इससे प्रभावित जातक शक्ल से थोड़े ढीले और बुद्धू से दिखाई देते हैं, लेकिन नैसर्गिक रूप से ये बुद्धिमान होते हैं। शुक्र को राक्षसों का गुरु माना गया है। चेहरे पर सांवलापन और विलासिता इन जातकों का प्रमुख गुण होता है।

शनि धीमा और अंधेरे वाला ग्रह है। शनि को सूर्य पुत्र भी माना गया है, लेकिन इसके गुण सूर्य के ठीक विपरीत होते हैं। चुप और चिड़चिड़े। अपने काम में लगातार लगे रहते हैं। शनि का प्रभाव अधिक होने पर इनके चेहरे पर भी शनि की कालिख का असर दिखाई देने लगता है। राहू दैत्य के केवल सिर वाला भाग है। ऐसे में राहू के प्रभाव में जातक केवल चिंतन करता है। उस दौरान वह कोई परिणामजनक कार्य नहीं कर पाता है।

केतू को मंगल का प्रतिनिधि माना गया है। इससे प्रभावित जातक आमतौर पर पतले ही होते हैं। ये लोग ऊर्जावान होते हैं, लेकिन विचारवान नहीं। समस्या आने पर ऐसे जातक खुद को ही समस्या का कारण मानने लगते हैं और परेशान रहते हैं।



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