
aaj ki kundli
द्वादशी भद्रा संज्ञक तिथि दोपहर बाद १.११ तक, इसके बाद त्रयोदशी तिथि प्रारम्भ हो जाएगी। द्वादशी में यथा आवश्यक विवाहादि मांगलिक कार्य, जनेऊ तथा अन्य स्थिर संज्ञक कार्य करना चाहिए पर तेल लगाना व यात्रा वज्र्य है। त्रयोदशी तिथि में जनेऊ को छोडक़र समस्त शुभ व मांगलिक कार्य साहसिक और प्रवेशादि के कार्य शुभ होते हैं।
नक्षत्र: हस्त ‘क्षिप्र व तिङ्र्यंमुख’ संज्ञक नक्षत्र दोपहर बाद १.४६ तक, तदुपरान्त चित्रा ‘मृदु व तिङ्र्यंमुख’ संज्ञक नक्षत्र है। हस्त नक्षत्र में यात्रा, विद्या, विवाहादि, मांगलिक कार्य, वस्त्रालंकार, प्रतिष्ठादि और चित्रा में शांति, पुष्टता, कारीगरी, वास्तु, जनेऊ आदि के कार्य करने योग्य हैं।
योग: प्रीति नामक योग रात्रि ९.१९ तक, इसके बाद आयुष्मान नामक योग है। दोनों ही नैसर्गिक शुभ योग है। विशिष्ट योग: सर्वार्थसिद्धि नामक शुभ योग सूर्योदय से दोपहर बाद १.४६ तक है। करण: तैतिल नामकरण दोपहर बाद १.११ तक, इसके बाद गरादि करण रहेंगे।
शुभ विक्रम संवत् : 207४
संवत्सर का नाम : साधारण
शाके संवत् : 193९
हिजरी संवत् : 143९, मु.मास: सफर-२५
अयन : दक्षिणायन
ऋतु : हेमन्त
मास : मार्गशीर्ष। पक्ष - कृष्ण।
शुभ मुहूर्त: आज वधू प्रवेश, विपणि व्यापारारम्भ, जलवा, चूड़ाकरण, नामकरण, अन्नप्राशन, कूपारंभ, हलप्रवहण, गृहारंभ (च.शु.र.) आदि के हस्त नक्षत्र में तथा विवाह, सगाई, टीका व रोका आदि के चित्रा नक्षत्र में शुभ मुहूर्त हैं।
श्रेष्ठ चौघडि़ए: आज सूर्योदय से प्रात: ९.३१ तक लाभ व अमृत, पूर्वाह्न १०.५१ से दोपहर १२.११ तक शुभ तथा दोपहर बाद २.५२ से सूर्यास्त तक क्रमश: चर व लाभ के श्रेष्ठ चौघडि़ए हैं, जो आवश्यक शुभकार्यारम्भ के लिए अत्युत्तम हैं। बुधवार को अभिजित नामक मुहूर्त शुभकार्यारम्भ में वर्जित माना गया है।
व्रतोत्सव: आज प्रदोष व्रत तथा आखिरी चाहर शम्बा (मु.) है। चन्द्रमा: चन्द्रमा रात्रि २.३० तक कन्या राशि में, इसके बाद तुला राशि में रहेगा।
दिशाशूल: बुधवार को उत्तर दिशा की यात्रा में दिशाशूल है। चन्द्र स्थिति के अनुसार आज दक्षिण दिशा की यात्रा लाभदायक व शुभप्रद है। राहुकाल: दोपहर १२.०० से दोपहर बाद १.३० बजे तक राहुकाल वेला में शुभकार्यारंभ यथासंभव वर्जित रखना हितकर है।
आज जन्म लेने वाले बच्चे
आज जन्म लेने वाले बच्चों के नाम (ठ, पे, पो, र, री) आदि अक्षरों पर रखे जा सकते हैं। रात्रि २.३० तक जन्मे जातकों की जन्म राशि कन्या व इसके बाद जन्मे जातकों की तुला है। जन्म रजत पाद से हुआ है। सामान्यत: ये जातक सदाचारी, सुन्दर, ऐश्वर्यवान, कामलोलुप, ज्ञानी, धर्मपरायण, पर अत्यन्त दुस्साहसी होते हैं। इनके कार्य व्यवसाय अच्छे होते हैं। पर असद् कार्य करने में हिचकते नहीं हैं। भाग्योदय लगभग ३०-३२ वर्ष तक। कन्या राशि वाले जातकों को आज अपने कार्यों में सतर्कता बरतनी चाहिए। लापरवाही से हानि हो सकती है। किसी प्रकार का धोखा भी संभव है।
Published on:
15 Nov 2017, 9:48 AM IST
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