
IPS अफसर और आरक्षक के बीच हुई विवादित बातचीत का ऑडियो वायरल होने से मची खलबली
होशंगाबाद। एक व्यापारी से मामला रफादफा करने के मामले में जांच के दायरे में आए खाद्य विभाग के एक अफसर अपने ही बयान में उलझ गए हैं। एसडीएम ने जिला खाद्य अधिकारी शिवराज पावक को नोटिस जारी कर बयान देने तलब किया था। शनिवार को उन्होंने अपना लिखित बयान पेश किया, जिसमें खुद को छापामार कार्रवाई के दौरान कोरोना संक्रमण के संदेह में होम क्वारंटीन होना बताया। अब कलेक्टर धनंजय सिंह ने इस बयान की अलग से पड़ताल करने के निर्देश दिए हैं। एसडीएम से कहा है कि वे पता लगाएं, पावक किसके कहने पर और किस डाक्टर की रिपोर्ट पर होम क्वारंटीन हुए थे, जिसकी खबर प्रशासन तक को नहीं है।
कलेक्टर का नाम लेकर की थी पांच लाख की मांग
ज्ञात रहे कि पिछले दिनों खाद्य अधिकारी लीना नायक ने मोहित बडानी की दुकान पर छापामार कार्रवाई की थी, लेकिन लिखित कार्रवाई नहीं की। इसके बाद खाद्य विभाग के अफसरों की तरफ से अन्य व्यापारी भीम मुन्यार ने संपर्क कर मामला रफादफा करने के लिए पांच लाख की मांग की। इतनी बड़ी रकम कलेक्टर का नाम लेकर मांगी जा रही थी, जिसका आडियो वायरल होने पर खुद कलेक्टर धनंजय सिंह ने जांच के आदेश दिए। उसके बाद नोटिस जारी होने पर पिछले सात दिन से खाद्य अधिकारी और भीम बयान देने के लिए एसडीएम कार्यालय हाजिर नहीं हुए।
कलेक्टर ने बयान की सत्यता पता लगाने के दिए निर्देश
एसडीएम आदित्य रिछारिया ने बताया कि अभी खाद्य निरीक्षक शिवराज पावक ने अपने बयान प्रस्तुत किए हैं। जिसमें कहा गया है कि वो इस कार्रवाई के दौरान होम क्वारंटीन थे। इस कारण उन्हें नहीं पता कि किसने और किससे क्या बात की। उनके बयान के बारे में पता लगने पर कलेक्टर ने उनके बयान की सत्यता पता लगाने के निर्देश दिए हैं। दरअसल कोरोना जैसे मामले में जहां प्रशासन एक-एक संदिग्ध की जानकारी रख रहा था, उसे खुद ही नहीं पता चला कि खाद्य अधिकारी भी संदिग्ध हैं और होम क्वारंटीन चल रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि खुद को बचाने के कारण पावक ने ऐसा बयान दिया होगा, जिस कारण वे एक नई जांच के दायरे में आ गए हैं।
Published on:
07 Jun 2020 07:45 am
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