
Devshayani Ekadashi: आज से चार माह के लिए भगवान विष्णु करेंगे विश्राम
होशंगाबाद/देवशयनी एकादशी के साथ आज से भगवान विष्णु का चार मास का शयनकाल प्रारंभ हो जाएगा। इसे हरिशयनी एकादशी भी कहते हैं। इस दिन से चातुर्मास प्रारंभ हो जाएगा। इस दिन से देव सो जाएंगे। इसके बाद चार माह के लिए सभी मांगलिक कार्य और शुभ कार्य बंद हो जाएंगे। पंडित शुभम दुबे ने बताया कि चातुर्मास आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि से प्रारंभ होता है। चातुर्मास के चार महीनों में व्रत, भक्ति, ध्यान, साधना, पूजन आदि से शुभ फल मिलता है। नियमों का पालन करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। चातुर्मास के चार महीनों में भगवान विष्णु शायनकाल पर चले जाते और भगवान सृृष्टि का संचालन करते हैं। सनातन धर्म के अनुसार, भक्ति, ध्यान, साधना और व्रत के चार माह श्रावण, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक को चातुर्मास के नाम से जाना जाता है। पंडित दुबे के अनुसार यह चार माह भगवान विष्णु एवं भगवान शिव के भक्तों के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इन चार महीनों में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण श्रावण मास माना गया है क्योंकि यह महीना भगवान शिव को समर्पित है और इस महीने में भगवान शिव की पूजा-आराधना श्रद्धा भाव से की जाती है। धर्मशास्त्र के अनुसार, चातुर्मास की शुरुआत आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि से होती और इसका समापन कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी तिथि पर होता है।
चातुर्मास का महत्व
चातुर्मास का समय साधु, संतों और भक्तों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार चातुर्मास के चार महीनों में हवन, ध्यान, व्रत एवं पूजन किया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु शायन के लिए पाताल लोक में चले जाते और संसार की पूरी जिम्मेदारी भगवान शिव उठाते हैं। इसलिए चातुर्मास के पहले महीने में भगवान शिव की पूजा-आराधना करना लाभदायक माना जाता है। पद्मपुराण के अनुसार जो मनुष्य चातुर्मास में सभी नियमों का पालन करता और संयम बरतता है, उसे पुण्य फ ल की प्राप्ति होती है।
Published on:
20 Jul 2021 12:12 am
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