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हर साल 3 हजार ico friendly गणेश बना रहीं आफरोज, 10 साल से चल रहा सिलसिला, पढ़ें पूरी खबर

सामाजिक सौहाद्र्र की मिसाल, संस्था में बिठाती हैं गजानन, हर साल बनाती हैं करीब तीन हजार प्रतिमाएं

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हर साल 3 हजार ico friendly गणेश बना रहीं आफरोज, 10 साल से चल रहा सिलसिला, पढ़ें पूरी खबर

पूनम सोनी/होशंगाबाद. भविष्य निशक्त विद्यालय की आफरोज खान सामाजिक सौहार्द की मिसाल हैं। वे पिछले 10 साल से ना केवल गणेश प्रतिमाएं बना रही हैं बल्कि उन्हें अपनी संस्था में विराजमान भी करती हैं। गणेश उत्सव के लिए प्रसाद भी तैयार करती है। इस साल भी अफरोज में 3000 ईको फ्रैंडली गणेश प्रतिमाएं बनाई हैं। अफरोज का कहना है जाति धर्म कुछ नहीं होता। सभी धर्म और भगवान एक हैं, केवल उनके नाम बदल दिए गए है। आफरोज सर्वधर्म को मानने वाली है। उनका कहना है कि मैं जिन बच्चों के साथ रहती हूं, वे सभी धर्म के हैं। उन्हे धर्म का ज्ञान नहीं है, जब ये नासमझ बच्चे सभी धर्म को मान सकते हैं तो हम क्यूं नहीं। इससे सामाजिक समरसता को भी बढ़ावा मिलता है। यहां हर साल करीब 3 हजार प्रतिमाएं तैयार की जाती हैं। इन प्रतिमाओं की खासियत यह कि इनको पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए औषधि बीज, हर्बल कलर, अनाज के दाने, जलेवी, इमरती, मैदा व मिठाई के रंग का उपयोग कर बनाया जाता है।

निशक्त बच्चों को माना अपनी संतान : वे भविष्य निशक्त विद्यालय के बच्चों की देखरेख कर उन्हे शिक्षित कर रही हैं। संस्था के करीब 50 बच्चों को अपनी संतान मानकर पाल रही हैं। उन्होंने बताया कि संस्था में गणेशजी के विराजमान कर उत्सव मनाया जाता है। आफरोज ही भोग तैयार करती हैं।

प्रतिमाओं की प्रदर्शनी की तैयारी
गणेश चतुर्थी के लिए प्रतिमाएं बनकर तैयार हैं। इनको लोगों तक पहुंचाने के लिए भविष्य निशक्त संस्था के सदस्यों द्वारा प्रदर्शनी लगाई जाएगी। प्रदर्शनी विवेकानंद घाट, बीआइपी रोड, कोठी बाजार, भविष्य निशक्त स्कूल में 12 से 13 सितंबर तक लगाई जाएगी। इन प्रतिमाओं की खासियत यह कि इनको पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए औषधि बीज, हर्बल कलर, अनाज के दाने, जलेवी, इमरती, मैदा व मिठाई के रंग का उपयोग कर बनाया जाता है। जो पर्यावरण को दूषित होने से बचाने के साथ साथ उन्हे विसर्जित करने पर मछलीयों का आहार बनते हैं।