
non-payment of funding and repair
इटारसी. एक ओर केंद्र सरकार सरकारी स्कूलों में नई शिक्षा नीति लागू करने की तैयारी में है, तो दूसरी तरफ राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग की अनदेखी से शहरी और ग्रामीण सरकारी स्कूल भवन जर्जर हो चुके हंै। इटारसी शहर के ही अधिकतर स्कूल भवन जर्जर हो चुके हैं। बारिश से पहले जर्जर भवनों की मरम्मत और पोताई कराने के निर्देश स्कूल शिक्षा विभाग ने दे तो दिए, लेकिन इन्हें फंड नहीं दिया। ऐसे में शिक्षक पशोपेश में है कि कैसे कराए पोताई और मेंन्टनेंस?
शहर में सरकारी स्कूल एक जुलाई से बच्चों की संख्या बढऩे के साथ ही नियमित रूप से लगेंगे। इसके साथ ही बारिश भी शुरू हो जाएगी। ऐसे में बच्चों को जर्जर और बदहाल स्कूल भवनों में रिसते दीवारों के बीच गीली जमीन पर पढऩे को मजबूर होना पड़ेगा।
विधिवत पढ़ाई एक जुलाई से
शिक्षा विभाग के कैलेंडर के अनुसार नया शिक्षा सत्र यूं तो 24 जून से प्रारंभ हो चुका है, लेकिन सरकारी स्कूलों में सोमवार से विधिवत पढ़ाई शुरू होगी। इस बार शिक्षा विभाग ने स्कूल प्रबंधन को अभी तक पोताई और मेंटनेंस कर्य के लिए फंड नहीं दिया है। इस वजह से अभी तक स्कूल भवनों की पोताई और मेंटनेंस वर्क नहीं हो पा पाया है। स्कूल प्रबंधन का कहना हैकि किसी भी शाला में उक्त कार्य के लिए न्यूनतम लगभग 5 हजार रुपए के फंड चाहिए, लेकिन विभाग ने कोई राशि नहीं दी गई। ऐसे में बारिश में इन भवनों में बच्चे कैसे बैठकर पढ़ सकेंगे? इसका अंदाजा लगा सकते हैं।
इटारसी शहर में दो संकुल
शहर में दो सकुंल कन्या शाला नई इटारसी और बॉयज स्कूल पुरानी इटारसी है। कन्या शाला संकुल के अंतर्गत 03 हायर/ हाई सेकेेड्री, 03 मिडिल और 08 प्राइमरी शाला है, वही बालक शाला पुरानी इटारसी के तहत 01 हासे, 2 हाईस्कूल, 6 मीडिल और 15 प्राइमरी आते हैं। ये सभी शालाएं लगभग 2 से 3 दशक से अधिक पुरानी है। पीडब्लयूडी के अनुसार किसी भी भवन की आयु 30 साल होती है। उसके बाद तोड़कर पुनर्निमाण किया जाना चाहिए। इस हिसाब से इटारसी शहर में आधा दर्जन स्कूल भवन ऐसे हैं, जिसे तोड़कर दोबारा नया भवन बनाना होगा। पर स्कूल शिक्षा विभाग को इसकी कोई फ्रिक नहीं है।
हर साल कराए पोताई व मरम्मत, पर नहीं मिली राशि
स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को अप्रैल या जून अंत से पहले पोताई- मरम्मत करने के निर्देश दे तो दे देती, लेकिन फंड नहीं दी है। इस वजह से स्कूल प्रबंधन भी पोताई- रिपेयरिंग नहीं करा पा रहा है। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि कोई बड़ी रिपेयङ्क्षरग वर्क हो, तो वह विभाग पीडबल्यूडी से कराता है। लेकिन छोटे मरम्मत कार्य स्कूल को मिलने वाली मेंटनेंस राशि से करा लेते हैं। पिछले साल स्कूलों को 2 से 5 हजार रुपए मिले थे, जिससे पोताई व मरम्मत वर्क नहीं हो सकता। चूंकि सरकारी स्कूलों में बच्चों से विकास शुल्क नहीं लिया जा सकता है। ऐसे में शाला प्रबंधन उक्त काम के लिए विभाग पर ही निर्भर रहता है।
ये शाला भवन है जर्जर
शहर में आदर्श स्कूल देशबंधुपुरा, लक्ष्मीनारायण ज्योतराज, गांधी प्राशा, सिंधी कन्या शाला, मालवीय गंज प्राशा, स्टेशनगंज, पीपल मोहल्ला, ओवरब्रिज के नीचे समेत शाला भवन जर्जर हो चुके हैं, फिर भी बच्चे पढऩे को मजबूर है।
सरकारी स्कूल भवन पुराने है। इसलिए इनकी बार- बार पुतार्ई व मेंटनेंस के लिए फंड की जरूरत है। स्कूल शिक्षा विभाग से फंड नहीं मिला है, फिर भी हमने अपने खर्चे से मेरे संकुल के कुछ शालाओं में सिर्फ पुताई ही करवा पाए हैं। रिपेयङ्क्षरग नहीं होने से बारिश में कमरों में पानी का रिसाव होगा। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो जाएगी। हमने स्थिति से वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत करा दिया है।
- अखिलेश शर्मा, संकुल प्राचार्य, कन्या शाला इटारसी
Published on:
30 Jun 2019 11:41 pm
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