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चमत्कार…इस कुंड में सूर्य देव ने की थी कठोर तपस्या, इसमें स्नान करने से दूर होते है रोग, जानिए क्या है इसका रहस्य

दक्षिण में बहने वाली नर्मदा नदी इस कुंड में उत्तर की और बहने लगती हैं

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suraj kund

चमत्कार...इस कुंड में सूर्य देव ने की थी कठोर तपस्या, इसमें स्नान करने से दूर होते है रोग, जानिए क्या है इसका रहस्य

देवेंद्र अवधिया/होशंगाबाद. वैसे तो नर्मदा के सभी तट और घाट पवित्र और पुण्यदायी हैं। इसके हर कंकर को शिवशंकर के रूप में पूजा जाता है। धार्मिक आस्था के साथ ही मां नर्मदा को मध्यप्रदेश की जीवनरेखा माना जाता है, क्योंकि जिले की समृद्धि और खुशहाली इसी के जल से है। लेकिन इस नदी में एक कुंड एेसा भी है, जहां स्नान करने से चर्म रोग दूर हो जाते हैं। यह स्थान है होशंगाबाद से 25 किमी दूर बाबई ब्लॉक के गुढ़ला ग्राम में। जिसे सूरजकुंड कहते हैं। इस कुंड को पर्यटन केंद्र के रूप में पक्के घाट के रूप में विकसित किया गया है।
इस दिन नहाने से मिलती है चर्मरोग से मुक्त
सूरजकुंड के बारे में कहा जाता है कि यहां पौष माह के चार रविवार स्नान और पूजन करने से पुराने से पुराने चर्मरोग से मुक्ति मिल जाती है। यहां हजारों-लाखों लोग पूर्णिमा, अमावस्या, नर्मदा जयंती, महाशिवरात्रि सहित अन्य बड़े पर्वों पर स्नान व पूजन-अर्चन और भंडारे करते हैं।
सूरजकुंड घाट पर हैं स्नान की सुविधाएं
पर्यटन विभाग ने सूरजकुंड को पर्यटन स्थल के रूप में भी विकसित किया है। यहां पक्का घाट बनाया गया है। घाट पर महिलाओं को वस्त्र बदलने के लिए चेंजिंग रूम बनाए गए हैं। लाइट और सफाई का विशेष इंतजाम है। नर्मदा के दोनों पार कुंड कहलाता है। सुबह से शाम तक यहां हर-हर नर्मदे और हर-हर महादेव के स्वर सुनाई देते हैं।
रविवार के दिन यहां स्नान है खास महत्व
रविवार का दिन कुंड का महत्वपूर्ण दिन होता है। हर रविवार यहां प्रदेश भर से लोग और चर्मरोगी स्नान के लिए आते हैं। इस दिन भक्तों का मेला लगता है। भंडारे और दानपुण्य किए जाते हैं।कुंड पर सूर्यदेव ने की थी तपस्या नर्मदासेवी पंडित अखिलेश गुरू बताते हैं कि सूरजकुंड का अपना ही अलग महत्व है। विशेष रूप से इस कुंड को चर्म रोग निवारण का स्नान केंद्र कहा जाता है। इस कुंड का नर्मदा पुराण में भी उल्लेख है। यहां भगवान सूर्यदेव ने मां नर्मदा की कठोर तपस्या की थी। इसलिए इसका नाम सूरजकुंड पड़ा है। सूरजकुंड में दक्षिणी दिशा में प्रवाहित मां नर्मदा उत्तर में बहती हैं। इस वजह से सूर्य की किरणें सीधे कुंड पर पड़ती है।