
विलुप्त हो रहे यह गिद्ध दिखे सतपुड़ा के जंगल में, वन महकमा हतप्रभ
राहुल शरण इटारसी. कई सालों पहले से चमर प्रजाति के गिद्ध विलुप्त होने की श्रेणी में आ चुके हैं। इन गिद्धों का झुंड पिछले कई सालों से होशंगाबाद जिले से गायब था। खुद वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने इस विलुप्त हो रही प्रजाति के गिद्ध को बरसों से नहीं देखा मगर होशंगाबाद जिले में इनका नजर आना वन विभाग अच्छे संकेत मान रहा है। चमर गिद्धों का नजर आना उनकी बढ़ती संख्या की ओर इशारा कर रहा है।
कभी अफ्रिकन गिद्ध का रहा करीबी
भारत में मिलने वाली आधा दर्जन से ज्यादा प्रजातियों में से यह एक है। इसे यूरोपीय ग्रिफऩ गिद्ध का संबंधी बताते हैं। एक समय यह अफ्रीका के सफेद पीठ वाले गिद्ध का ज्यादा करीबी समझा जाता था। 1990 के दशक तक यह पूरे दक्षिणी तथा दक्षिण पूर्वी एशिया में बड़ी तादाद में दिखता था। 1992 से 2007 तक इनकी संख्या में 99 फीसदी तक घट गई थी जिससे ये बहुत ही कम नजर आते थे मगर संरक्षण के बाद से अब उनकी संख्या बढऩे लगी है।
सुखतवा जंगल में दिखी प्रजाति
भारत में विलुप्तता की कगार पर पहुंचने वाले इस चमर गिद्ध को बंगाल का गिद्ध कहा जाता है। पिछले दिनों इस विलुप्त होती प्रजाति के गिद्ध केसला ब्लॉक में सुखतवा रेंज की मोरपानी बीट में नजर आए हैं। इन गिद्धों को वन विभाग के डीएफओ अजय पांडे ने खुद अपनी आंखों से देखा जो मृत मवेशियों को खा रहे थे। इस विलुप्त हो रही प्रजाति की होशंगाबाद जिले में मौजूदगी देख वे भी हतप्रभ रह गए।
एसटीआर की चट्टानों में ठिकाना
इस प्रजाति के चमर गिद्ध ऊंची चट्टानों में ठिकाना बनाते है। होशंगाबाद जिले में एसटीआर की ऊंची चट्टानों पर इनका ठिकाना हो सकता है। एसटीआर के अधीनस्थ आने वाले क्षेत्रों में इनका सरंक्षण भी हो रहा है और इनकी संख्या में तेजी से वृद्धि भी हो रही है।
&यह प्रजाति विलुप्त होने की कगार पर आ गई थी जिसका संरक्षण हो रहा है। देश के कुछ प्रांतों में ही यह प्रजाति मिलती है। होशंगाबाद जिले में इनकी मौजूदगी बहुत अच्छे संकेत हैं। इनको सुखतवा रेंज में देखकर हम खुद भी हतप्रभ रह गए थे।
अजय कुमार पांडे, डीएफओ होशंगाबाद
Published on:
18 Apr 2020 10:01 pm
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