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पहाड़िया का सौंदर्य और शैलचित्र देखने करना पड़ेगा ऑनलाइन पेमेंट

कोरोना संक्रमण के बाद डिजिटल हुआ पहाडिय़ा, यहां हर साल देशभर से आते हैं पर्यटक

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होशंगाबाद. देशभर में शैलचित्रों के लिए मशहूर होशंगाबाद आदमगढ़ की पहाडिय़ों का सौंदर्य देखने आने वाले पर्यटकों को अब ऑनलाइन भुगतान करना होगा। ऑनलाइन भुगतान के जरिए ही पर्यटकों को टिकट जारी किया जाएगा। कोरोना संक्रमण के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने टिकट जारी करने का डिजिटलीकरण कर दिया है।

उल्लेखनीय है कि आदमगढ़ की पहाडिय़ों में बनें शैलचित्रों को देखने हर साल हजारों पर्यटक देशभर से आते हैं। यहां आदिमानवों के बनाए पाषाण उपकरण भी पहले खुदाई के दौरान मिल चुके हैं। पहाडिय़ा के केयर टेकर संजय कुमार ने बताया कि यहां आने वाले पर्यटकों को अब डिजिटल तरीके से भुगतान करके टिकट लेना होगा। कैश काउंटर पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं।

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यह आ रही परेशानी
यहां आने वाले पर्यटकों के पास ऑनलाइन भुगतान की सुविधा नहीं होने पर वे मायूस हो रहे हैं। ज्यादातर लोग अपने परिचितों को बारकोड भेजकर भुगतान करवा रहे हैं और टिकट लेकर भ्रमण कर रहे हैं। यहां सुरक्षा के लिए चार पाइंट पर सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं।

प्राकृतिक रंगों से बनाए गए हैं ये चित्र
होशंगाबाद की आदमगढ़ पहाड़ी लगभग 4 किमी क्षेत्र में फैले हैं। इनमें बने शैलाश्रयों में पशु जैसे वृषभ, गज, अश्व, सिंह, गाय, जिराफ, हिरण आदि योद्धा, मानवकृतियां, नर्तक, वादकों के चित्र नजर आते हैं। इन चित्रों को खनिज रंग जैसे हेमेटाइट, चूना, गेरू आदि में प्राकृतिक गोंद, पशु चर्बी के साथ पेड़ों के कोमल रेशों अथवा जानवरों के बालों से बनी कूची की सहायता से बनाए गए हैं।

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20 हजार साल पुराने शैलचित्र
इतिहासकारों के मुताबिक यहां मौजूद आदमगढ़ पहाड़ी पर शैलचित्र 20 हजार वर्ष पुराने हैं। प्रागैतिहासिक मनुष्य के रहने का पहला घर पहाडिय़ा रहा है। इन शैलचित्रों में मानव की दैनिक दिनचर्या जैसे शिकार, घुड़सवारी, नृत्य आदि से संबंधित चित्र मौजूद हैं। चित्रों के माध्यम से स्पष्ट है कि इस दौर में मनुष्य ने समूह में रहना शुरू कर दिया था।

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