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टीचर की डांट-फटकार के डर से स्कूल नहीं गया बेटा, घर से निकलता तो हो जाती मौत

उसने अपना होमवर्क नहीं किया था, लिहाज़ा उसे डर था कि स्कूल जाने पर उसे टीचर की डांट-फटकार का सामना करना पड़ेगा।

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नई दिल्ली। यूपी के कुशीनगर में हुए रेल और स्कूल वाहन की टक्कर में 13 बच्चों की मौत हो गई। पूरे हादसे में स्कूल वाहन के ड्राइवर की लापरवाही बताई जा रही है। मारे गए बच्चों में 3 बच्चे तो मिश्रौली गांव के रहने वाले अमरजीत कुशवाहा के थे। इससे भी ज़्यादा दुख की बात ये है कि अमरजीत की पत्नी किरण अब कभी मां भी नहीं बन सकती। अमरजीत का पूरा परिवार लगभग बर्बाद ही हो चुका है।

तो वहीं मैहिहरवा गांव के रहने वाले मैनुद्दीन के भी दो बच्चे इस हादसे में मारे गए। जबकि एक बच्चा स्कूल नहीं गया, वह घर पर ही था। क्योंकि उसने अपना होमवर्क नहीं किया था, लिहाज़ा उसे डर था कि स्कूल जाने पर उसे टीचर की डांट-फटकार का सामना करना पड़ेगा। मैनुद्दीन की पत्नी ने कहा कि उन्होंने इस हादसे में अपने दो बच्चों को खो दिया। लेकिन उनका एक बच्चा होमवर्क न करने की वजह से बच गया, नहीं तो उनका पूरा घर उजड़ जाता।

मैनुद्दीन अभी फिलहाल देश से बाहर खाड़ी देश में नौकरी करते हैं। इनके अलावा हसन नाम के शख्स की भी दो बच्चियां इस हादसे में मारी गईं। जबकि 13 साल का बड़ा बेटा बच गया। वह साइकिल से स्कूल गया था। दोनों बेटियों को खोने के बाद हसन के घर में मातम पसरा हुआ है। जिन घरों की सुबह-शाम हो-हुल्ला से भरी रहती थी, अब वहां विरानी छाई हुई है।

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