बीस लाख साल पुरानी झील में इंसानी राज़ छिपे हैं इंसानों से जुड़े कई राज
नई दिल्ली। दुनिया में इंसानों की एक ही प्रजाति है, 'होमो सैपिएंस' (homo sapiens)। लेकिन इंसान के बारे में समझ बहुत कम है। यहां तक की हमें अपने पुरखों के बारे में बहुत कम जानकारी है। माना जाता है कि आज से 20 लाख साल पहले धरती पर पहला इंसान पैदा हुआ था। इसके बाद से ही इंसानों ने सीखना समझना शुरू कर दिया था। धीरे-धीरे इंसान ने खूब तरक्की कर ली लेकिन खुद अपने पुरखों यानी आदि मानव के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं जुटा सके हैं। और जो जानकारी मिली भी उसे सही साबित करने में सालों लग गए।
साल 1984 में इंसानों को पुरखों की जानकारी का एक बड़ा खजाना मिल गया।ये खजाना था, अफ्रीकी देश केन्या की तुर्काना झील (Lake Turkana – Kenya) में। यहां आठ साल के एक बच्चे का करीब पंद्रह लाख साल पुराना कंकाल मिला था।ये दुनिया का पहला ऐसा कंकाल था जो संपूर्ण था। इसे वैज्ञानिकों ने 'तुर्काना ब्वॉय' या तुर्काना झील वाले लड़के का नाम दिया था। इसकी मदद से हम अपने विकास की कहानी को समझने में बहुत मदद मिली। इस झील से मदद से पता चला कि लाखों साल पहले के इंसान कैसे रहते थे, क्या खाते थे?
ये झील, ज्वालामुखी की गतिविधियों वाले इलाके में पड़ती है। धरती के भीतर की हलचल से, ऊपरी सतह बनती बिगड़ती रहती है। इस वजह से आदि मानवों के कंकाल, भीतरी परतों में छुपकर बचे रह गए। साल 1968 में केन्या के वैज्ञानिक रिचर्ड लीकी ने झील के आस-पास इंसान के कंकालों की खोज शुरू की थी।
केन्या की तुर्काना झील को आदि मानवों के इतिहास का खजाना कहा जाता है।तुर्काना झील इकलौती ऐसी जगह थी जहां इंसानों के कंकाल सुरक्षित रह गए। इसी वजह से उसकी अहमियत बढ़ गई। अगर वहां कंकाल सुरक्षित नहीं रहते, तो इंसानों को अपनी विकास गाथा समझने में अभी और वक्त लगना था। यही इस झील की सबसे बड़ी अहमियत है।
सालों पहले ये झील हरे-भरे इलाके में हुआ करती थी लेकिन अब ये बड़े रेगिस्तान के बीच पानी की बूंद जैसी है। वैज्ञानिक कहते हैं कि बीस लाख साल पहले, ये झील बहुत बड़ी थी। तब से इसके आस-पास का माहौल बहुत बदल गया है। हरियाली रेगिस्तान में तब्दील हो चुकी है। झील का दायरा भी बहुत सिमट गया है। मगर, लाखों साल पहले, ये आदि मानव के रहने का आदर्श ठिकाना था। यहां हरियाली थी, खाना आसानी से मिल जाता था और इंसानों को दुश्मनों से छुपने की जगह भी मिल जाती थी।