
30 साल की उम्र में हुई इस घटना ने बदल दिया था बाबा आमटे का जीवन, गूगल ने डूडल बनाकर दी श्रद्धांजलि
नई दिल्ली: देश आज बाबा आमटे की 104वीं जयंती मना रहा है। इस मौके पर गूगल ने डूडल बनाकर उन्हें श्रद्धांजलि भी दी है। इसमें स्लाइड शो के जरिये बाबा आमटे के जीवन दर्शन और कुष्ठरोगियों व जरूरतमंदों की उनकी सेवा को दर्शाया गया है।
सबकुछ छोड़ जरुरतमंदों की भलाई में लग गए आमटे
बाबा आमटे का जन्म 26 दिसंबर, 1914 को महाराष्ट्र के एक संपन्न परिवार में हुआ था। उनका पूरा नाम मुरलीधर देवीदास आमटे था, लेकिन लोग उन्हें प्यार से बाबा आमटे बुलाते थे। उन्होंने लॉ की पढ़ाई की और खुद की एक फर्म भी खोली। इसके बावजूद 30 की उम्र के बाद सबकुछ छोड़ वो जरुरतमंदों की भलाई में लग गए। वह समाज में व्याप्त असमानता को दूर करना चाहते थे। उनका जीवन उस वक्त पूरी तरह बदल गया, जब उन्होंने एक कुष्ठरोगी और निरंतर बढ़ती उसकी बीमारी को देखा। इस घटना ने उन्हें जरूरतमंदों की मदद के लिए प्रेरित किया। 35 साल की उम्र में उन्होंने कुष्ठ रोगियों की सेवा के लिए आनंदवन नामक संस्था की स्थापना की। उन्होंने गरीबों और बेसहारा लोगों को भी मदद मुहैया कराई।
कुष्ठरोगियों के लिए समर्पित कर दिया जीवन
समाजसेवी बाबा आमटे का नाम भी उन्हीं लोगों में शुमार है, जिन्होंने अपना पूरा जीवन कुष्ठरोगियों और जरूरतमंदों की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। वह बचपन से ही वह समाज में लोगों के बीच व्याप्त असमानता से परिचित थे।
पद्मश्री से किया गया सम्मानित
1985 में भारत यात्रा शुरू की और 72 साल की उम्र में कन्याकुमारी से कश्मीर तक का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने 3000 मील से अधिक दूरी की यात्रा की। इस दौरान लोगों को राष्ट्रीय एकजुटता के लिए प्रेरित किया। वर्ष 1971 मे उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया। 1988 में मानवाधिकारों के क्षेत्र में उन्हें संयुक्त राष्ट्र के पुरस्कार से नवाजा गया तो 1999 में उन्हें गांधी शांति पुरस्कार भी दिया गया।
Updated on:
26 Dec 2018, 11:58 AM IST
Published on:
26 Dec 2018, 11:58 AM IST
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