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सदी का पहला तूफान Mumbai से टकराने को तैयार! जानें कितना खतरनाक होगा Cyclone ‘निसर्ग’

मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले 12 घंटों के दौरान निसर्ग मुंबई में विकराल रूप ले सकता है। इतिहास में मुंबई शहर ने कभी चक्रवात (Cyclone in Mumbai) नहीं झेला है। शहर ने 2015, 2017 और 2019 में भारी बारिश के बाद बाढ़ का (Mumbai rains forecast) सामना किया है। लेकिन यह किसी चक्रवात की वजह से नहीं था।

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Vivhav Shukla

Jun 02, 2020

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नई दिल्ली। मुंबई शहर पर निसर्ग चक्रवाती तूफान (Cyclone ) का खतरा मंडरा रहा है। तूफान की वजह से भारी बारिश और तूफानी हवाएं चलने का अनुमान है। NDRF, नेवी समेत तमाम रेस्क्यू एजेंसियां मुस्तैद हैं। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले 12 घंटों के दौरान निसर्ग विकराल रूप ले सकता है। रेड अलर्ट जारी किया गया है। आधुनिक इतिहास में मुंबई शहर ने कभी चक्रवात (Cyclone in Mumbai) नहीं झेला है। शहर ने 2015, 2017 और 2019 में भारी बारिश के बाद बाढ़ का (Mumbai rains forecast) सामना किया है। लेकिन यह किसी चक्रवात की वजह से नहीं था।

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने बताया निसर्ग 3 जून को महाराष्ट्र और गुजरात के तट से टकरा सकता है।इस दौरान 100-125 किलोमीटर प्रतिघंटे की की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। कुछ इलाकों में भारी और अत्यधिक भारी वर्षा की चेतावनी दी गई है। हालांकि, यह एम्फन से कम खतरनाक होगा।

बताया जाता है कि आखिरी बार साइकलोन मुंबई शहर में 6 जून, 1882 को आया था। इसे बॉम्बे साइक्लोन या फिर ग्रेट बॉम्बे साइक्लोन के नाम से बुलाया जाता है। दावा किया जाता है कि इस साइक्लोन में करीब एक लाख लोगों की जान गई थी। लेकिन साल 2019 में अमेरिका की कॉलम्बिया यूनिवर्सिटी, मेसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और पुणे बेस्ड इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेट्रोलॉजी ने अपनी जांच में पाया था कि 1882 का साइक्लोन केवल एक छल था।

इतना ही नहीं एचटी ने एक रिसर्च पेपर के हवाले से लिखा है कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पास 1877 से 1883 तक आए सभी साइक्लोन के मैप उपलब्ध हैं। यह मैप दिखात हैं कि 1882 में अरब सागर से कोई चक्रवात तूफान नहीं उठा था।

ऐसे में अगर निसर्ग मुंबई में आता है तो ये शहर के इतिहास का पहला चक्रवाती तूफान होगा। तूफान आने के पहले शहर में अलर्ट जारी कर दिया गया है। सभी मछुआरे अपनी नावों को लेकर वापस किनारों पर लौट रहे हैं।मछुआरे ने कहा कि हम एक दूसरे को जागरुक कर रहे हैं। अभी तो कुछ नहीं लग रहा है पर अगर यहां से तूफान गुजरेगा तो थोड़ा-बहुत झटका तो लगेगा ही।

बता दें निसर्ग तूफान के मद्देनजर तटीय पालघर और रायगढ़ जिलों में स्थित रासायनिक और परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त एहतियात बरती जा रही है। साथ ही सरकार ने NDRF की दस इकाइयों को संवेदनशील जिलों में तैनात गया है, जबकि छह अन्य को तैयार रहने को कहा गया है।