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सूरज को छूने के लिए उठाया जा रहा है आज तक का सबसे बड़ा कदम, इस अहम चीज के यहां होने की संभावना

इस खोजी अभियान का नाम भौतिक विज्ञानी 'एगुजीन पार्कर' के नाम पर रखा गया है। पार्कर ने पहली बार 1958 में सौर वात यानी सूर्य पर हवा के अस्तित्व की संभावना जताई थी।
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Priya Singh

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Updated: 11 Aug 2018, 1:56 PM IST

nasa epic mission to touch sun

सूरज को छूने के लिए उठाया जा रहा है आज तक का सबसे बड़ा कदम, इस अहम चीज के यहां होने की संभावना

नई दिल्ली। नासा का अंतरिक्ष यान सूर्य को स्पर्श करने के इरादे से शनिवार सुबह तड़के 3.33 बजे (भारतीय समयानुसार दोहपर एक बजे) फ्लोरिडा स्थित केप केनावेरल वायु सेना के अड्डे से कूच करेगा। छोटी कार के आकार के इस खोजी अंतरिक्षयान को सूर्य को छूने के लिए रवाना किया जाएगा। सूर्य के प्रचंड तापमान वाले वातावरण को टटोलने और इस तारे तक मानवों के पहले मिशन के उद्देश्य से डेढ अरब डॉलर के नासा के अंतरिक्षयान के प्रक्षेपण की आज उल्टी गिनती शुरू हुई। कार के आकार का अंतरिक्षयान ‘पारकर सोलर प्रोब’ शनिवार तड़के फ्लोरिडा के केप केनवरल से डेल्टा 4 हैवी राकेट के साथ प्रक्षेपित किया जाना है। नासा ने कहा कि प्रक्षेपण स्थानीय समयानुसार सुबह तीन बजकर 33 मिनट पर शुरू होगा और मौसम पूर्वानुमान 70 प्रतिशत प्रक्षेपण के पक्ष में है। इस खोजी अभियान का नाम भौतिक विज्ञानी 'एगुजीन पार्कर' के नाम पर रखा गया है। पार्कर ने पहली बार 1958 में सौर वात यानी सूर्य पर हवा के अस्तित्व की संभावना जताई थी।

जानकारी के लिए बता दें कि, सौर वात आवेशित कणों और चुंबकीय क्षेत्रों की धारा है जो सूर्य से लगातार प्रवाहित होती रहती है। इस यान का मुख्य लक्ष्य सूर्य की सतह के आसपास के असामान्य वातावरण के गूढ रहस्यों का पता लगाना है। सूर्य की सतह के ऊपर का क्षेत्र (कोरोना) का तापमान सूर्य की सतह के तापमान से करीब 300 गुना ज्यादा है। नासा ने गुरुवार को ही एक ट्वीट में कहा, "लांच टीम तकनीक मसलों पर काम कर रही है और 70 फीसदी संभावना है कि मौसम अनुकूल रहेगा।" जैसा की आप जानते हैं, सूर्य और पृथ्वी के बीच औसत दूरी 93 मिलियन मील है। इस यान की नवंबर में सूर्य तक पहुंचने की उम्मीद है। वीनस गुरुत्वाकर्षण को मजबूती देते हुए, पार्कर सात साल से सात फ्लाई-बाय पूरा कर देगा ताकि धीरे-धीरे अपनी कक्षा को स्टार के करीब लाया जा सके। अपने निकटतम दृष्टिकोण पर, जांच लगभग 430,000 मील प्रति घंटे की यात्रा होगी।