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राजस्थान का एक ऐसा मंदिर जहां हिंदू-मुस्लिम दोनों आते हैं शीश नवाने

इस मंदिर में हिंदू-मुस्लिम सभी करते हैं पूजा एक सितंबर से यहां हर साल शुरू होता है मेला मंदिर में दर्शन से पूरी होती हैं सभी मनोकामनाएं

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Shiwani Singh

Sep 01, 2019

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नई दिल्ली। आपने मंदिरों में सिर्फ हिंदूओं को ही पूजा करते देखा होगा। अन्य धर्म के लोग मंदिर घूमने आते हैं लेकिन वे मंदिर को एक ऐतिहासित स्थल की तरह देखते हैं और चले जाते हैं। लेकिन राजस्थान में एक ऐसा मंदिर हैं जहां हिंदू-मुस्लिम दोनों धर्मों के लोग शीश नवाने आते हैं। बता दें कि इस मंदिर का नाम है बाबा रामदेव मंदिर।

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बाबा रामदेव ने जाति, धर्म, सम्प्रदाय, ऊंच नीच, अमीरी-गरीबी का भेद मिटाकर सबको मानवता, भाईचारे और समानता का संदेश दिया था। इसीलिए उस महापुरुष को लाखों हिन्दू बाबा रामदेव और मुसलमान बाबा रामसा पीर के नाम से पूजते हैं।

राजस्थान के जैसलमेर में स्थित इस मंदिर में हर साल एक सितंबर से मेले का आयोजन होता है। आज से ये मेला शुरू हो गया है। मेले को लेकर बाबा रामदेव की समाधि समिति की ओर से सभी व्यवस्थाएं पूर्ण कर ली गई हैं। आज अभिषेक और ध्वजारोहण के साथ बाबा रामदेव का 635वां अंतरप्रांतीय मेला शुरू हो गया। मेले के लिए मंदिर को अलसुबह 3 बजे खोला गया है, जो देर रात 12 बजे तक खुला रहेगा।

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दर्शन करने से पूरी होती हैं सभी मनोकामनाएं

ऐसी मान्यताएं है कि जो भी बाबा की समाधि के दर्शन करता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। बाबा सभी की मनोवांछित फल देते हैं। यही कारण है कि यहां दर्शन करने वालों की संख्यां दिन प्रति दिन बढ़ रही है।