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ये कहानी है एक ऐसे तोप की जिसने एक ही गोले में बना दिया था तालाब

इस तोप के बारे में आपको भी जानना चाहिए जिसे आजतक बाहर ही नहीं ले जाया गया।

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नई दिल्ली। भारत में लड़ाइयों में सदियों से तोपों का उपयोग किया जाता रहा है। ये तोप इतने खतरनाक और मजबूत होते हैं कि ये किसी भी चीज को तबाह कर सकते हैं। राजा-महाराजाओं से लेकर आज भी इन तोपों को लड़ाई में जरूर इस्तेमाल किया जाता है। इन तोपों में बारूदी गोला भरकर हमला किया जाता है। जो मजबूत से मजबूत दीवालों को सेनाओं को खत्म या नष्ट करने की क्षमता रखते हैं। इन तोपों के महत्व इसी से पता चलता है कि आज भी इनको लड़ाई में इस्तेमाल किया जाता है।

माना जाता है कि बाबर ने पहली पानीपत की लड़ाई में तोप का इस्तेमाल किया था। भारत में एक ऐसी तोप है जिसे विश्व की सबसे बड़ी तोपों में से एक कहा जाता है। माना जाता है कि ये इतनी खतरनाक है कि जिसने एक ही गोले में गहरा तालाब बना दिया था।
इस खतरनाक तोप का नाम जयबाण तोप है। जो आज भी राजस्थान के शहर जयपुर के जयगढ़ किले में है। इस तोप को आज भी दुनिया से लोग देखने आते हैं। ये इतनी बड़ी है कि इसे देखने के लिए लोग आज भी लंबी-लंबी कतारों में खड़े होते हैं। इस तोप को राजा जयसिंह ने बनवाया था। और माना है है कि 1720 ईसवी में इसे स्थापित किया गया था।

इतनी बड़ी तोप का निर्माण राजा जय सिंह ने अपनी प्रजा की सुरक्षा के लिए कराया था। ताकि उनकी प्रजा के ऊपर कोई भी खतरा न आए और उनकी रियासत भी सुरक्षित रहे। इतनी विशाल तोप को देख के लोग आज भी अचंभित रह जाते हैं।


ये तोप इतनी बड़ी थी कि इसे हमेसा किले के भीतर ही रखा गया है। इसे आजतक बाहर लेकर नहीं जाया गया है। खास बात तो ये है कि ये तोप लड़ाई से बचने के लिए राजा द्वारा बनवाई गयी थी। लेकिन आजतक इसका किसी भी लड़ाई में इस्तेमाल नहीं किया गया है। वहीं यदि इसके वजन की बात की जाए तो ये तोप लगभग 50 टन की मानी जाती है।

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आप इस बात से ही अंदाजा लगा सकते हैं कि ये तोप 50 टन का है। और इसमें जिन गोलों का उपयोग किया जाता है वे भी लगभग 50 किलों के होते थे। इसके बैरल की बात करें तो बैरल की लंबाई लगभग 6.15 मीटर है। इसी के साथ ही बैरल में दो कड़ियों को भी लगाया गया है। ताकि जरूरत पड़ने पर क्रेन से तोपों को उठाया जा सके।

तोप ने बना दिया था तालाब
इस तोप का उपयोग कभी लड़ाई में तो नहीं किया गया। लेकिन इस बात से ही आप जान सकते हैं कि एक ही परीक्षण में इस तोप को इस्तेमाल करके देखा गया था। माना जाता है कि वे लगभग 30 से 35 किलोमीटर दूर जाके गिरा था। जहां इतना बड़ा था कि उस जगह में तालाब बन गया। इस तालाब का उपलोग लोग आज भी करते हैं।

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