
Vat Savitri Vrat 2020
नई दिल्ली। वट सावित्री (Vat Savitri Vrat) का व्रत ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन सुहागिन महिलाओं के व्रत रखने से उनके पति की आयु लंबी होती है। जिस तरह से सावित्री ने अपने पति की प्राणों की रक्षा वट के पेड़ के नीचे की थी। इसी तरह वृक्ष पर कच्चा सूत लपेटकर परिक्रमा करने से सुहागिनों की मनोकामनाएं पूरी होती है। इस बार ये पर्व 22 मई यानी कल है। चूंकि इस बार कोरोना (Coronavirus Lockdown) के प्रकोप के चलते मंदिर (Temple) में पूजा करना संभव नहीं है। इसलिए आप घर पर ही कुछ खास उपयों के साथ पूजा कर सकती हैं।
1.वट को बरगद के पेड़ के नाम से भी जाना जाता है। वैसे तो वृक्ष की परिक्रमा करते हुए सात बार कच्चा सूत लपेटा जाता है। मगर लॉकडाउन के चलते आप बरगद के पेड़ की डाली को पूजा के स्थान पर रखकर घर पर पूजा कर सकती हैं।
2.जिन लोगों के पास वट वृक्ष की डाली उपलब्ध न हो वो तुलसी के पौधे पर भी धागा लपेट सकती हैं। इस दौरान सावित्री माता का ध्यान करते हुए उनसे पूजन में हुई भूल—चूक की क्षमा मांगे।
3.वट वृक्ष में ब्रम्हा, विष्णु समेत सावित्री का भी वास होता है। इसलिए लंबी आयु के लिए त्रिदेव का ध्यान करें। साथ ही सावित्री माता से अपने सुहाग की रक्षा की कामना करें।
4.अगर आपके पास बरगद के पेड़ की टहनी नहीं है तो आप पूजा स्थल पर एक चौकी बिछाएं। उसमें लाल कपड़ा डाले। इसके बाद भगवान गौरी-गणेश और महादेव की प्रतिमा या फोटो की स्थापना करें। गंगाजल छिड़ककर जगह को पवित्र करें।
5.मां सवित्री और सत्यवान की कथा पढ़ें। भगवान को मिष्ठान चढ़ाएं। साथ ही भीगे हुए कच्चे चने चढ़ाएं।
पूजा में चने का महत्व
सावित्री ने अपने पति के प्राण वापस लाने के लिए यमराज से उसे भी साथ ले जाने को कहा था। इस बात से यमराज ने प्रसन्न होकर सत्यवान के प्राण लौटा दिए थे। साथ ही तीन वरदान भी दिए थे। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार यमदेव ने सत्यवान के प्राण चने के रूप में सौंपे थे। तभी सावित्री ने इस चने को अपने पति के मुंह में रख दिया। ऐसा करते ही सत्यवान जीवित हो गए। इसी कारण वट सावित्री व्रत में चने का विशेष महत्व है।
वट सावित्री कथा
यह पूजा सावित्री के अपने पति सत्यवान को यमराज से वापस लाने की खुशी में मनाया जाता है। कथा के अनुसार सावित्री के पति सत्यवान की आयु बहुत कम थी। एक दिन सत्यवान की मृत्यु हो गई। तब सावित्री अपने पति के शव के साथ वट वृक्ष के नीचे ही बैठी थी। तभी यमराज सत्यवान के प्राण लेने आए। इससे दुखी होकर सावित्री भी यमराज के पीछे चलने लगी और उनसे खुद को ले जाने का कहा। इस बात से प्रसन्न होकर यमदेव ने सावित्री को तीन वरदान मांगने को कहे। सावित्री ने पहले वरदन में अपने सास-ससुर के लिए नेत्र ज्योति मांगी, दूसरे में ससुर का खोया हुआ राज्य और तीसरे वरदान में अपने पति सत्यवान के सौ पुत्रों की मां बनने की इच्छा जताई। यमदेव ने सावित्री की ये तीनों मनोकामनाएं पूर्ण होने का आशीर्वाद दे दिया। इस दिन महिलाएं सोलह श्रंगार करके बरगद के वृक्ष की पूजा करती हैं। इसलिए इसे बरगदाई भी कहा जाता है।
Published on:
21 May 2020 05:37 pm
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