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आई माता की उपासना से जुड़ी आस्था, वडेर परंपरा और आई पंथ पर हुई सार्थक चर्चा

परिचर्चा में आई माता के जीवन, आई पंथ, वडेर (मंदिरों) की परंपरा, समाज की उत्पत्ति, इतिहास और वर्तमान स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई। माही बीज सीरवी समाज का प्रमुख पर्व माना जाता है। घर-घर में पूजा-पाठ का आयोजन होता है, नारियल की ज्योत जलाई जाती है और माताजी से सुख-समृद्धि की कामना की जाती […]

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माही बीज पर्व पर मंगलवार को हुब्बल्ली में आयोजित राजस्थान पत्रिका परिचर्चा में विचार रखते सीरवी समाज के लोग।

माही बीज पर्व पर मंगलवार को हुब्बल्ली में आयोजित राजस्थान पत्रिका परिचर्चा में विचार रखते सीरवी समाज के लोग।

परिचर्चा में आई माता के जीवन, आई पंथ, वडेर (मंदिरों) की परंपरा, समाज की उत्पत्ति, इतिहास और वर्तमान स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई। माही बीज सीरवी समाज का प्रमुख पर्व माना जाता है। घर-घर में पूजा-पाठ का आयोजन होता है, नारियल की ज्योत जलाई जाती है और माताजी से सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। मान्यता है कि आई माता ने समाज को एक सूत्र में बांधने का कार्य किया। विभिन्न स्थानों पर वडेर, जिन्हें मंदिर भी कहा जाता है, स्थापित हैं। यहां समाज के लोग समय-समय पर दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं। समय के साथ समाज में परिवर्तन आया है और आज सीरवी समाज शिक्षा, व्यापार और विभिन्न व्यवसायों में आगे बढ़ रहा है। समाज आज देश के विभिन्न हिस्सों में फैला हुआ है, दक्षिण भारत में भी समाज के लोग व्यापार और उद्योग में अपनी मजबूत पहचान बना रहे हैं।

श्रद्धाभाव से मनाते माही बीज
पाली जिले के मुसालिया निवासी वोराराम सोलंकी ने कहा, माही बीज पूरे श्रद्धाभाव से मनाते हैं। इस दिन पूजा-पाठ धूमधाम से होता है और समाज के लोग एकत्र होकर माताजी का स्मरण करते हैं। सीरवी समाज मुख्य रूप से कृषि और पशुपालन से जुड़ा माना जाता है। परंपरागत रूप से खेती और पशुपालन समाज की आजीविका का आधार रहा है।

बिलाड़ा में भरता है मेला
पाली जिले के सोजतसिटी के निवासी तेजाराम चोयल ने कहा, माही बीज के अवसर पर बिलाड़ा में मेला भरता है। यह परंपरा वर्षों पुरानी है और समाज की एकता को मजबूत करती है।

गहरी आस्था माताजी के प्रति
पाली जिले के बगड़ी नगर के निवासी वेनाराम सोलंकी ने कहा, सीरवी समाज की आई माता के प्रति समाज में गहरी आस्था है। माही बीज और भाद्रवी बीज हमारे प्रमुख पर्व हैं, जिनसे हमारी पहचान जुड़ी है। यह पर्व आस्था, एकता और परंपरा का प्रतीक है। इस दिन समाजजन सामूहिक रूप से पूजा-पाठ करते हैं।

परिवार की खुशहाली की कामना
ब्यावर जिले के चावण्डिया कलां निवासी रतनलाल मुलेवा ने कहा, हम घरों में आई माता की पूजा करते हैं, नारियल की ज्योत जलाते हैं और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।

देशभर में फैले हैं सीरवी समाज के लोग
जोधपुर जिले के मोड़ी सतलाना निवासी मूलाराम सिंदड़ा ने कहा, आज सीरवी समाज देशभर में फैला है। दक्षिण भारत में भी समाज के लोग व्यापार में आगे बढ़ रहे हैं, यह हमारे लिए गर्व की बात है।

शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा समाज
पाली जिले के बगड़ी नगर के निवासी किशन सोलंकी ने कहा, पहले समाज खेती और पशुपालन तक सीमित था, लेकिन अब शिक्षा की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह सकारात्मक बदलाव है।

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