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शिक्षा, सेवा और नेतृत्व से गढ़ी समाज में मजबूत पहचान, शिक्षण संस्थानों के माध्यम से नई पीढ़ी को दे रहे दिशा

सिवाना के भंवरलाल सी. जैन (लक्की) की सफलता की प्रेरक कहानी

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भंवरलाल सी. जैन (लक्की)

भंवरलाल सी. जैन (लक्की)

नई पीढ़ी को आगे बढऩे का संदेश
राजस्थान की धरती ने हमेशा ऐसे व्यक्तित्व दिए हैं, जिन्होंने देश-विदेश में जाकर अपनी मेहनत और लगन से अलग पहचान बनाई है। राजस्थान के बालोतरा जिले के सिवाना निवासी भंवरलाल सी. जैन (लक्की) भी ऐसे ही प्रेरक व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने कर्नाटक के हुब्बल्ली में रहकर शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। 67 वर्ष की आयु में भी उनकी ऊर्जा और सक्रियता युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। भंवरलाल सी. जैन का जीवन इस बात का प्रमाण है कि यदि संकल्प मजबूत हो तो कोई भी व्यक्ति परदेश में रहकर भी अपनी अलग पहचान बना सकता है। सिवाना से हुब्बल्ली तक का उनका सफर संघर्ष, सेवा और सफलता की प्रेरक गाथा है, जो नई पीढ़ी को आगे बढऩे का संदेश देती है।

आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को शुल्क में रियायत
भंवरलाल सी. जैन का जीवन सादगी, अनुशासन और सेवा भाव का प्रतीक है। वे लंबे समय से सामाजिक कार्यों में सक्रिय हैं और हर जरूरतमंद की मदद के लिए तत्पर रहते हैं। वर्तमान में वे श्री जैन राजस्थानी विद्या प्रचारक मंडल के अध्यक्ष हैं और वर्ष 2014 से लगातार इस पद पर कार्यरत हैं। यह उनका चौथा कार्यकाल है, जो उनके नेतृत्व और कार्यक्षमता का प्रमाण है। उनके मार्गदर्शन में मंडल द्वारा पांच शिक्षण संस्थानों का सफल संचालन किया जा रहा है। इनमें शांति निकेतन अंग्रेजी माध्यम स्कूल (1998 से), शांति निकेतन पीयू कॉलेज (2017 से), शांति निकेतन डिग्री कॉलेज (2020 से), शांति निकेतन हिंदी हाई स्कूल और महावीर शिशु विहार शामिल हैं। इन सभी संस्थानों में वे चेयरमैन के रूप में भी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उनकी विशेष पहल यह है कि आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को शुल्क में रियायत देकर शिक्षा का अवसर प्रदान किया जाता है। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान का विस्तार लगातार हो रहा है। हुब्बल्ली के केशवापुर क्षेत्र में पांच एकड़ भूमि पर नए शांति निकेतन अंग्रेजी माध्यम स्कूल का निर्माण प्रस्तावित है। यह सीबीएसई आधारित विद्यालय होगा, जिसमें नर्सरी से बारहवीं तक की शिक्षा उपलब्ध होगी। आने वाले महीनों में निर्माण कार्य शुरू होकर करीब ढाई वर्षों में पूरा होने की संभावना है।

संगठनात्मक गतिविधियों को नई दिशा
भंवरलाल सी. जैन ने सामाजिक संगठनों में भी प्रभावी नेतृत्व दिया है। वे वर्ष 2018 से 2020 तक जीतो हुब्बल्ली चैप्टर के चेयरमैन रहे। उनके कार्यकाल में संगठनात्मक गतिविधियों को नई दिशा मिली। एक साथ कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें कार्यालय उद्घाटन, मुख्य विंग, लेडीज विंग और यूथ विंग का संयुक्त इंस्टॉलेशन शामिल था। उनके नेतृत्व में कर्नाटक, केरल और गोवा जोन की पहली बैठक भी सफलतापूर्वक आयोजित हुई और सदस्यता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। सेवा कार्यों में भी वे हमेशा अग्रणी रहे हैं। वर्ष 2019 में बागलकोट में आई बाढ़ के दौरान जीतो टीम के साथ लगातार 20 दिनों तक प्रभावित लोगों की सहायता की। जीतों की टीम ने कोरोना महामारी के समय जरूरतमंदों को खाद्य सामग्री वितरित की, जागरूकता के लिए प्रमुख लोगों के व्याख्यान आयोजित किए और चिकित्सा सहायता उपलब्ध करवाई। इसके साथ ही अमरावती देवी पारसमल जी चौपड़ा जीतो हुब्बल्ली गल्र्स हॉस्टल एंड एजुकेशन सेंटर के चेयरमैन के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। जिससे आने वाले दिनों में बालिकाओं की शिक्षा और आवास सुविधा को सुदृढ़ दिशा मिल सकेगी। उनके प्रयासों से कई ब्लड डोनेशन कैंप भी आयोजित हुए। वे राष्ट्रोत्थान ब्लड बैंक के ट्रस्टी भी हैं।

कर्नाटक राज्योत्सव अवार्ड
भंवरलाल सी. जैन का अनुभव विभिन्न क्षेत्रों में रहा है। वे वर्ष 1995-97 के दौरान दक्षिण रेलवे की क्षेत्रीय रेल उपयोगकर्ता परामर्शदात्री समिति (जेडआरयूसीसी) के सदस्य भी रह चुके हैं, जब हुब्बल्ली रेलवे जोन चेन्नई के अधीन था। उनकी उत्कृष्ट सेवाओं को मान्यता भी मिली है। उन्हें कर्नाटक राज्योत्सव अवार्ड 2025 से सम्मानित किया गया है, जो सामाजिक और शैक्षणिक क्षेत्र में उनके योगदान का प्रमाण है। इसके अलावा भी विभिन्न संस्थाओं द्वारा समय-समय पर उन्हें सम्मानित किया जा चुका है।

केशवापुर मुक्तिधाम में भी उल्लेखनीय योगदान
सामाजिक सेवा के क्षेत्र में भंवरलाल सी. जैन का योगदान केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है। वे हुब्बल्ली के केशवापुर मुक्तिधाम के वर्ष 1998 से चेयरमैन के रूप में कार्यरत हैं और इस स्थल के विकास व आधुनिकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। मुक्तिधाम में शवदाह के लिए छह स्टैंड बनाए गए हैं, जिससे एक साथ छह चिताओं का अंतिम संस्कार किया जा सकता है। इसके अलावा लगभग 400 लोगों के बैठने की व्यवस्था के लिए सीमेंट की कुर्सियां निर्मित की गई हैं। शव लाने के लिए एम्बुलेंस की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है, जिससे जरूरतमंद परिवारों को बड़ी राहत मिलती है। पिछले 28 वर्षों में यहां करीब 52 हजार से अधिक शवों का अंतिम संस्कार किया जा चुका है, जो इस मुक्तिधाम की उपयोगिता और निरंतर सेवा का प्रमाण है। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी यहां विशेष पहल की गई है। पहले जहां लकड़ी से शवदाह किया जाता था, वहीं अब मूंगफली के छिलकों का उपयोग किया जा रहा है। इससे न केवल पर्यावरण को नुकसान कम होता है, बल्कि सूक्ष्म जीवों की रक्षा भी होती है। यह पहल आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल सोच का उदाहरण है। इस कार्य में उनके सहयोगी वीरेन्द्र डी. चेड्डा भी निरंतर सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं और मुक्तिधाम की व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।