
बाल सत्संग सुधा
रामायण- गीता से जीवन मूल्यों की सीख
पंडित जेठमल श्रीमाली ने बताया कि इस संस्कारशाला में बच्चों को रामायण, श्रीमद्भगवद् गीता सहित अन्य धार्मिक ग्रंथों का सरल और रोचक ढंग से परिचय कराया जा रहा है। शिक्षकों द्वारा श्लोकों का अर्थ समझाया जाता है, जिससे बच्चे केवल पाठ ही नहीं बल्कि उसके भाव और संदेश को भी आत्मसात कर सकें। इसके साथ ही संस्कृत श्लोक, मंत्र, प्रार्थना, योग, ध्यान और खेल गतिविधियां भी कार्यक्रम का हिस्सा हैं, जो बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास में सहायक हैं।
धार्मिक भजनों की प्रस्तुति
बाल सत्संग सुधा के संस्थापक सदस्य बालकृष्ण सराफ ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। बच्चों ने संस्कृत श्लोकों का पाठ, धार्मिक भजनों की प्रस्तुति दी। प्रशिक्षकों ने विभिन्न देवी-देवताओं और उनके वाहनों के बारे में जानकारी देकर बच्चों की जिज्ञासा को और बढ़ाया। वहीं भीखी देवी ने भी भजन प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
हर बच्चे की भागीदारी पर विशेष जोर
राजेश रावल ने बताया कि रविवार को बाल सत्संग सुधा की कमेटी सदस्यों की बैठक आयोजित की गई, जिसमें कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए। निर्णय लिया गया कि सभी बच्चों के लिए एक आवेदन पत्र अनिवार्य होगा, हालांकि यह संस्कारशाला पूर्णत: नि:शुल्क रहेगी। संस्कारशाला में समयपालन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। बैठक में भविष्य में सभी बच्चों के लिए एक जैसी ड्रेस तैयार करने, तथा गाय हमारी माता विषय पर चित्रकला शीट वितरित करने का प्रस्ताव भी रखा गया। इसके अंतर्गत बच्चे गाय का चित्र बनाकर उस पर पांच वाक्य लिखकर लाएंगे, जिससे बच्चों के साथ-साथ परिवार का जुड़ाव भी बढ़ेगा।
महाभारत के पात्रों पर लेखन कार्य
इसके अलावा आने वाले दिनों में बच्चों को वीर बालक-बालिकाओं की पुस्तिकाएं, अन्य धार्मिक पुस्तकें, रामायण पाठ एवं महाभारत के पात्रों पर लेखन कार्य कराया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर बच्चा किसी न किसी गतिविधि में अवश्य भाग ले और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़े।
बैठक में संस्थापक सदस्य बालकृष्ण सराफ, जेठमल श्रीमाली, उदाराम प्रजापत थलवाड़, राजेश रावल, किशोर चौधरी गोलिया चौधरियान, बाबूलाल सीरवी समेत अन्य उपस्थित थे।
Published on:
04 Jan 2026 05:50 pm
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