
मौसम ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया
जानकारी के अनुसार अफजलपुर तहसील के कई गांवों में तेज हवाओं के कारण केले के पौधे जड़ से उखड़ गए, जबकि कई खेतों में पूरी फसल जमीन पर गिर गई। यह फसल कटाई के करीब पहुंच चुकी थी और किसान अच्छी पैदावार की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन अचानक आए मौसम ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
कलबुर्गी की प्रसिद्ध कमलापुर लाल केला किस्म के लिए अलग पहचान
किसानों का कहना है कि उन्होंने केले की खेती पर बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी के लिए भारी निवेश किया था। कई किसानों ने खेती के लिए कर्ज भी लिया था। ऐसे में अचानक हुए नुकसान ने उन्हें आर्थिक संकट की स्थिति में ला खड़ा किया है। कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकारों के अनुसार केले की खेती में प्रति एकड़ लाखों रुपए तक की लागत आती है। इसी आधार पर 500 एकड़ में हुए नुकसान का अनुमान 10 से 15 करोड़ रुपए या उससे अधिक लगाया जा रहा है, हालांकि वास्तविक आंकड़े सर्वेक्षण के बाद सामने आएंगे। प्रशासन ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि कमलापुर लाल केला की किस्म को नुकसान पहुंचा है या अन्य किस्म को। बागवानी विभाग के विस्तृत सर्वेक्षण के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। कलबुर्गी जिला उत्तर कर्नाटक के प्रमुख केला उत्पादक क्षेत्रों में गिना जाता है और यह अपनी प्रसिद्ध कमलापुर लाल केला किस्म के लिए अलग पहचान रखता है। जिले में कमलापुर लाल केला के अलावा ग्रैंड नाइन (जी-9), रोबस्टा और अन्य व्यावसायिक किस्मों की भी बड़े पैमाने पर खेती की जाती है।
राहत पैकेज और उचित मुआवजे की मांग
कर्नाटक देश के प्रमुख केला उत्पादक राज्यों में शामिल है और राष्ट्रीय उत्पादन में राज्य का लगभग 4 से 5 प्रतिशत योगदान माना जाता है। राज्य में करीब 60 से 65 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में केले की खेती की जाती है। कलबुर्गी, विजयपुर, बल्लारी, कोप्पल, बेलगावी, मांड्या और मैसूरु जैसे जिले केला उत्पादन के प्रमुख केंद्र हैं। क्षेत्रीय विधायक एम.वाई. पाटील ने मामले पर चिंता जताते हुए बागवानी विभाग के अधिकारियों को प्रभावित गांवों का दौरा करने और नुकसान का सर्वेक्षण करने के निर्देश दिए हैं। प्रभावित किसानों ने सरकार से तत्काल राहत पैकेज और उचित मुआवजे की मांग की है।
Published on:
20 May 2026 09:43 pm
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