
हुब्बल्ली के रामदेव भवन में बाल सत्संग सुधा में शामिल बच्चे।
गुरु की महिमा
कार्यक्रम की शुरुआत पंडित जेठमल श्रीमाली ने ओम गण गणपतये नम: के सामूहिक उच्चारण से करवाई। इसके बाद भगवान गणपति, माता-पिता एवं गुरु का स्मरण किया गया। पंडित श्रीमाली ने गुरु की महिमा बताते हुए कहा कि जीवन में गुरु का स्थान सर्वोपरि होता है। उन्होंने बच्चों को प्रतिदिन प्रात: उठकर धरती माता को प्रणाम करने तथा ध्यानपूर्वक ओम के उच्चारण का महत्व समझाया।
धार्मिक ज्ञान के साथ आत्मविश्वास का विकास
कार्यक्रम के दौरान श्री राम जय राम, सीताराम सीताराम, विल विल हरिओम, हरे वासुदेवाय एवं राधे राधे का सामूहिक उच्चारण किया गया। बच्चों को भगवान वि_ल, श्रीराम और श्रीकृष्ण के जन्म स्थलों की जानकारी दी गई। साथ ही देवताओं के वाहनों के बारे में बताया गया, जिसमें गणपति का मूषक, शिव का नंदी और विष्णु का गरुड़ शामिल है।
हनुमान चालीसा का पाठ
कार्यक्रम में बच्चों से धर्म से जुड़े प्रश्न पूछे गए, जिनके सही उत्तर बच्चों ने दिए। भारत में 12 ज्योतिर्लिंग, चार धाम बद्रीनाथ, द्वारका, पुरी और रामेश्वरम, रामचरितमानस के रचयिता **गोस्वामी तुलसीदास, श्रीमद्भागवत के रचयिता वेदव्यास तथा चार वेद की जानकारी दी गई। गायत्री मंत्र को सभी वेदों की जननी बताया गया। इस अवसर पर हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। रात को सोते समय श्रीकृष्ण मंत्र के जप और शिव मंदिर में ओम नम: शिवाय के उच्चारण के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया।
भजन, कविता और श्लोक पाठ
कार्यक्रम में भीखी प्रजापत एवं सोनू चौधरी ने मेरे तन में भी राम, मेरे मन में भी राम… भजन प्रस्तुत किया। कई विद्यार्थियों ने कविताओं की पंक्तियां, मंत्र एवं श्लोक सुनाए। अगली कक्षा के लिए बच्चों को महापुरुषों के नारे याद करने का कार्य भी दिया गया। समूचे कार्यक्रम की व्यवस्थाओं का संयोजन राजेश रावल ने किया।
Updated on:
18 Jan 2026 07:37 pm
Published on:
18 Jan 2026 07:37 pm
