
गोकर्ण महाबलेश्वर मंदिर में फिर गहराया पूजा का विवाद
हुब्बल्ली
राज्य भर में भगवान शिव के आत्मलिंग वाला एकमात्र गोकर्ण महाबलेश्वर मंदिर एक बार फिर सुर्खियों में है। उत्तर कन्नड़ जिले के गोकर्ण में स्थित यह मंदिर दक्षिण काशी के नाम से भी जाना जाता है।
इस मंदिर के दर्शन के लिए राज्य समेत देश के विभिन्न जगहों से श्रध्दालु आते हैं। फिलहाल कोरोना नियमों में ढील देने से भगवान के दर्शन का मौका दिया गया है जिसके चलते श्रध्दालु भी आ रहे हैं परन्तु वर्तमान में उच्चतम न्यायालय के अधीन स्थित इस मंदिर में पूजा करने के मुद्दे पर स्थानीय मातहतों के बीच उपजे विवाद के कारण श्रध्दालुओं को आत्मलिंग के दर्शन नहीं हो पा रहे हैं।
फिर से विवाद का केंद्र बिंदु बना मंदिर
राज्य में कोरोना नियमों में ढील से मंदिरों को खोलने का सरकार ने मौका दिया है। इसके चलते उत्तर कन्नड़ जिले के कुमटा तालुक का गोकर्ण महाबलेश्वर मंदिर भी श्रध्दालुओं के लिए खुला है। यहां सैकड़ों की संख्या में श्रध्दालु आ रहे हैं। मंदिर में किसी भी सेवा के लिए मौका नहीं दिया गया है, जिसके चलते सरकार के आदेश के तहत कोरोना दिशा-निर्देशों के पालन के साथ श्रध्दालुओं को भगवान के दर्शन के लिए मात्र मौका दिया गया था परन्तु अब मंदिर में अनादि काल से पूजा करते आए मातहतों के बीच पूजा के अधिकार को लेकर उपजे विवाद से मंदिर फिर से विवाद का केंद्र बिंदु बना है।
श्रध्दालुओं को भी आत्मलिंग के दर्शन नहीं
कोरोना दिशा-निर्देशों में ढील के बीच ही महाबलेश्वर मंदिर में लोगों को दर्शन के लिए मौका दिया गया था। उच्चतम न्यायालय की समिति की देखरेख में मंदिर में शिवरात्रि, श्रावण मास जैसे विशेष मौकों पर मातहतों को मंदिर आकर निर्धारित समय में व्यक्तिगत पूजा करने का मौका दिया गया था परन्तु इसी मुद्दे को लेकर अब मातहतों तथा मंदिर (देवस्थान) समिति के बीच पूजा के अधिकार को लेकर विवाद उपजा है। मंदिर में ही आत्मलिंग की पूजा करने के लिए किसी को भी मौका नहीं देने का समिति के अध्यक्ष उप विभागीय अधिकारी राहुल पांडे ने आदेश जारी किया है। इसके चलते श्रध्दालुओं को भी आत्मलिंग के दर्शन नहीं हो पा रहे हैं।
उच्चतम न्यायालय में दायर की गई थी याचिका
पूर्व में सरकार के अधीन स्थित महाबलेश्वर मंदिर का प्रबंधन वर्ष 2007 में श्रीरामचंद्रापुर मठ को दिया गया था। इसके बाद पूर्व से भगवान की पूजा करते आए अनुवांशिक अधीनस्तों को पूजा करने का मौका नहीं देने के चलते उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की गई थी। फिलहाल इस बारे में आदेश देकर उच्चतम न्यायालय ने मई 2021 को मंदिर को मठ प्रशासन से अपने अधीन में लेकर मठ के प्रशासन को पूर्व में स्थित पूजा विधानों को जारी रखने का आदेश जारी कर एक प्रशासन समिति का गठन किया परन्तु समिति में स्थित कुछ मठ के सदस्यों ने अनुवांशिक अधीनस्तों को पूजा करने का मौका देने से इनकार करने से उलझन पैदा हो गई है।
इस बारे में जिलाधिकारी मुलई मुहिलन एमपी ने कहा कि किसी भी प्रकार की उलझन नहीं पैदा करने के समिति को निर्देश दिए गए हैं। इस संबंध में बैठक बुलाकर उचित कार्रवाई की जाएगी।
Published on:
26 Sept 2021 09:21 pm
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