हमारी ताकत-हमारी कमजोरी विषयक सेमिनार चेहरे पर मुस्कान हो और भाषा में झलके नम्रता
हुब्बल्ली. बीता समय लौटकर कभी नहीं आता। न समय को उधार लिया जा सकता है और न ही इसे स्टोर करके रखा जा सकता है। समय विरासत में भी नहीं मिलता। जो समय निकल गया वह वापस नही ंआता। इसलिए समय का सदुपयोग करें। समय के साथ खुद को आगे बढ़ाएं।
साध्वी विपुलदर्शना ने यह बात कही। वे रविवार को यहां कंचगार गली स्थित महावीर भवन में हमारी ताकत-हमारी कमजोरी (डिजाइनिंग यूथ्स लाइफ) विषयक सेमिनार में बोल रही थीं। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के तत्वावधान तथा नवकार नवयुवक मंडल की मेजबानी में आयोजित सेमिनार में साध्वी ने कहा कि समय एक ऐसा डिवाइस है जिसमें रिवाइन्ड एवं रिप्ले सिस्टम ही नहीं हैं। एक बार जब समय चला गया तो फिर कभी लौटकर नहीं आता। हम जागरूक बनें। साथ ही जो काम हम कर रहे हैं उसे सुन्दरता के साथ करो। एक्शन को यदि आर्ट में बदलने की कला सीख ली तो हर काम आसान हो जाएगा। हम जो भी क्रिया कर रहे हैं उसका संयोजन बेहद अच्छी तरीके से हो। साध्वी ने कहा कि यदि किसी काम को मिलकर किया जाएं तो उसके परिणाम भी अधिक अनुकूल मिलते हैं। समाज के युवा वर्ग में बहुत ताकत है। यदि युवा वर्ग मिल जाएं तो धर्म व समाज के स्वरूप को बदल सकते हैं। संगठित बनेंगे तभी ताकत बन पाएंगे। हमारी शक्तियां बिखरी हुई हैं, पूरी तरह से उसमें जुड़ जाओ।
अपनी ताकत को मजबूत बनाएं
इन्फोसिस में इंजीनियर के रूप में सेवाएं दे चुकीं तथा 11 साल पहले दीक्षित हुई साध्वी मधुरदर्शना ने कहा कि हम अपनी ताकत एवं कमजोरी को पहचान कर आगे बढ़ें। खासकर हमें अपनी ताकत का पता होना चाहिए। यह बहुत जरूरी है। यदि सौ फीसदी ताकत बनानी है तो हमें उस पर मजबूती के साथ काम करना होगा। हमें अपनी कमजोरी को भी पहचानना है।
मिसरी की तरह हो मीठी भाषा
साध्वी ने कहा कि हर क्षेत्र एवं हर हालात में अपनी ताकत होनी चाहिए। हमें देखना होगा कि मौजूदा हालात में हम अप-टू-डेट हैं या नहीं। हमारा नॉलेज अप-टू-डेट होना चाहिए। कोई अवसर मिले उसे कभी गंवाना नहीं। हमें अपनी ताकत पर अधिक ध्यान देना है। उसे मजबूत बनाना है। साध्वी ने कहा कि हमारे चेहरे पर मुस्कान हो। हमारी भाषा में नम्रता हो। मिसरी की तरह मीठी भाषा हमारी बने। हमारे विचार सकारात्मक हो। सेमिनार 15 से 45 वर्ष आयु वर्ग के लिए आयोजित की गई थी।