
निशान यात्रा में श्रद्धा का रंग: हाथों में निशान लिए सहभागी महिलाएं।
भाव-विभोर होकर बाबा के नाम में लीन
निशान यात्रा का शुभारंभ श्री गणेश मंदिर, प्रथम गेट, इंडस्ट्रियल एस्टेट, गोकुल रोड से हुआ। भक्तगण हाथों में रंग-बिरंगे निशान लिए, श्याम बाबा के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे। कोई नाच रहा था, कोई गा रहा था, तो कोई भाव-विभोर होकर बाबा के नाम में लीन दिखा। मधुर स्वर लहरियों ने यात्रा को और भी आकर्षक बना दिया। यात्रा में सजे रथ पर विराजमान श्याम बाबा की मनोहारी झांकी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रही। यह आयोजन राजस्थान की भक्ति परंपरा और कर्नाटक की सांस्कृतिक स्वीकार्यता का सुंदर उदाहरण बना, जहां श्याम बाबा की कृपा से हर चेहरा श्रद्धा और आनंद से दमकता नजर आया।
सामाजिक सौहार्द का प्रतीक
पूरे मार्ग में जिस प्रकार का उत्साह और अनुशासन देखने को मिला, उसने राजस्थान के खाटू में निकलने वाली निशान यात्राओं की स्मृति ताजा कर दी। महिला, पुरुष, युवा और बच्चे—सभी अपने हाथों में निशान थामे हुए थे। प्रवासी राजस्थानी समाज के साथ ही अन्य श्रद्धालुओं की भी उल्लेखनीय भागीदारी रही, जिसने इस आयोजन को सामाजिक सौहार्द का प्रतीक बना दिया।
बाबा के नाम की गूंज
निशान यात्रा के पश्चात गोकुल रोड स्थित नानकी कन्वेंशन सेंटर में भव्य भजन संध्या का आयोजन किया गया। इस अवसर पर राजस्थान के अलवर से प्रसिद्ध भजन गायक गौरव दत्त ने अपने सुमधुर भजनों से श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। हारे का सहारा श्याम हमारा जैसे भजनों पर पूरा पंडाल झूम उठा और देर रात तक बाबा के नाम की गूंज बनी रही।
श्याम मंदिर की महिमा
कार्यक्रम के दौरान राजस्थान स्थित खाटू श्याम मंदिर की महिमा पर भी प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने बताया कि खाटू श्याम मंदिर आस्था, विश्वास और समर्पण का ऐसा केंद्र है, जहां देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। निशान यात्रा की परंपरा भी वहीं से जुड़ी है, जिसमें भक्त अपने संकल्प और श्रद्धा के प्रतीक रूप में निशान लेकर बाबा के दरबार तक पहुंचते हैं। उसी परंपरा को जीवंत रखते हुए हुब्बल्ली में भी वर्षों से निशान यात्रा निकाली जा रही है।
भक्ति के माध्यम से सामाजिक एकता
आयोजक श्याम मित्र मंडल हुब्बल्ली के पदाधिकारियों ने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य प्रवासी समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखना और भक्ति के माध्यम से सामाजिक एकता को मजबूत करना है। 14 वर्षों से लगातार आयोजित हो रहा यह कार्यक्रम आज हुब्बल्ली की धार्मिक पहचान का हिस्सा बन चुका है।
Updated on:
11 Jan 2026 06:51 pm
Published on:
11 Jan 2026 06:50 pm
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