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रामकथा से संस्कार तक: अखिल भारतीय मानस प्रचार समिति बना रही सनातन संस्कृति का सेतु

कर्नाटक की औद्योगिक और सांस्कृतिक नगरी हुब्बल्ली में प्रवासी सनातनी परिवारों की आस्था, संस्कार और एकता का सशक्त केंद्र बनी हुई है अखिल भारतीय मानस प्रचार समिति। लगभग 28 वर्ष पूर्व गठित यह समिति न केवल श्रीरामचरितमानस के प्रचार-प्रसार का कार्य कर रही है, बल्कि प्रवास में रहते हुए भी भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों को जीवंत बनाए रखने का माध्यम बनी हुई है।

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प्रवास में भी सनातन संस्कृति एवं घर-घर रामकथा की परंपरा निभाते अखिल भारतीय मानस प्रचार समिति हुब्बल्ली के समर्पित सदस्य।

प्रवास में भी सनातन संस्कृति एवं घर-घर रामकथा की परंपरा निभाते अखिल भारतीय मानस प्रचार समिति हुब्बल्ली के समर्पित सदस्य।

नई पीढ़ी को संस्कारों की मजबूत नींव
समिति के सदस्यों का कहना है कि इस सत्संग की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि सभी सदस्य प्रसन्न, संयमित और आध्यात्मिक रूप से संतुलित रहते हैं। प्रवास में रहते हुए यह समिति सनातन संस्कृति से जुड़ाव बनाए रखने की प्रेरणा बन चुकी है और आने वाली पीढ़ी को संस्कारों की मजबूत नींव दे रही है। इस समिति की मुख्य शाखा अयोध्या में स्थित है, जबकि हुब्बल्ली इकाई की स्थापना में राजस्थान के सुजानगढ़ (चूरू) निवासी बालकृष्ण सराफ की प्रमुख भूमिका रही। उनके साथ छोटे भाई नंदकिशोर सराफ एवं चंद्रशेखर सराफ का सहयोग मिला, वहीं बड़े भाई पुरुषोत्तम सराफ का मार्गदर्शन इस समिति की नींव को मजबूत करने वाला रहा। वर्तमान में समिति से 41 प्रवासी परिवार जुड़े हुए हैं।

साप्ताहिक रामकथा से सुदृढ़ होता पारिवारिक और सामाजिक बंधन
समिति के तत्वावधान में हर रविवार सायं 5 से 7 बजे तक साप्ताहिक आयोजन किया जाता है। यह आयोजन प्रत्येक सप्ताह किसी एक सदस्य के घर पर होता है, जिससे घर-घर रामकथा का संचार होता है और परिवारों में आध्यात्मिक वातावरण बनता है। कार्यक्रम में कीर्तन, प्रार्थना, श्रीरामचरितमानस का मूल पाठ (पांच दोहा-चौपाई), एक दोहे की भावार्थ सहित व्याख्या, गोस्वामी तुलसीदास जी के अन्य ग्रंथों से चयनित पदों का पाठ, 108 बार मौन श्रीसीताराम नाम जप तथा आरती शामिल रहती है।

अनुशासन, निरंतरता और भक्ति—समिति की पहचान
समिति की विशेषता इसकी अनुशासित कार्यप्रणाली और निरंतरता है। करीब साढ़े चार वर्षों की अवधि में एक संपूर्ण रामायण पाठ पूर्ण होता है। अब तक पांच रामायण पूर्ण की जा चुकी हैं और वर्तमान में छठी रामायण का क्रम चल रहा है। सदस्य अपने साथ रामायण, गीता, हनुमान चालीसा, ढोलक, मंजीरा एवं श्रीकृष्ण उपदेश की पुस्तकें भी लाते हैं।

41 प्रवासी परिवार जुड़े हुए
समिति से बालकिशन सराफ सुजानगढ़, सुरेश अग्रवाल श्रीमाधोपुर, राजेन्द्र गोयल बुहाना, मकनीदेवी अग्रवाल चौमूं, रमाकांत शर्मा नरैना, मुन्नीदेवी गोयल जयपुर, किरण मोदी पिलानी, राजेन्द्र सराफ नवलगढ़, महावीरप्रसाद मालानी नोखा, रमण सिंघानिया बीकानेर, जीतेन्द्र अग्रवाल झुंझुनूं, चन्द्रकांत देसाई वीरपुर, शारदादेवी अग्रवाल खेतड़ी, संध्यादेवी महाजन बालावास, हरीश मोठ डीडवाना, नरेन्द्र शर्मा मौलासर, रामावतार बंसल तारानगर, महेश गुप्ता तारानगर, सुरेश गुप्ता अलीगढ़, रमेश बोहरा, अरूण शर्मा रतनगढ़, नरेश बापट सौराष्ट्र, सुरेश मोदी पिलानी समेत 41 परिवार जुड़े हुए हैं।